राजनीतिक कौशल के कारण 17 सालों से सत्ता के केंद्र में हैं नीतीश कुमार

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नीतीश कुमार की राजनीतिक रणनीति ने सबको चौंका दिया. यह उनका राजनीतिक कौशल ही है कि 17 सालों से बिहार की सत्ता के केंद्र में हैं. जीतन राम मांझी के एक साल के कार्यकाल को छोड़ दें, तो नीतीश कुमार 2005 से लगातार राज्य के मुख्यमंत्री हैं. 2015 में राजद से और 2020 के विधानसभा में भाजपा से कम सीट मिलने के बावजूद दोनों ही पार्टियों ने नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनाया.

सबने नीतीश कुमार के चेहरे पर लड़ा चुनाव

दोनों चुनाव अलग-अलग गठबंधनों ने नीतीश कुमार के चेहरे पर लड़ा था. लिहाजा, उनकी राजनैतिक नैतिकता का तकाजा था कि चुनाव बाद के परिणाम के बाद भी नीतीश कुमार को गठबंधन का नेता बनाया जाए. नीतीश कुमार नपा-तुला बोलते हैं और समय पर माकूल प्रतिक्रियाएं देते हैं. एक ही राजनीतिक धारा से आने वाले नीतीश कुमार की 1990 में लालू प्रसाद की कार्यशैली से कई बिंदुओं पर अहसमति सामने लगी थी. यह दौर 1993-94 का था. नीतीश कुमार ने लालू प्रसाद को कई खत लिखे.

1995 में लालू प्रसाद के खिलाफ खोला मोर्चा

1995 में लालू प्रसाद के खिलाफ उन्होंने मोर्चा खोल दिया. समता पार्टी बनी. उस चुनाव में नीतीश कुमार को सात सीटें मिली थीं. 1996 में समता पार्टी ने भाजपा के साथ गठबंधन कर लिया. एक ही सामाजिक धारा वाली दो पार्टियों के सतह पर आने के बाद सामाजिक न्याय की राजनीति में नयी परिस्थितियां थी. तब तक लालू प्रसाद राष्ट्रीय जनता दल बना चुके थे. उधर, नीतीश कुमार अपने सामाजिक आधारों को विस्तार देने की योजना पर काम करते रहे.

बेदाग छवि का असर

लंबे समय तक सत्ता राजनीति में रहने के बाद भी नीतीश कुमार बेदाग रहे. शायद यह छवि दूसरे राजनीतिक दलों को उन्हें अपने साथ लेने पर मजबूर भी करती रही है. दोस्त के प्रतिद्वंद्वी बनने और प्रतिद्वंद्वी के दोस्त बनने की प्रक्रिया में नीतीश कुमार समय-समय पर दोनों धाराओं की राजनीति के ‘चहेते’ रहे. बीते कई सालों की राजनीति को देखें, तो ऐसा उदाहरण नहीं मिलेगा. उनकी तारीफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी करते हैं और कांग्रेस के नेता भी. वामदल भी नीतीश कुमार को समर्थन दे रहे हैं. यही वजह है कि नीतीश की छवि के आगे उनकी पार्टी को मिलने वाली सीटों की गिनती पीछे छूट जाती है या छोड़ दी जाती है.

अब आगे क्या…

तेजस्वी यादव ने मंगलवार को कहा कि नीतीश कुमार देश भर में सबसे अनुभवी मुख्यमंत्री हैं. उनके कहने का आशय यही था कि नयी राजनीतिक जमीन पर बनने वाली सरकार में विकास और प्रगति के मानदंड बनाये जायेंगे. बिहार की आकांक्षाओं को पूरा करने की चुनौती कहीं अधिक होगी.

Avinash Roy

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