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विद्यापतिनगर में गंगा-बाया की बाढ़ से दियारा में जिंदगी बेपटरी; खेत डूबे, मवेशियों संग सड़क किनारे पशुपालकों ने डाला डेरा

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समस्तीपुर/विद्यापतिनगर [पद्माकर सिंह लाला] : गंगा और बाया नदी के बढ़ते जलस्तर ने प्रखंड के दियारा क्षेत्र में हजारों लोगों की जिंदगी बेपटरी कर दी है। खेतों में बाढ़ का पानी घुसने से जहां हरी मिर्च, सब्जी और अन्य नकदी फसलें जलमग्न हो गई हैं। वहीं पशुचारा डूब जाने से पशुपालकों के सामने मवेशियों को बचाने और उनके चारे की व्यवस्था सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। हालात ऐसे हैं कि कई परिवार घर छोड़कर मवेशियों के साथ सड़क किनारे और ऊंचे स्थानों पर अस्थायी डेरा डालने को मजबूर हैं। बढ़ते पानी का असर शेरपुर ढेपुरा, मऊ धनेशपुर दक्षिण, बालकृष्णपुर मड़वा और बाजिदपुर पंचायत के दियारा इलाकों में सबसे अधिक दिखाई दे रहा है। गंगा के जलस्तर में वृद्धि के कारण निचले खेतों में पानी फैल गया है और कई गांवों का सड़क संपर्क भी प्रभावित हो चुका है। प्रशासन जलस्तर पर नजर बनाए हुए है, लेकिन ग्रामीणों की चिंता लगातार बढ़ रही है।

महीनों की मेहनत पानी में, किसान बोले- अब कैसे होगी अगली खेती :

बताते हैं कि दियारा क्षेत्र के किसानों ने इस बार बड़े पैमाने पर हरी मिर्च, लौकी, नेनुआ, भिंडी समेत कई सब्जियों की खेती की थी। फसल तैयार होने ही वाली थी कि बाढ़ का पानी खेतों में पहुंच गया। देखते ही देखते सैकड़ों बीघा फसल डूब गई। किसानों का कहना है कि फसल के साथ बीज, खाद, सिंचाई, मजदूरी और खेती में लगाया गया पूरा खर्च भी पानी में बह गया। अब अगली फसल की तैयारी के लिए पूंजी जुटाना भी मुश्किल हो गया है।

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चारा खत्म हुआ तो मवेशियों के साथ घर छोड़ना पड़ा :

खेतों और चरागाहों में पानी भरने के बाद पशुपालकों के सामने सबसे बड़ा संकट चारे का खड़ा हो गया है। जिन खेतों में पशुओं के लिए हरा चारा तैयार था, वे भी पानी में डूब चुके हैं। ऐसे में लोग मवेशियों को लेकर सुरक्षित और ऊंचे स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं। साहिट पंचायत में भारतीय स्टेट बैंक के समीप पिछले दो दिनों से दर्जनों पशुपालक मवेशियों के साथ डेरा डाले हुए हैं। पशुपालक परिवार खुले आसमान के नीचे तिरपाल लगाकर रह रहे हैं। दिनभर चारे की तलाश में भटकना पड़ रहा है, जबकि रात में अंधेरा और मच्छरों का प्रकोप परेशानी और बढ़ा देता है। इसी तरह 10 नंबर ढाला के समीप भी बड़ी संख्या में पशुपालक सड़क किनारे अस्थायी झोपड़ी बनाकर मवेशियों की रखवाली कर रहे हैं। उनका कहना है कि पशुओं को छोड़कर घर जाना संभव नहीं है, इसलिए पूरा परिवार वहीं रह रहा है।

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बाढ़ पीड़ितों की बढ़ीं मुश्किलें, बुनियादी सुविधाओं का अभाव :

बाढ़ का पानी बढ़ने के साथ प्रभावित परिवारों के सामने सिर्फ रहने की ही नहीं, बल्कि पीने के पानी, शौचालय और दवा जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी संकट गहराने लगा है। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ रही है। पशुपालकों का कहना है कि अब तक अस्थायी शिविरों पर न तो पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था हुई है और न ही पशु चारे की।

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राहत की मांग, जलस्तर पर बनी हुई है नजर :

ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल पशु चारा, पीने का स्वच्छ पानी, सोलर लाइट, तिरपाल और अन्य राहत सामग्री उपलब्ध कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि फिलहाल जलस्तर बढ़ने की रफ्तार कुछ धीमी जरूर हुई है, लेकिन दियारा के निचले इलाकों में पानी लगातार फैला हुआ है। यदि गंगा में फिर जलवृद्धि हुई तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। अंचलाधिकारी कुमार हर्ष ने बताया कि प्रशासन भी जलस्तर की निगरानी के साथ संभावित बाढ़ प्रभावित इलाकों की बुनियादी समस्याओं पर नजर बनाए हुए है।

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