समस्तीपुर :- आम को गर्मियों का राजा कहा जाता है। फिलहाल मंजरी व मटर दाना की अवस्था है। मार्च-अप्रैल के महीने में फलों का गिरना एक आम समस्या है। इस समस्या के प्रबंधन के लिए जब फल मटर के दाने के आकार के होते हैं, तब प्लानोफिक्स 2 मिली प्रति 10 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। यह महीना फलों के वृद्धि के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इसलिए जब फल मटर दाने के आकर को प्राप्त करे तो बगीचे के सिचाई 10 से 15 दिन के अंतराल पर अवश्य करें।
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों का बताना हैं कि आम में दहिया कीट का प्रकोप होता है। इस कीट के शिशु और मादा पौधे को नुकसान पहुंचाती हैं। ये दोनों आम के पौधे से कोशिका रस चूस लेते हैं, जिसके कारण मुलायम तने और मंजरियां सूख जाती हैं तथा अधपके फल गिर जाते हैं। पौधे पर काले रंग के फफूंद भी विकसित हो जाते हैं, इसके कारण प्रकाश संश्लेषण की क्रिया बाधित होती है।
इसके प्रबंधन के लिए पेड़ के आसपास की मिट्टी की निकाई-गुड़ाई करने से इस कीट के अंडे नष्ट हो जाते हैं। पौधे के मुख्य तने की जमीन के पास वाले भाग पर 30 सेंटीमीटर चौड़ी अल्काथीन या प्लास्टिक की एक पट्टी लपेट देने से कीट के शिशु पेड़ पर नहीं चढ़ पाते हैं। मार्च-अप्रैल में आम में निकल रहे पत्तों एवं टिकोलों पर थ्रिप्स कीट के आक्रमण को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाएं।
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