बिहार में 7 जनवरी से जातिगत गणना, हर आवास को मिलेगा यूनिक नंबर, भविष्य में यही होगा घरों का स्थायी पता

बिहार में लोकसभा चुनाव की आहट के बीच जातिगत गणना की शुरुआत सात जनवरी से होने वाली है. इसे लेकर तमाम प्रशासनिक तैयारियां पूरी हो चुकीं हैं. जातिगत गणना की बात जब बिहार में उठी थी तब इसे लेकर खूब सियासत हुई थी. उस समय बिहार के तमाम राजनीतिक दलों के शिष्ट मंडल ने नीतीश कुमार की अगुवाई में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात भी की थी. तब नीतीश कुमार एनडीए के साथ थे उस वक्त बीजेपी ने जातिगत गणना को लेकर कुछ सुझाव भी दिए थे. इसको लेकर बीजेपी और जदयू के बीच काफी बयानबाजी भी हुई थी. लेकिन अब जब इसकी शुरुआत हो रही है तो नीतीश कुमार महागठबंधन के साथ हैं. माना जा रहा है कि जातिगत गणना बिहार की सियासत में बहुत गहरा असर डाल सकता है.

अब ये जानना भी बेहद दिलचस्प है कि जातिगत गणना की जब शुरुआत होगी तो इसमें होगा क्या? अब तक मिली जानकारी के अनुसार, सात जनवरी से 21 जनवरी तक पहले आवास की गणना होगी और उसके बाद एक यूनिक नंबर दिया जाएगा. यही नंबर भविष्य में घरों का स्थायी पता होगा और आने वाले समय में इसी आधार पर गांव और मोहल्ले का कोई डॉक्यूमेंट तैयार किया जा सकेगा. इसके पूरा होने बाद फिर से जातिगत गणना शुरू होगी जो 31 मई 2013 तक पूरी कर ली जाएगी.

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जातिगत गणना को लेकर सामान्य प्रशासन विभाग पूरी तरह से तैयार है और तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है ताकि कोई त्रुटि ना रह जाए. जातिगत गणना में जो भी अधिकारी और कर्मचारी लगाए गए हैं उनकी समुचित ट्रेनिंग के साथ-साथ उसके मॉनिटरिंग का भी निर्देश दिया गया है. इस कार्य में सभी जिलों के DM को प्रधान गणना पदाधिकारी सह नोडल पदाधिकारी बनाया गया है.

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बता दें कि बिहार में जातिगत गणना कराने के लिए केंद्र सरकार से मदद मांगी गई थी, लेकिन जब केंद्र सरकार ने मना कर दिया. अब बिहार सरकार खुद के खर्च पर 500 करोड़ रुपये की राशि आवंटित कर जातिगत गणना करवा रही है. जातिगत गणना में 204 जातियों को चिन्हित किया गया है; जिसमें 113 अति पिछड़ी जाति, 30 पिछड़ी जाति, 32 अनुसूचित जाति ३२ और 32 अनुसूचित जन जाति के साथ-साथ सामान्य वर्ग के सात जातियों को शामिल किया गया है.

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जाहिर है जातिगत गणना की रिपोर्ट आने के बाद कई जातियों की आबादी की तस्वीर साफ होने की उम्मीद है. इसके बाद न सिर्फ उनके राजनीतिक हालात बदल सकते हैं; बल्कि आर्थिक और सामाजिक ढांचे में भी काफी परिवर्तन हो सकता है. साथ ही इस रिपोर्ट के आने के बाद कई राजनीतिक पार्टियों की राजनीति की पूरी तस्वीर भी बदल सकती है.

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