बिहार होमगार्ड व अग्निशमन सेवा की डीजी शोभा अहोतकर एक बार फिर से विवादों में घिर गई हैं. डीआइजी अनुसूइया रणसिंह साहू ने डीजी पर विभाग में अनियमितता, सुनियोजित तरीके से फंसाने और मानसिक रूप से प्रताड़ित किये जाने का आरोप लगाया था. जिसके बाद डीजी शोभा अहोतकर ने डीआइजी अनुसूइया रणसिंह साहू के खिलाफ गृह विभाग को शिकायतें भेजी थी. अब डीजी और डीआइजी के बीच विवाद बढ़ता देख राज्य सरकार ने डीआइजी अनुसूइया रणसिंह साहू का तबादला कर दिया है.
उप निदेशक नागरिक सुरक्षा के पद पर ट्रांसफर
तबादले को लेकर गृह विभाग ने अधिसूचना जारी कर दी है. जिसके अनुसार अनुसुइया रणसिंह साहू को गृह रक्षा वाहिनी और अग्निशमन सेवा के डीआईजी से स्थानांतरित कर अगले आदेश तक उप निदेशक नागरिक सुरक्षा के पद पर पदस्थापित कर दिया है.
अनुसूइया रणसिंह साहू ने लिखी थी 13 पन्नों की चिट्ठी
बता दें कि अनुसूइया रणसिंह साहू ने 13 पन्नों का एक पत्र लिख डीजी शोभा अहोतकर पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं. यह लेटर उन्होंने मुख्य सचिव, डीजीपी, गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव सहित अन्य अधिकारियों को भी भेजा, जिसके बड़ हंगामा मच गया. उन्होंने अपने पत्र के माध्यम से कहा कि मार्च 2023 में पोस्टिंग के बाद अग्निशमन वाहन की खरीद में बिहार सरकार को हो रहे 6.5 करोड़ रुपये के भारी नुकसान को उन्होंने रोका. इसके बाद होमगार्ड जवानों की पोस्टिंग में वसूली मामले की जांच भी उन्होंने की. इसके बाद से ही उनको टारगेट किया जाने लगा. यह कई घटनाओं के माध्यम से सामने आयी. झूठे, दुर्भावनापूर्ण, सतही और मानसिक प्रताड़ना देने के उद्देश्य से बिना साक्ष्य के आरोप लगाये गये. उन्होंने अपने पत्र में लिखा कि डीजी शोभा अहोतकर उन्हें फंसाने के लिए साजिश रच रही हैं और उन्हें मानसिक रूप से परेशान भी किया जा रहा है. डीआइजी का कहना है कि उनके पूरे परिवार को जान का खतरा है और उन्होंने इस मामले पर वरीय अधिकारियों को ध्यान देने के लिए कहा है.
हाेमगार्ड की डीजी ने भेजी थी गृह विभाग को शिकायत
इसके बाद बुधवार को डीजी शोभा अहोतकर ने डीआइजी अनुसूइया रणसिंह साहू के खिलाफ गृह विभाग को शिकायतें भेजी हैं. डीजी ने बताया कि अनुसूइया के खिलाफ मुख्य रूप से अनधिकृत रूप छूट्टी पर रहने, इस दौरान सरकारी वाहन और संसाधन का उपयोग और रेप केस में जेल भिजवाने की धमकी देने जैसे संगीन आरोप हैं. डीजी ने बताया कि महिला डीआइजी की पोस्टिंग के बाद उनसे मेरी मात्र एक बार मीटिंग में मुलाकात हुई है. उसके बाद बगैर आवेदन दिये वे तीन माह तक छुट्टी पर रहीं. उन्होंने कहा कि योगदान देने के बाद कार्यालय के सहकर्मियों के साथ उनका रवैया काफी खराब रहा. छह बार उनके खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई के लिए गृह विभाग को लिखा गया.
डीजी अहोतकर ने बताया कि महिला डीआइजी ने एक टेंडर की अनुसंशा अपने स्तर से की थी, जिसे क्रय समिति ने रद्द कर दिया. उसके बाद से ही वे छूट्टी पर चली गयी थीं. बिना स्वीकृत अकाश पर रहने के कारण गृह विभाग ने कई बार उनसे स्पष्टीकरण पूछा, लेकिन उन्होंने एक बार भी जवाब नहीं दिया. मामला मुख्य सचिव तक पहुंचा, जिसके बाद उनके वेतन पर रोक लगाने का आदेश जून में जारी हुआ. जैसे ही इस आदेश की जानकारी डीआइजी को हुई, तो वो उसके अगले ही दिन दफ्तर पहुंच गयीं.
वहीं इससे पहले फरवरी महीने में डीजी शोभा अहोतकर से विवाद के 2003 बैच के आइपीएस अधिकारी विकास वैभव का भी तबादला कर दिया गया था. उन्हें गृह रक्षा वाहिनी एवं अग्निशाम सेवा के आइजी के पद से ट्रांसफर कर वेटिंग फॉर पोस्टिंग में रख दिया था.
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