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शिक्षा विभाग में 34 करोड़ की गड़बड़ी, बिहार के सभी DEO को 7 दिनों में देना होगा जवाब; HRMS पोर्टल पर छेड़छाड़ कर अधिक राशि निकालने का मामला

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बिहार के शिक्षा विभाग में वेतन भुगतान से जुड़ी अनियमितता को लेकर सभी जिलों के जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEO) से जवाब मांगा गया है. विभाग की ओर से जारी पत्र में HRMS पोर्टल पर छेड़छाड़ कर वेतन, मकान किराया भत्ता (HRA) और एरियर के मद में अधिक राशि निकालने का मामला उठाया गया है. 4 नवंबर 2026 की समेकित विभागीय रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के सभी 38 जिलों में कुल 6895 मामलों में 34 करोड़ 11 लाख 56 हजार 604 रुपये की अधिक निकासी सामने आई है. शिक्षा विभाग के निदेशक विजय कुमार पांडेय ने 5 नवंबर को सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को पत्र भेजकर इस मामले में स्पष्टीकरण मांगा है.

मेकर, चेकर और अप्रूवर की मिली-भगत का आरोप

HRMS पोर्टल पर मेकर, चेकर और अप्रूवर की मिलीभगत से छेड़छाड़ और कूट रचना कर अधिक राशि निकाली गई. यह गड़बड़ी वेतन, मकान किराया भत्ता और एरियर के भुगतान में की गई. पत्र में इसे वित्तीय नियमों का उल्लंघन बताया गया है. इसमें बिहार कोषागार संहिता, 2011 के नियम 155, 157 और 159 के साथ वित्त विभाग और सामान्य प्रशासन विभाग के पहले जारी निर्देशों का भी हवाला दिया गया है.

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जिला शिक्षा पदाधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल

पत्र में कहा गया है कि वेतन और भत्तों की देयता की जांच और भुगतान की जिम्मेदारी संबंधित निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी (DDO) के साथ अप्रूवर की होती है. जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) को भी इस पूरी व्यवस्था की निगरानी करनी है. विभाग ने सवाल उठाया है कि जिला स्तर पर मेकर, चेकर और अप्रूवर के जरिए इस तरह की निकासी होती रही और उसकी समय पर निगरानी क्यों नहीं की गई. पत्र में इसे प्रशासनिक नियंत्रण और निगरानी में गंभीर चूक बताया गया है.

सात दिनों में सबूत के साथ देना होगा जवाब

शिक्षा विभाग ने जिला शिक्षा पदाधिकारियों को सात दिनों के भीतर अपना स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है. जवाब के साथ संबंधित साक्ष्य और दस्तावेज भी जमा करने होंगे. पत्र में चेतावनी दी गई है कि तय समय में जवाब नहीं मिलने पर यह माना जाएगा कि संबंधित अधिकारी को इस मामले में कुछ नहीं कहना है. ऐसी स्थिति में उपलब्ध साक्ष्यों और रिकॉर्ड के आधार पर एकतरफा फैसला लिया जा सकता है.

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अनुशासनात्मक कार्रवाई की भी चेतावनी

विभाग ने जिला शिक्षा पदाधिकारियों से पूछा है कि वित्तीय अनियमितता और प्रशासनिक लापरवाही के लिए उनके खिलाफ बिहार सरकारी सेवक नियमावली, 2005 के प्रावधानों के तहत कार्रवाई क्यों नहीं शुरू की जाए. विभाग ने इस मामले को गंभीर मानते हुए अधिकारियों से अपना पक्ष और उससे जुड़े सबूत तय समय में देने को कहा है.

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