गंगा-बाया के उफान से विद्यापतिनगर के पंद्रह हजार आबादी पर गहराया संकट, मुख्यालय से सड़क संपर्क टूटा

समस्तीपुर/विद्यापतिनगर [पद्माकर सिंह लाला ] : गंगा व बाया नदियों के जल स्तर में लगातार अप्रत्याशित बढ़ोत्तरी ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के हजारों लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी है। विद्यापतिनगर प्रखंड के दियारांचल इलाके के चार पंचायतों के 12 वार्डों की करीब 15 हजार से अधिक आबादी बाढ़ के पानी से पूरी तरह घिर गई है। कई इलाकों में सड़क पर दो से पांच फीट तक पानी चढ़ जाने से प्रखंड मुख्यालय व बाजार से सीधा सड़क संपर्क टूट गया है। घरों में तथा उसके आसपास पानी फैलने के बाद लोग सुरक्षित ठिकाने की तलाश में जुट गए हैं। वहीं निचले हिस्सों में रहने वाले परिवार जरूरी सामान समेटकर ऊंचे स्थानों की ओर पलायन करने लगे हैं।
उधर दियारा क्षेत्र में लगी सैकड़ों एकड़ खरीफ व सब्जियों की फसलें पानी में डूब गई हैं। खेतों में कई दिनों से पानी जमा रहने के कारण फसल को भारी नुकसान की आशंका है। दूसरी ओर, इन बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लोगों की सबसे बड़ी चुनौती मवेशियों के ठहरने वाले स्थानों में पानी भर जाने से बनी हुई है। पशुपालकों की परेशानी का सबसे बड़ा सबब यह है कि किसान मवेशियों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के साथ उनके लिए चारे की व्यवस्था में जुटे हैं।


तीन वार्ड आंशिक, नौ पूर्ण प्रभावित
गंगा – बाया नदियों के जलस्तर बढ़ने से प्रखंड के चार पंचायतों के कुल 12 वार्ड प्रभावित हैं। इनमें तीन वार्ड आंशिक और नौ वार्ड पूर्ण रूप से बाढ़ की चपेट में हैं। शेरपुर ढेपुरा पंचायत के वार्ड संख्या – 13, 14 और 15 तथा बाजिदपुर पंचायत का वार्ड संख्या – 11 पूर्ण रूप से प्रभावित है। बाजिदपुर पंचायत के वार्ड संख्या – 12, 13 और 14 में बाढ़ का पानी पूरी तरह फैल चुका है। मऊ धनेशपुर दक्षिण पंचायत के वार्ड संख्या – 10 में आंशिक और वार्ड संख्या – 13 में पूर्ण रूप से बाढ़ का असर है। वहीं बालकृष्णपुर मड़वा पंचायत के वार्ड संख्या – 8 और 11 आंशिक तथा वार्ड 13 पूर्ण रूप से प्रभावित है।

मवेशियों के साथ विद्यालयों व बांधों पर ले रहे शरण
बाढ़ के पानी से घरों के आसपास जलप्लावित होने के बाद कई पशुपालक अपने मवेशियों को लेकर नजदीकी विद्यालयों, चिंगिया बांध एवं ऊंचे स्थानों पर पहुंच शरण ले रहे हैं। पशुपालकों के सामने अब सबसे बड़ी चिंता मवेशियों के लिए चारा जुटाने की है। पानी से घिरे खेतों से हरा चारा लाना काफी मुश्किल हो गया है। पशुचारा और पीने के पानी की व्यवस्था को लेकर प्रभावित परिवार परेशान हैं। बाढ़ प्रभावित लोगों के सामने रहने, भोजन, पेयजल, पशुचारा और आवागमन की समस्या एक साथ खड़ी हो गई है। बाजार व प्रखंड मुख्यालय से संपर्क टूटने के कारण दैनिक उपयोग की वस्तुएं जुटाने में भी लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

नाव ही सहारा, पर्याप्त संख्या नहीं होने की शिकायत
सड़क संपर्क टूटने के बाद प्रभावित गांवों के लोगों के लिए नाव ही आवागमन का प्रमुख साधन रह गई है। अंचल प्रशासन की ओर से पंजीकृत 24 नावों का परिचालन कराया जा रहा है। इसके बावजूद बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों का कहना है कि प्रभावित आबादी और बाढ़ के फैलाव को देखते हुए नावों की संख्या पर्याप्त नहीं है। जरूरी काम के लिए लोगों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। कुछ स्थानों पर लोग केले के थंब और अन्य स्थानीय साधनों के सहारे भी आवागमन करने को मजबूर हैं।
राहत कार्य तेज, 1550 परिवारों को पॉलीथिन शीट
प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य शुरू कर दिया है। शेरपुर ढेपुरा में पशुचारा वितरण शुरू कराया गया है। प्रभावित 1550 परिवारों के बीच पॉलीथिन शीट का वितरण किया गया है। पेयजल की समस्या को देखते हुए पानी के टैंकर की व्यवस्था की गई है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मेडिकल सुविधा भी शुरू कराई गई है। मऊ धनेशपुर दक्षिण पंचायत के अखाड़ा घाट और बालकृष्णपुर मड़वा बांध पर भी निगरानी रखी जा रही है। चिंगिया बांध पर प्रकाश की व्यवस्था कराई गई है। वहीं शेरपुर विषहरी स्थान से कष्टहारा चौक तक बड़ी गाड़ियों के आवागमन को बंद करा दिया गया है।

जलस्तर पर लगातार नजर
अंचलाधिकारी कुमार हर्ष ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण कर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने प्रभावित परिवारों से बातचीत कर उनकी समस्याओं की जानकारी ली और राहत कार्यों की स्थिति देखी। प्रशासन की ओर से नदी के जलस्तर तथा संवेदनशील स्थानों पर लगातार नजर रखी जा रही है। जलस्तर में और वृद्धि होने की स्थिति में प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी भी की जा रही है।

