Bihar

वीपी सिंह की तरह बड़े पद के लिए छोटा पद छोड़ें नीतीश, जगदानंद सिंह की सलाह

बिहार की नीतीश कुमार सरकार में सहयोगी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पूर्व प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह (वीपी सिंह) की राह पर चलने की सलाह दी है। इंडियन एक्सप्रेस को दिए एक इंटरव्यू में जगदानंद सिंह ने कहा कि नीतीश कुमार को बड़ा पद (प्रधानमंत्री) पाने के लिए छोटा पद (मुख्यमंत्री) छोड़ देना चाहिए, जैसा कि विश्वनाथ प्रताप सिंह ने किया था।

जगदानंद सिंह का यह बयान नीतीश के उस बयान के बाद आया है, जिसमें मुख्यमंत्री ने कहा था कि राजद नेता और उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव 2025 में महागठबंधन का नेतृत्व करेंगे।

जगदानंद सिंह ने कहा, “मैं तो बस इतना ही कहना चाहता हूं कि बड़ी चीज को प्राप्त करने के लिए छोटी चीज त्यागनी पड़ती है।” उन्होंने कहा कि याद कीजिए कि विश्वनाथ प्रताप सिंह ने पूरे विपक्ष को एकजुट करने के लिए कैसे राजीव गांधी की सरकार से इस्तीफा दे दिया था और देश भर में घूम-घूमकर पूरे विपक्ष को लामबंद किया था। फिर 1989 के चुनावों के बाद वह प्रधानमंत्री बने थे।

सिंह ने कहा कि हमें भी बीजेपी जैसी विभाजनकारी शक्ति को हराने के लिए विपक्षी नेताओं खासकर ममता बनर्जी और नवीन पटनायक जैसे लोगों को एकसाथ लाना होगा। राजद नेता ने कहा कि यह तब तक संभव नहीं है जब तक कि बड़े पद का इच्छुक व्यक्ति छोटे पद के उलझनों में फंसा रहेगा।

बता दें कि विश्वनाथ प्रताप सिंह राजीव गांधी की सरकार (1984-89) में रक्षा मंत्री थे। उन्हें जब पता चला था कि बोफोर्स तोप सौदे में घोटाला हुआ है तो उन्होंने 13 अप्रैल 1987 को रक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था और राजीव गांधी सरकार और कांग्रेस के खिलाफ देशभर में जनमत तैयार किया था। तब भारत सरकार और स्वीडन की हथियार निर्माता कंपनी एबी बोफोर्स के बीच 1,437 करोड़ रुपये का सौदा हुआ था। यह सौदा भारतीय थल सेना को 155 एमएम की 400 होवित्जर तोप की सप्लाई के लिए हुआ था। इसमें 60 करोड़ रुपये कमीशन लेने की बात सामने आई थी।

वीपी सिंह ने तब कांग्रेस और सरकार से इस्तीफा देने के बाद कई समान विचारधारा वाली पार्टियों के साथ गठबंधन किया था और कई दलों (जन मोर्चा, जनता पार्टी, लोक दल और कांग्रेस-एस) को मिलाकर जनता दल का गठन किया था। 1989 के आम चुनाव में कांग्रेस को भारी नुकसान उठाना पड़ा था। उसे सिर्फ 197 सीटों पर जीत मिली थी, जबकि वीपी सिंह की अगुवाई वाले राष्ट्रीय मोर्चा को 146 सीटें मिली थीं। उनके मोर्चे को बीजेपी ने समर्थन दिया था, जिसके पास 86 सांसद थे। 52 सांसदों वाले लेफ्ट ने भी वीपी सिंह की सरकार को समर्थन दिया था। वीपी सिंह 2 दिसंबर, 1989 को देश के आठवें प्रधानमंत्री बने थे।

Avinash Roy

Recent Posts

चिराग के सामने चाचा पस्त, पारस ने उठाई पार्टी और परिवार एक करने की बात, सीएम पर भी बोले

राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी के प्रमुख पशुपति कुमार पारस अपने भतीजे केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान…

29 मिनट ago

महंगाई और पेट्रोलियम पदार्थों की किल्लत के खिलाफ कल्याणपुर में कांग्रेस का प्रदर्शन

समस्तीपुर/कल्याणपुर : बिहार प्रदेश कांग्रेस के आह्वान पर गुरुवार को कल्याणपुर प्रखंड कांग्रेस कमेटी द्वारा…

2 घंटे ago

रेलवे परिसर में मल्टी फंक्शनल कॉम्प्लेक्स के निर्माण को लेकर समस्तीपुर DRM कार्यालय में नगर निगम के साथ रेलवे की बैठक आयोजित

समस्तीपुर : डीआरएम कार्यालय समस्तीपुर में गुरुवार को सीनियर डीसीएम अनन्या स्मृति की अध्यक्षता में…

2 घंटे ago

नीतीश कुमार के सम्मान में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी, सीएम बदलने से पहले बोले चिराग पासवान

केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने बिहार में मुख्यमंत्री बदले जाने से पहले कहा है कि…

4 घंटे ago

पेट्रोल पंपों पर उपभोक्ताओं को बेहतर सेवा देने का निर्देश, समस्तीपुर सदर SDO ने पेट्रोल पंप संचालकों के साथ की समीक्षा बैठक

समस्तीपुर : सदर एसडीओ दिलीप कुमार के नेतृत्व में गुरुवार को अनुमंडल क्षेत्र के सभी…

4 घंटे ago

बिहार में खरमास के बाद खेला? शुभ मुहुर्त में सीएम की शपथ, ओथ लेकर कुछ और दिन बने रहेंगे नीतीश!

बिहार और राज्य में सरकार चला रहे राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को खरमास के बाद…

7 घंटे ago