बिहार संकट में अरूण जेटली को मिस कर रही भाजपा, वरना नीतीश कुमार से बन सकती थी बात

IMG 20220723 WA0098

व्हाट्सएप पर हमसे जुड़े 

बिहार की सियासत में एक बार फिर से उथल-पुथल का दौर है और कहा जा रहा है कि नीतीश कुमार भाजपा को छोड़कर आरजेडी संग सरकार बना सकते हैं। इससे पहले भी वह ऐसा कर चुके हैं, लेकिन यह साथ दो साल से भी कम चल सका था। अब एक बार फिर से नीतीश कुमार की अंतरात्मा जागी है और आज वह राज्यपाल से मुलाकात कर एनडीए छोड़ने का ऐलान कर सकते हैं।

यही नहीं लालू प्रसाद यादव के बेटे तेजस्वी यादव भी उनके साथ हो सकते हैं। दोनों नेता 160 विधायकों को साथ लेकर गवर्नर से मुलाकात करेंगे। खबर है कि इस दौरान महागठबंधन की सरकार बनाने का दावा पेश किया जा सकता है, जिसमें कांग्रेस और सीपीआई-एमएल की भी भागीदारी होगी।

भाजपा से इस बार नीतीश कुमार की नाराजगी की वजह अमित शाह के बिहार में ज्यादा दखल को माना जा रहा है। इसके अलावा भाजपा ने जिन नेताओं को डिप्टी सीएम बनाया है या फिर कैबिनेट में रखा है, वह भी नीतीश कुमार की पसंद के नहीं हैं। इसके अलावा आरसीपी सिंह को बिना सलाह के ही मोदी सरकार में मंत्री बनाए जाने से भी वह नाराज थे। ऐसे में भाजपा को दिवंगत नेता अरुण जेटली की याद जरूर आ रही होगी, जिनकी नीतीश कुमार से काफी करीबी थी। कई बार उन्होंने नीतीश कुमार की मदद की थी और दोनों के बीच पार्टी से परे काफी अच्छे संबंध थे।

IMG 20220728 WA0089

नीतीश को पहली बार CM बनाने में भी थी जेटली की भूमिका

कहा जाता है कि एक तरफ अरुण जेटली के निधन और दूसरी तरफ उनके पसंदीदा डिप्टी रहे सुशील मोदी को हटाए जाने से नीतीश कुमार के तार भाजपा से उस तरह नहीं जुड़े रह पाए, जैसे पहले थे। भाजपा और जेडीयू के बीच पहली बार 1996 में गठजोड़ हुआ था। तब जेडीयू को समता पार्टी के नाम से जाना जाता था। लेकिन दोनों दलों की दोस्ती तब मजबूत हुई, जब नवंबर 2005 में दोनों ने साथ चुनाव लड़ा और फिर अरुण जेटली ने हाईकमान को राजी कर लिया कि वह नीतीश कुमार को सीएम बनाने पर सहमत हो जाए। यही नहीं 2013 में जब नीतीश कुमार ने नरेंद्र मोदी का नाम पीएम कैंडिडेट के तौर पर घोषित होने के बाद भाजपा से नाता तोड़ा था, तब भी जेटली ने उन्हें समझाने का प्रयास किया था।

IMG 20220713 WA0033

2017 में भी जेटली ने ही कराई थी नीतीश की NDA वापसी

लेकिन वह अरुण जेटली ही थे, जिन्होंने 2017 में एक बार फिर से नीतीश कुमार को साथ लाने में अहम रोल अदा किया था। उस वक्त आरजेडी के एक नेता ने कहा था कि अरुण जेटली के साथ एक लॉन्ग ड्राइव के बाद ही नीतीश कुमार ने यह फैसला लिया था। यही नहीं नीतीश कुमार की वापसी के बाद अरुण जेटली ने ही भाजपा लीडरशिप को राजी किया था कि वह सीट बंटवारे में भी जेडीयू को भी बराबर मौका दे।

Sticker Final 01

जब नीतीश बोले- हमारे संबंध पार्टी पॉलिटिक्स से ऊपर थे

अरुण जेटली के निधन के बाद नीतीश कुमार ने उन्हें पहली जयंती पर याद करते हुए अपने निजी संबंधों की याद भी दिलाई थी। नीतीश कुमार ने कहा था, ‘हमारे रिश्ते पार्टी और पार्टी आधारित राजनीति से कहीं आगे थे। हम अकसर मिलते थे। मुलाकात के दौरान हम देश के विकास और अन्य मुद्दों पर बात करते थे। उनका बिहार के प्रति एक स्नेह था और उन्होंने हमेशा राज्य के लोगों को सम्मान दिया।’ नीतीश कुमार ने अरुण जेटली की याद में पटना में उनकी प्रतिमा भी लगवाई थी। इसके अलावा उनकी जयंती के मौके पर हर साल राजकीय कार्यक्रम का भी ऐलान किया था। साफ है कि दोनों नेताओं की बॉन्डिंग अकसर राजनीतिक रिश्ते भी सहज कर देती थी, जिसकी अब कमी खल रही है।

IMG 20211012 WA0017

IMG 20220802 WA0120

Picsart 22 07 13 18 14 31 808

JPCS3 01

IMG 20220413 WA0091

IMG 20220331 WA0074

Advertise your business with samastipur town