हर रोज 4 क्विंटल पॉलीथिन कचरा उगल रहा समस्तीपुर शहर, प्रतिबंध के बावजूद धड़ल्ले से हो रहा इस्तेमाल

समस्तीपुर : सिंगल यूज पॉलीथिन पर प्रतिबंध लागू हुए छह वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद समस्तीपुर में इसका उपयोग थमने का नाम नहीं ले रहा है। शहर में प्रतिदिन करीब चार क्विंटल पॉलीथिन कचरा जमा हो रहा है, जिससे नालियां जाम हो रही हैं और जलजमाव की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। सड़क किनारे जगह-जगह पॉलीथिन और प्लास्टिक कचरे का अंबार लगा है, जिससे शहर की स्वच्छता व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।
नगर निगम के अनुसार शहर की करीब 80 प्रतिशत दुकानों और अधिकांश ग्रामीण बाजारों में आज भी ग्राहकों को पॉलीथिन में सामान दिया जा रहा है। कपड़े या जूट के थैले का इस्तेमाल करने वाले लोगों की संख्या महज 17 से 18 प्रतिशत के बीच है। ऐसे में प्रतिबंध के बावजूद पॉलीथिन का उपयोग खुलेआम जारी है। सिंगल यूज पॉलीथिन पर प्रतिबंध लागू होने के बाद नगर निगम ने जागरूकता अभियान चलाया था। अब तक दर्जनों बार जांच व छापेमारी अभियान चलाया जा चुका है।

नगर निगम के आंकड़ों के मुताबिक दो हजार से अधिक दुकानों की जांच की गई, जिसमें पॉलीथिन जब्त कर जुर्माने की राशि भी वसूला गया। नगर निगम की मेयर अनीता राम बताया कि सिंगल यूज पॉलीथिन पर रोक लगाने के लिए समय-समय पर जांच अभियान चलाया जाता है। उन्होंने कहा कि केवल कार्रवाई से नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं और दुकानदारों की आदत बदलने से ही प्रतिबंध पूरी तरह सफल हो सकेगा।

इस संबंध में पर्यावरणविद राजेश कुमार सुमन, जितेंद्र सिंह आदि का कहना है कि पॉलीथिन का बढ़ता उपयोग पर्यावरण और स्वास्थ्य दोनों के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। इससे नालियां जाम होती हैं, जलनिकासी प्रभावित होती है, पशु पॉलीथिन निगलकर बीमार पड़ते हैं और प्लास्टिक जलाने से निकलने वाला जहरीला धुआं वायु प्रदूषण के साथ कई गंभीर बीमारियों का कारण बनता है। नगर निगम ने लोगों से कपड़े या जूट के थैले का उपयोग करने, कागज के बैग को प्राथमिकता देने, सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल बंद करने और खरीदारी के समय अपना थैला साथ रखने की अपील की है।

पॉलीथिन से प्रदूषित हो रही नदियां व तालाब :
धड़ल्ले से पॉलीथिन के प्रयोग की वजह से तालाब और नदियां भी प्रदूषित हो रही हैं। शहर की कई बड़ी नालियां पॉलीथिन की वजह से जाम पड़ी हैं। तालाबों में भी उड़कर पहुंच रहा पॉलीथिन पानी को प्रदूषित कर रहा है।
पॉलीथिन का दुष्प्रभाव :
- पॉलिथीन बैग्स करीब 500 या 600 सालों में गलते हैं।
- नाले जाम हो जाते हैं, जानवरों को कई तरह की बीमारियां हो जाती हैं।
- गाय के दूध उत्पादन पर बुरा असर पड़ता है, भू-जल स्तर पर भी बुरा प्रभाव
- जलाने पर जहरीले गैस का निकलना सहित पर्यावरण पर कई तरह से प्रतिकूल असर डालता है।
- प्लास्टिक और पॉलीथिन कचरों की वजह से जमीन बंजर हो रही है।


