उपेक्षा की ‘ICU’ में देशी चिकित्सा पद्धति, संसाधनों की कमी से जूझ रहा समस्तीपुर जिला संयुक्त औषधालय, एक भी कंपाउंडर नहीं

समस्तीपुर : आधुनिक चिकित्सा की चमक और अंग्रेजी दवाओं के बढ़ते प्रभाव के बीच समस्तीपुर में प्राचीन देशी चिकित्सा पद्धतियां आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी आज प्रशासनिक उपेक्षा की आईसीयू में जिंदगी और अस्तित्व की जंग लड़ रही हैं। विडंबना यह है कि जिन चिकित्सा पद्धतियों की उपयोगिता को पूरी दुनिया स्वीकार कर रही है, वही समस्तीपुर में बदहाली का शिकार होकर धीरे-धीरे हाशिये पर पहुंचती जा रही हैं। शहर के थानेश्वर स्थान मंदिर के समीप स्थित जिला संयुक्त औषधालय पिछले 44 वर्षों से एक जर्जर भवन में किसी तरह अपनी सेवाएं दे रहा है। यह भवन न केवल अपनी पुरानी संरचना की कहानी कहता है, बल्कि सरकारी उदासीनता का भी मूक गवाह बना हुआ है।
उपेक्षा की ‘ICU’ में देशी चिकित्सा पद्धति, संसाधनों की कमी से जूझ रहा जिला संयुक्त औषधालय
समस्तीपुर जिला संयुक्त औषधालय में एक भी कंपाउंडर नहीं
मरीजों की संख्या में नहीं हो रही वृद्धि
प्रचार-प्रसार के अभाव में सिमट रही देशी चिकित्सा
आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी इलाज की है… pic.twitter.com/npfMxWmoeG
— Samastipur Town (@samastipurtown) April 6, 2026
रिक्त पदों ने बढ़ाई परेशानी :
इस औषधालय की सबसे बड़ी समस्या यहां के आवश्यक पदों का लंबे समय से खाली रहना है। आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी तीनों प्रमुख विभागों में एक भी कंपाउंडर की तैनाती नहीं है। वहीं चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों की भारी कमी के कारण दैनिक कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। होम्योपैथी चिकित्सक डॉ. निभा कुमारी का कहना है कि बिना कंपाउंडर के दवाओं का वितरण और उनका रख-रखाव करना बेहद कठिन हो जाता है। वहीं फोर्थग्रेड कर्मचारियों की कमी से साफ-सफाई, फाइलों का संधारण और अन्य जरूरी कार्य भी बाधित होते हैं।


स्थिति यह है कि यहां पदस्थापित डॉक्टरों को ही कंपाउंडर से लेकर कार्यालय सहायक तक की जिम्मेदारियां निभानी पड़ रही हैं। यहां एक क्लर्क और एक स्टोनो का पद है। क्लर्क के पद पर मो. अशनउल्लाह तैनात है लेकिन स्टोनो का पद लंबे समय से रिक्त है। इसके अलावे जिला देसी चिकित्सा पदाधिकारी का पद भी रिक्त है। फिलहाल इसका अतिरिक्त प्रभार कल्याणपुर के चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. मुहम्मद गुलाम नवी को दिया गया है।प्रशासनिक दायित्वों के बोझ के कारण उनका अधिकांश समय कार्यालयी कार्यों में ही निकल जाता है, जिससे मरीजों को मिलने वाला समय भी प्रभावित होता है।

कम मरीजों की संख्या चिंता का विषय :
जानकारी के अभाव और प्रचार-प्रसार की कमी के कारण वर्तमान में यहां प्रतिदिन मात्र 30 से 35 मरीज ही पहुंच पाते हैं, जबकि 1980 के दशक में यहां रोजाना 200 से अधिक मरीज इलाज के लिए आते थे। यह गिरावट न केवल जागरूकता की कमी को दर्शाती है, बल्कि देशी चिकित्सा के प्रति घटते सरकारी ध्यान की भी ओर इशारा करती है। जिला संयुक्त औषधालय में एक यूनानी, तीन आयुर्वेद और दो होम्योपैथिक चिकित्सकों की नियुक्ति है, लेकिन एक भी कंपाउंडर नहीं है। वहीं 12 स्वीकृत चतुर्थवर्गीय पदों के विरुद्ध मात्र 5 कर्मचारी ही कार्यरत हैं।

प्रभारी जिला देसी चिकित्सा पदाधिकारी के अनुसार यहां यूनानी चिकित्सक के रूप में डॉ. गयूर अली फरीदी, आयुर्वेद में डॉ. कौशल किशोर, डॉ. मनोज कुमार राय और डॉ. सर्वेश कुमार तथा होम्योपैथी में डॉ. निभा कुमारी और डॉ. कमलेश कुमार राय अपनी सेवाएं दे रहे हैं। जिले के विभिन्न प्रखंडों में भी देशी चिकित्सा सेवाएं संचालित हैं। सरायरंजन में आयुर्वेद, मोरवा और कल्याणपुर में यूनानी तथा कोठिया में होम्योपैथी चिकित्सा की सुविधा उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त गंगापुर (पूसा), बंधार (शिवाजीनगर) और गंगौली (विभूतिपुर) में उप स्वास्थ्य केंद्र भी संचालित हैं।
दवाओं की भी रहती है कमी :
हालांकि विभाग की ओर से दवा खरीद के लिए फंड उपलब्ध कराया जाता है, लेकिन फिर भी सभी आवश्यक दवाएं मरीजों को उपलब्ध नहीं हो पातीं। तीनों चिकित्सा पद्धतियों में सैकड़ों प्रकार की दवाओं की आवश्यकता होती है, लेकिन सीमित उपलब्धता के कारण कई मरीजों को बाहर से दवा खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ता है। देशी चिकित्सा पद्धतियों को पुनर्जीवित करने के लिए आवश्यक है कि रिक्त पदों को शीघ्र भरा जाए, पर्याप्त दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए तथा इन सेवाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। साथ ही इसे मुख्य स्वास्थ्य व्यवस्था से जोड़ने के लिए मजबूत प्रशासनिक इच्छाशक्ति भी जरूरी है, ताकि यह प्राचीन चिकित्सा धरोहर फिर से लोगों के विश्वास का केंद्र बन सके।

बयान :
रिक्त पदों को भरने, दवाओं की उपलब्धता बढ़ाने तथा भवन की स्थिति में सुधार के लिए विभाग को पत्राचार भेजा गया है। साथ ही देशी चिकित्सा पद्धतियों के प्रचार-प्रसार और मरीजों को बेहतर सुविधा देने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। जो संसाधन है उसी में बेहतर करने का प्रयास है।
– डॉ. मुहम्मद गुलाम नवी, जिला देसी चिकित्सा पदाधिकारी, समस्तीपुर



