नौकरी के नाम पर बंधक मामला : बेरोजगार युवाओं के पैसों से खड़ा किया करोड़ों का साम्राज्य, शहर में कई जगहों पर ली प्रोपर्टी

समस्तीपुर : नौकरी दिलाने का झांसा देकर सैकड़ों युवक-युवतियों से लाखों-करोड़ों रुपये वसूलने वाले चेन मार्केटिंग गिरोह के संचालकों की जीवनशैली अब जांच के दायरे में आ गई है। एक ओर बेरोजगारी से जूझ रहे युवक-युवतियां नौकरी की उम्मीद में अपनी जमा-पूंजी और परिजनों से उधार लेकर 25-25 हजार रुपये जमा कर रहे थे, वहीं दूसरी ओर गिरोह से जुड़े लोग लग्जरी लाइफ जीते हुए महंगी गाड़ियों में घूम रहे थे और आलीशान जीवन का प्रदर्शन कर रहे थे।
रेस्क्यू कराए गए कई पीड़ितों ने पुलिस को बताया है कि गिरोह के संचालक और उनके करीबी सहयोगी हमेशा महंगे वाहनों से आते-जाते थे। उनके रहन-सहन, पहनावे और खर्च करने के तरीके को देखकर युवाओं को विश्वास दिलाया जाता था कि कंपनी से जुड़ने के बाद वे भी जल्द ही ऐसी ही जिंदगी जी सकेंगे। इसी लालच और भरोसे के सहारे लगातार नए लोगों को नेटवर्क में जोड़ा जाता था। जांच में सामने आया है कि युवाओं से ट्रेनिंग किट, रजिस्ट्रेशन, रहने-खाने और अन्य शुल्क के नाम पर 25 हजार रुपये की रकम वसूली जाती थी।

एक बैच में 400 के करीब बच्चे होते थे। 25 हजार प्रति लड़के-लड़कियों से 400 लोगों का हिसाब हो तो एक करोड़ रुपये होते है। हालांकि इस गिरोह में फंसकर हजारों लड़के-लड़कियों को शहर के अलग-अलग मकानों में रखा गया था। मामले के उद्भेदन के बाद सभी को दरभंगा सेंटर पर भेज देने की चर्चा है। आरोप है कि इन्हीं पैसों के दम पर गिरोह के संचालकों ने अपने लिए आलीशान जीवनशैली तैयार कर ली थी। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि गिरोह से जुड़े कुछ प्रमुख लोगों के पास महंगी गाड़ियां, कई संपत्तियां और बड़े निवेश हैं।

बताया गया है कि वीजन ट्रेडिंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड (गेलवे) के संचालक सदस्यों में शामिल पप्पू खान और गुड्डू समेत गिरोह के कुछ प्रमुख सदस्यों ने समस्तीपुर शहर और आसपास के इलाकों में महंगी प्रॉपर्टी खरीद रखी है। हालांकि पुलिस अभी इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं कर रही है, लेकिन आर्थिक पहलुओं की जांच के दौरान उनकी चल-अचल संपत्तियों और बैंक खातों का ब्योरा खंगाला जा रहा है। पुलिस को आशंका है कि यह नेटवर्क केवल 105 लोगों तक सीमित नहीं था। जांच में 400 से 500 युवक-युवतियों के इस जाल में फंसने की बात सामने आ रही है। फिलहाल प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस गिरोह के फरार सरगनाओं और अन्य सदस्यों की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है। वहीं युवाओं के पैसों से खड़ी की गई कथित संपत्तियों और लग्जरी जीवनशैली की भी जांच शुरू कर दी गई है।

पुलिस के सामने बड़ी चुनौती :
एफआईआर दर्ज होने के बाद अब पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती फरार सरगनाओं तक पहुंचना, आर्थिक नेटवर्क का खुलासा करना और यह पता लगाना है कि इस गिरोह का संबंध अन्य राज्यों में सक्रिय ऐसे ही नेटवर्क से है या नहीं। पुलिस का दावा है कि मामले के हर पहलू की जांच की जा रही है और फरार चल रहे अन्य दोषियों को भी जल्द गिरफ्तार किया जाएगा। इधर बेरोजगारी का फायदा उठाकर युवाओं के सपनों का सौदा करने वाले इस नेटवर्क की सच्चाई सामने आने के बाद अब लोग इसकी तुलना बड़े स्तर के रोजगार ठगी रैकेट से कर रहे हैं। दूसरी ओर रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान मिले दस्तावेज, मोबाइल फोन, रजिस्टर, बैंकिंग लेन-देन और पीड़ितों के बयान के आधार पर पूरे नेटवर्क की परतें खोली जा रही हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह केवल ठगी का मामला नहीं, बल्कि बेरोजगार युवाओं के सुनियोजित आर्थिक शोषण और उन्हें नियंत्रित कर रखने का संगठित नेटवर्क था।




