जूट हस्तशिल्प से महिलाओं को मिलेगा रोजगार, 90 दीदियां लेंगी प्रशिक्षण; जूट से बैग, टोकरियां, मैट व सजावटी सामान बनाने का दिया जाएगा प्रशिक्षण

समस्तीपुर : स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को हुनरमंद बनाकर आत्मनिर्भर बनाने की पहल शुरू की गई है। स्वयं सहायता समूह भवन, परतापुर में नाबार्ड द्वारा प्रायोजित आजीविका एवं उद्यम विकास कार्यक्रम (एलईडीपी) के तहत अनमोल उपहार सेवा फाउंडेशन के तत्वावधान में 20 दिवसीय जूट रेशे से हस्तशिल्प निर्माण प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन बिहार विधान परिषद सदस्य सह मानवाधिकार समिति के अध्यक्ष डॉ. तरुण कुमार ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
इस दौरान एमएलसी ने कहा कि जूट के रेशे से बने गुलदस्ता, बैग, टोकरियां, मैट और सजावटी सामान की बाजार में काफी मांग है। महिलाओं को इस तरह के हुनर से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि एक महिला के हुनरमंद होकर कमाने से परिवार के साथ समाज और देश भी आगे बढ़ता है। जूट का यह हुनर महिलाओं की तरक्की की डोर बनेगा और आज सीखा गया कौशल कल बड़े व्यवसाय का आधार बन सकता है।


डीडीएम नाबार्ड अभिनव कृष्ण ने प्रशिक्षण की रूपरेखा की जानकारी देते हुए कहा कि प्रशिक्षण के बाद महिलाओं द्वारा तैयार जूट उत्पादों को नाबार्ड के राष्ट्रीय स्तर के मेलों में भी विपणन का अवसर दिया जाएगा। जीविका के डीपीएम विक्रांत शंकर सिंह ने महिलाओं को हुनर अपनाकर स्वावलंबी बनने के लिए प्रेरित किया। एलडीएम कार्यालय के प्रबंधक उदय शंकर मल ने बैंकिंग योजनाओं की जानकारी देते हुए कहा कि बेहतर कार्य करने वाले समूहों को बैंक की ओर से आर्थिक सहयोग दिया जाएगा।

संस्था के सचिव ललित कुमार ने बताया कि 90 महिलाओं को तीन बैच में प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के बाद तैयार उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने और महिलाओं को सतत आजीविका से जोड़ने में संस्था हरसंभव सहयोग करेगी। कार्यक्रम का संचालन ललित कुमार ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन परियोजना निदेशक प्रेरणा कुमारी ने किया। मौके पर प्रशिक्षक धर्मेंद्र राम, शिवनाथ महतो, मो. शमीम, वंदना कुमारी, मिंटू कुमारी सहित बड़ी संख्या में स्वयं सहायता समूह की महिलाएं मौजूद थीं।




