बिहार का नेतरहाट और टॉपर्स की फैक्ट्री कहा जाना वाला सिमुलतला आवासीय विद्यालय में दाखिले को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं. पहली बार सिमुलतला में 11वीं में नामांकन के लिए 94 सीट पर महज 93 आवेदन मिले हैं. इससे साफ जाहिर होता है कि सिमुलतला का क्रेज काफी कम हुआ है और बाहरी बच्चे यहां दाखिला करवाना नहीं चाहते हैं.
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने यहां दाखिला के लिए ऑनलाइन आवेदन की तिथि जारी की थी और कई बार तिथियों को विस्तारित भी किया गया लेकिन हैरानी की बात देखिए कि जितनी सीटें हैं उतने भी आवेदन नहीं मिले हैं.
सिमुलतला आवासीय विद्यालय के पूर्व सेंटर इंचार्ज डॉक्टर शंकर कुमार की मानें तो एक जमाना था जब यहां एडमिशन लेना छात्रों का सपना होता था और सीटों से 5 गुणा ज्यादा आवेदन आते थे लेकिन वर्तमान में यहां कई कारण हैं कि बच्चे इससे दूर होते जा रहे हैं. यहां हर साल छठी में दाखिले के लिए भी प्रवेश परीक्षा ली जाती है और कुल 120 सीटों पर नामांकन होता है लेकिन अफसोस की बात ये भी है कि यहां के छात्र मैट्रिक पास करते ही कहीं और दाखिला के लिए निकल जाते हैं और विद्यालय छोड़ देते हैं.
यानी आधे से ज्यादा छात्र मैट्रिक के बाद ग्यारहवीं से पहले सिमुलतला छोड़ देते हैं. जिसकी वजह से 11वीं में बड़ी संख्या में सीटें खाली रह जाती हैं. वर्ष 2019 के बाद यहां के मैट्रिक और इंटर के रिजल्ट में भी काफी गिरावट आई है और टॉपर्स की फैक्ट्री को समझिए कि किसी की नजरें लग गई हैं. आज भी बिहार में सिमुलतला मॉडल पर ही सरकार इतरा रही है लेकिन इसकी दुर्दशा पर किसी की नजर नहीं है.
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