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नौकरी-पेशा महिलाओं के लिए बेहद उपयोगी साबित हो रहा पालना घर, समस्तीपुर विकास भवन व मंडल कारा में किया जा रहा संचालित

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समस्तीपुर : नौकरी-पेशा माता-पिता के लिए कार्यस्थल पर बच्चों की देखभाल की चिंता अब बीते दिनों की बात होती जा रही है। ऐसे माता-पिता के लिए पालना घर का कांसेप्ट बेहद उपयोगी साबित हो रहा है। समस्तीपुर शहर में मुख्यमंत्री नारी शक्ति योजना के तहत दो पालना घर इस दिशा में बेहतरीन उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं। एक पालना घर कलेक्ट्रेट कैंपस स्थित विकास भवन में और दूसरा मंडल कारा में संचालित हो रहा है। यहां प्रशासन व पुलिस विभाग से जुड़े पदाधिकारी व कर्मियों के बच्चों की देखभाल की जाती है।

इस पालना घर में कलेक्ट्रेट परिसर व आसपास में कार्यरत महिला व पुरुष कर्मियों को उनके कार्य अवधि में छह माह से लेकर पांच वर्ष तक के बच्चों को रखने की नि:शुल्क व्यवस्था है। यहां बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए उचित वातावरण उपलब्ध है। पालना घर का सबसे अधिक लाभ कामकाजी महिलाओं मिल रहा है।

वर्ष 2024 में शुरू हुआ विकास भवन स्थित पालना घर :

वर्ष 2024 के जुलाई महीने में विकास भवन के प्रथम तल पर पालना घर की शुरुआत की गयी। यह पालना घर वर्तमान में 10 बच्चों की देखभाल कर रहा है। यहां बच्चों के खेलने से लेकर पढ़ाई, सोने और आराम करने तक की सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं। बच्चों के खेलने के लिए विभन्नि प्रकार के खिलौने मौजूद हैं, छोटे बच्चों के लिए पालना है, पढ़ने के लिए शैक्षणिक सामग्री है। यहां पर फ्रिज और इंडक्शन की भी सुविधा दी गई है, जिससे माता-पिता अपने बच्चों के लिए लाया गया खाना स्टोर कर सकें और जरूरत पड़ने पर गर्म करके उन्हें यहां खिलाया जा सके। यहां बच्चों की देखरेख की जिम्मेदारी क्रेच प्रियंका प्रियदर्शनी और सहायक क्रेच ज्योति कुमारी के पास है। वे पूरी आत्मीयता के साथ बच्चों की देखभाल करती हैं।

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पालना घर का संचालन सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक किया जाता है। जिला पंचायती राज कार्यालय में पदस्थापित कार्यपालक सहायक संगीता कुमारी अपने बेटे को पालना घर में रख अपनी ड्यूटी को संभालती हैं। उन्होंने बताया कि उनका बेटा नियमित रूप से वहां जाता है और उन्हें इस सुविधा से काफी राहत मिलती है। उन्होंने बताया कि वे नश्चितिं होकर अपने बच्चे को पालना घर में छोड़कर अपने कार्य पर पूरी तरह ध्यान दे पाती हैं।

उनके अनुसार यहां बच्चों को समय पर खिलाया-पढ़ाया जाता है, सुलाया जाता है और घर से लाया गया खाना भी समय पर गर्म करके खिलाया जाता है। उन्होंने इसे कामकाजी माताओं के लिए एक बेहद उपयोगी बताया। उन्होंने कहा कि पालना घर में बच्चों को समय पर खेलाने-पढ़ाने के साथ-साथ जब भी भूख लगती है, तब उन्हें घर से लाया गया दलिया या अन्य खाना गर्म करके भी खिलाया जाता है। यहां सीसीटीवी से बच्चों और कर्मियों पर निगरानी भी रखा जाता है, जिसके कारण वे ऑफिस से अपने बच्चे की गतिविधियों पर नजर रख पातीं है।

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इधर, मंडल कारा कैंपस में भी पालना घर संचालित है। यह भी सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक संचालित होता है। यहां की देखरेख दो महिला सहायिकाएं करती हैं। यहां जेल में कार्यरत कर्मियों के बच्चों की देखभाल की जाती है। इन पालना घरों की सुविधा से नौकरीपेशा माता-पिता को बड़ी राहत मिली है। वे सुबह बच्चों को यहां रखकर निश्चिंत होकर अपने कार्यस्थल पर अपने दायित्वों का नर्विहन कर पा रहे हैं। क्योंकि उन्हें यह भरोसा है कि उनके बच्चे सुरक्षित और सही देखरेख में हैं। समस्तीपुर के ये पालना घर एक मॉडल बन कर उभरे हैं, जिसे भवष्यि में दूसरे जगहों पर भी स्थापित करने से अधिक से अधिक कामकाजी माता-पिता को इसका लाभ मिल सकेगा।

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जल्द ही पुलिस लाइन में भी खुलेंगे पालना घर :

आईसीडीएस की डीपीओ संगीता कुमारी ने बताया कि जल्द ही पुलिस लाइन में भी पालना घर की शुरुआत हो जाएगी। यहां पुलिसकर्मियों के बच्चों की देखभाल की जाएगी। इसके खुलने के बाद पुलिस विभाग में कार्यरत महिला और पुरुष पुलिसकर्मी अपने छोटे बच्चों की देखभाल की चिंता किए बिना पूरी तन्मयता से ड्यूटी कर सकेंगे। यह पहल खास तौर पर उन महिला पुलिसकर्मियों के लिए बेहद फायदेमंद साबित होगी, जिन्हें ड्यूटी और बच्चों की देखभाल के बीच संतुलन बनाने में परेशानी होती थी। अब वह अपने बच्चों को पालना घर में छोड़कर निश्चिंत होकर अपने कार्य पर ध्यान दे सकेंगे। विदित कि नौकरी में आरक्षण के बाद कामकाजी महिलाओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है। ऐसी महिलाओं को छोटे-छोटे बच्चे होने पर बहुत अधिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। छोटे-छोटे बच्चों का रखना और नौकरी करना बहुत मुश्किल भरा होता है, ऐसी स्थिति में पालना घर उनके लिए एक वरदान साबित हो रहा है।

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बयान :

कामकाजी माता-पिता, विशेषकर महिलाओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पालना घर की व्यवस्था की गई है। यहां बच्चों की सुरक्षित और समुचित देखभाल सुनिश्चित की जाती है, जिससे अभिभावक निश्चिंत होकर अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकें। समस्तीपुर के पालना घरों को मॉडल के रूप में विकसित किया जा रहा है और आगे अन्य स्थानों पर भी ऐसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

सुनीता कुमारी, डीपीओ, आईसीडीएस, समस्तीपुर

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