पटना हाई कोर्ट ने बिहार पुलिस को लगाई फटकार, कहा – आपने भू-माफिया से मिलकर प्रशासन का बना दिया है तमाशा

एक महिला के घर को कथित रूप से बुलडोजर से ढहाने के लिए पटना हाईकोर्ट ने बिहार पुलिस को कड़ी फटकार लगाई. इस मामले में थाना प्रभारी के जवाबी हलफनामे पर विचार करते हुए अदालत ने प्रथम दृष्टया यह पाया कि राज्य पुलिस द्वारा कानून की उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना घर को अवैध रूप से ध्वस्त कर दिया गया. न्यायमूर्ति संदीप कुमार ने सुनवाई के दौरान मौखिक टिप्पणी की, ‘क्या यहां भी बुलडोजर चलने लगा? ऐसा कौन शक्तिशाली आदमी है जो बुलडोजर लेकर तोड़ दिया उनका मकान. आप (पुलिस) किसका प्रतिनिधित्व करते हैं, स्टेट या किसी निजी व्यक्ति का? तमाशा बना दिया. किसी का भी घर बुलडोजर से तोड़ देंगे.’ जज ने पुलिस व प्रशासन के अधिकारियों पर भू-माफिया के साथ सांठगांठ होने का आरोप भी लगाया.

जस्टिस संदीप कुमार की पीठ ने मौखिक रूप से कहा, ‘पुलिस को ही पावर दे दिया है भूमि विवाद चिन्हित करने और उसके निष्पादन का? आपकी समस्या है तो थाने पर जाएं, पैसे दें और किसी का भी घर तुड़वा दें, किसी का…सिविल कोर्ट को बंद कर दीजिए.’ पीड़ित पक्ष के वकील ने अदालत को सूचित किया कि कुछ भू-माफिया भी मामले में शामिल हैं और ऐसे व्यक्तियों को याचिका में प्रतिवादी नंबर 8 से 12 तक के रूप में शामिल किया गया है. इसका संज्ञान लेते हुए पीठ ने नंबर 8 से 12 तक के प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया और 8 दिसंबर को सुनवाई की अगली तारीख पर अपने वकीलों के माध्यम से अदालत में पेश होने का निर्देश दिया.

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अदालत ने याचिकाकर्ता के विरुद्ध दर्ज एफआईआर पर रोक लगा दी

न्यायमूर्ति संदीप कुमार ने अगमकुआं पुलिस स्टेशन के एसएचओ को प्रतिवादी नंबर 8 से 12 के क्रिमिनल रिकॉर्ड प्रस्तुत करने के लिए निर्देशित किया. याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को सूचित किया कि उनके मुवक्किल और उसके परिजनों के खिलाफ भू-माफिया के इशारे पर जमीन खाली करने के लिए दबाव बनाया गया और झूठा मुकदमा दर्ज किया गया. चूंकि जमीन का एक हिस्सा कुछ लोगों को बेचा गया था, इसलिए उन्होंने अवैध कब्जे की कोशिश की थी. इस पर पीठ ने आश्वासन दिया कि अदालत याचिकाकर्ता की सुरक्षा के लिए है न कि उन्हें परेशान करने के लिए. नतीजतन, अदालत ने याचिकाकर्ता के विरुद्ध दर्ज एफआईआर पर रोक लगा दी और पुलिस को निर्देश दिया कि किसी की भी गिरफ्तारी नहीं होनी चाहिए.

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जस्टिस संदीप कुमार ने राज्य के वकील के सामने अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए मौखिक टिप्पणी की, ‘5-5 लाख रुपये दिलवाएंगे हम, घर टूटने का…पर्सनल पॉकेट से. एजेंट बने हुए हैं ना… पुलिस और सीओ मिलकर घर तुड़वा रहे हैं घूस लेकर. इसे रोका जाना चाहिए.’ अदालत ने ईस्ट पटना पुलिस अधीक्षक, पटना सिटी अंचल अधिकारी और पटना अगमकुआं पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी को भी 8 दिसंबर, 2022 को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का निर्देश दिया. याचिकाकर्ता सजोगा देवी का घर 15 अक्टूबर को पुलिस प्रशासन के आदेश पर बुलडोजर से ढहा दिया गया था. उन्होंने आरोप लगाया था कि पुलिस ने भू-माफिया के साथ मिलकर ऐसा किया और पटना हाइ कोर्ट में याचिका दायर की थी.

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