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समस्तीपुर सदर अस्पताल में 4 बेड का ICU तैयार, इसी हफ्ते होगा शुभारंभ; विशेषज्ञ डॉक्टर, जीएनम व नर्सिंग स्टाफ की हुई प्रतिनियुक्ति

अस्पताल प्रबंधन ने राउंड द क्लाॅक बनाया रोस्टर, 24 घंटे तैनात रहेंगे डॉक्टर व कर्मी

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समस्तीपुर : जिले के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए एक बड़ी और ऐतिहासिक उपलब्धि सामने आई है। वर्षों से जिस सुविधा का इंतजार जिले के लोग कर रहे थे, वह अब पूरी होने जा रही है। सदर अस्पताल में अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस चार बेड की आईसीयू बनकर पूरी तरह तैयार हो गई है। इसी सप्ताह बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी व स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार के हाथों इसका उद्घाटन वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए पटना से किया जाएगा।

उद्घाटन से पहले अस्पताल प्रशासन ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं और आईसीयू के सफल संचालन के लिए डॉक्टरों, नोडल पदाधिकारी, जीएनएम एवं नर्सिंग स्टाफ की राउंड द क्लाॅक 24 घंटे की ड्यूटी निर्धारित कर दी गई है। आईसीयू शुरू होने के साथ ही जिले के गंभीर मरीजों को अब बेहतर इलाज के लिए पटना, दरभंगा या अन्य निजी अस्पतालों का रुख नहीं करना पड़ेगा। इससे न केवल मरीजों को समय पर इलाज मिलेगा, बल्कि आर्थिक रूप से भी उन्हें बड़ी राहत मिलेगी।

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डॉ. सत्येंद्र कुमार बनाये गये नोडल पदाधिकारी :

अस्पताल प्रशासन ने आईसीयू संचालन के लिए डॉ. सत्येंद्र कुमार को आईसीयू का नोडल पदाधिकारी बनाया है, जो प्रतिदिन इसकी निगरानी करेंगे और संचालन व्यवस्था पर नजर रखेंगे। वहीं, तीन शिफ्टों में राउंड द क्लाॅक आठ-आठ घंटे के लिए पांच डॉक्टरों की तैनाती की गई है। इनमें डॉ. राजेश कुमार, डॉ. राजीव रंजन झा, डॉ. राम प्रवेश मंडल, डॉ. राकेश रौशन चौधरी और डॉ. वसीम अहमद शामिल हैं। इसके अलावा जीएनएम एवं नर्सिंग स्टाफ की भी राउंड द क्लाॅक अलग-अलग शिफ्टों में चौबीसों घंटे ड्यूटी लगाई गई है, ताकि किसी भी गंभीर मरीज को तत्काल उपचार मिल सके।

बता दें कि अब तक सदर अस्पताल में आईसीयू की सुविधा नहीं होने के कारण हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक, गंभीर सड़क दुर्घटना, सांस संबंधी गंभीर बीमारी, जहर खाने, मल्टी ऑर्गन फेलियर तथा अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद डीएमसीएच, पीएमसीएच या निजी अस्पतालों में रेफर कर दिया जाता था। रेफर होने के दौरान कई मरीजों की स्थिति और गंभीर हो जाती थी। कई बार समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण मरीजों की जान भी चली जाती थी। गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को निजी अस्पतालों में इलाज कराने के लिए लाखों रुपये खर्च करने पड़ते थे। लेकिन अब आईसीयू शुरू होने के बाद ऐसे मरीजों को जिले में ही बेहतर उपचार मिल सकेगा।

अस्पताल प्रशासन ने आईसीयू में भर्ती होने वाले मरीजों के लिए आवश्यक एवं जीवन रक्षक दवाओं का पर्याप्त भंडारण किया है। यदि किसी मरीज को विशेष दवा की आवश्यकता पड़ती है, तो उसे आयुष्मान भारत योजना के तहत उपलब्ध कराया जाएगा। इससे गरीब और जरूरतमंद मरीजों को आर्थिक सहायता मिलेगी और इलाज का बोझ काफी कम होगा।

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सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. गिरीश कुमार ने बताया कि चार बेड का आईसीयू पूरी तरह से अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरणों से सुसज्जित है। इसमें वेंटिलेटर, मल्टी-पैरा मॉनिटर, सेंट्रल ऑक्सीजन पाइपलाइन, सक्शन मशीन, इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम समेत सभी आवश्यक उपकरण स्थापित कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि संचालन के लिए डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की ड्यूटी भी लगा दी गई है। अब केवल फीता कटने का इंतजार है। हालांकि यदि उद्घाटन से पहले भी कोई गंभीर मरीज आता है तो उसका इलाज तत्काल शुरू किया जा सकता है।

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रेफरल मामलों में आएगी कमी :

अब तक सदर अस्पताल से गंभीर मरीजों को बाहर रेफर करना पड़ता था। नई सुविधा शुरू होने के बाद अधिकांश गंभीर मरीजों का इलाज सदर अस्पताल में ही संभव हो सकेगा। इससे मरीजों को समय पर उपचार मिलेगा और उनकी जान बचाने में मदद मिलेगी। साथ ही रेफरल मामलों में भी उल्लेखनीय कमी आएगी। गौरतलब है कि वर्ष 2011 में तत्कालीन डीएम कुंदन कुमार ने सदर अस्पताल में आईसीयू शुरू करने की पहल की थी। उस समय लाखों रुपये की लागत से वेंटिलेटर समेत कई आवश्यक उपकरण खरीदे गए थे। लेकिन उनके तबादले के बाद पूरी योजना ठंडे बस्ते में चली गई थी और खरीदे गए उपकरण वर्षों तक स्टोर में धूल फांकते रहे थे।

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बयान :

सदर अस्पताल में चार बेड का अत्याधुनिक आईसीयू सेवा इसी हफ्ते से शुरू होगा। इसके शुरू होने से गंभीर मरीजों को काफी राहत मिलेगी। हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक और गंभीर दुर्घटना के मरीजों को इलाज के लिए बाहर रेफर करने की जरूरत कम पड़ेगी। समय पर उपचार मिलने से मरीजों की जान बचाने में मदद मिलेगी और जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था भी मजबूत होगी।

डॉ. राजीव कुमार, सिविल सर्जन, समस्तीपुर

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