समस्तीपुर : दावों के बीच कटौती व लो वोल्टेज से उपभोक्ता परेशान, बार-बार ट्रिपिंग की समस्या से जूझ रहे उपभोक्ता

समस्तीपुर : बिजली व्यवस्था को लेकर सरकार और बिजली कंपनी लगातार 24 घंटे निर्बाध आपूर्ति का दावा कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर जिले की स्थिति इन दावों से काफी अलग दिखाई देती है। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक उपभोक्ता अघोषित कटौती, बार-बार ट्रिपिंग, लो वोल्टेज और जर्जर बिजली नेटवर्क की समस्या से जूझ रहे हैं। इसका सीधा असर खेती, कारोबार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है। जिले के शहरी क्षेत्रों में कागज पर लगभग 22 से 24 घंटे बिजली आपूर्ति का रोस्टर तय है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में 18 से 20 घंटे बिजली देने का दावा किया जाता है।
हालांकि उपभोक्ताओं का कहना है कि वास्तविक आपूर्ति इससे कम है और कई इलाकों में प्रतिदिन कई घंटे अघोषित कटौती की जा रही है। खासकर शाम और रात के समय बिजली बाधित होने से लोगों की परेशानी बढ़ जाती है। शहर के ताजपुर रोड, काशीपुर, मोहनपुर, कोरबद्दा, मगरदही, स्टेशन रोड, गोला रोड समेत कई मुहल्लों में उपभोक्ता बार-बार ट्रिपिंग और लो वोल्टेज की शिकायत कर रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में शाम के समय वोल्टेज इतना कम हो जाता है कि पंखे, मोटर और अन्य विद्युत उपकरण सही तरीके से काम नहीं कर पाते। कई लोगों के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी खराब हो चुके हैं। शहर के कई हिस्सों में जर्जर पोल व ढीले जंपर से बिजली आपूर्ति में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई हैं। हल्की बारिश और तेज हवा के दौरान फॉल्ट बढ़ जाते हैं, जिससे घंटों बिजली बाधित रहती है। फॉल्ट ठीक होने में कई बार आधा दिन या पूरा दिन लग जाता है।

ओवरलोड और बढ़ती मांग से बार-बार ट्रिपिंग की समस्या :
जिले में लगातार नए बिजली कनेक्शन दिए जाने और गर्मी के दौरान बढ़ती खपत के कारण कई ट्रांसफार्मर अपनी क्षमता से अधिक लोड झेल रहे हैं। कई गांवों में कम क्षमता वाले ट्रांसफार्मर के कारण बार-बार जलने की घटनाएं सामने आती रहती हैं। उपभोक्ताओं का आरोप है कि खराब ट्रांसफार्मर बदलने में लंबा समय लग जाता है, जिससे लोगों को भीषण गर्मी में परेशानी उठानी पड़ती है। जिले के कई 33/11 केवी सब-स्टेशन बढ़ती मांग के अनुरूप क्षमता विस्तार का इंतजार कर रहे हैं। मांग बढ़ने के साथ कई फीडरों पर दबाव बढ़ गया है, जिसके कारण ओवरलोडिंग और ट्रिपिंग की समस्या बढ़ रही है।



