बिहार में अब माउस के एक ही क्लिक पर जमीन का इतिहास उपलब्ध होगा. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग इसकी तैयारी कर रहा है. इसकी प्रक्रिया अंतिम चरण में है और इसी साल यह सेवा ऑनलाइन शुरू होने की संभावना है. इससे आमलोगों को जमीन-जायदाद की जानकारी के लिए अंचल कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने होंगे. उनके समय की बचत होगी. जमीन विवाद में कमी आयेगी. साथ ही अंचल कार्यालयों में भी काम का दबाव और भीड़भाड़ कम होगी. सरकार को जमीन की लगान भी ऑनलाइन मिल सकेगी.
सूत्रों के अनुसार राज्य में इस समय करीब तीन करोड़ 78 लाख जमाबंदी हैं. इन सभी का डिजिटलीकरण कर दिया गया है. अब इनके सत्यापन का काम चल रहा है. इनका सत्यापन करने के लिए डिजिटल किये गये जमाबंदी का मिलान जमाबंदी पंजी से किया जा रहा है. इस प्रक्रिया में डिजिटल जमाबंदी की अशुद्धियां या त्रुटियों को खत्म करने किया जा रहा है. इसके लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने पत्र लिखकर सभी अपर समाहर्ताओं को 15 अप्रैल तक की समय -सीमा दी है.
सूत्रों के अनुसार इसके पहले विभाग ने सभी तीन करोड़ 78 लाख डिजिटल जमाबंदी के सत्यापन का काम 31 मार्च ,2023 तक पूरा करने का सभी अपर समाहर्ताओं को नौ दिसंबर ,2022 को निर्देश जारी किया था. हालांकि, सत्यापन का काम पूरा करने में अधिक समय लगने की संभावना के कारण विभाग ने 28 फरवरी को निर्देश जारी कर सभी अपर समाहर्ताओं से 15 अप्रैल, 2023 तक पूरा करने के लिए कहा है.
इन जमाबंदियों के डिजिटल हो जाने से आम लोगों को विभाग की वेबसाइट पर ही जमीन से संबंधित जानकारियां उपलब्ध हो सकेंगी. इसमें जमीन के इतिहास का पूरा विवरण उपलब्ध होगा. जमाबंदी पंजी में उपलब्ध सभी जानकारियां डिजिटल रूप में उपलब्ध रहेंगी. बाद में विभाग की वेबसाइट पर इन सभी को अपलोड होने से आम लोगों को बहुत सहूलियत होगी.
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