समस्तीपुर सदर अस्पताल में आयुष चिकित्सक और गार्ड कर रहे आंख-कान की जांच, रोस्टर में ड्यूटी के बावजूद MBBS डॉक्टर नदारद
समस्तीपुर : इलाज के लिए अस्पताल आने वाला हर मरीज यह भरोसा लेकर आता है कि उसकी जांच किसी प्रशिक्षित और योग्य डॉक्टर द्वारा होगी। लेकिन सदर अस्पताल की ईएनटी ओपीडी में जो कुछ हो रहा है, वह इस भरोसे को तोड़ने वाला है। एक तरफ सरकार स्वास्थ्य विभाग को हाईटेक बनाने की बात करती है तो वहीं दूसरी तरफ हाईटेक स्वास्थ्य विभाग की जो तस्वीर सामने आई है। उसमें मरीज के इलाज के लिए यदि डॉक्टर नहीं है तो गार्ड भी इलाज कर सकता हैं। सदर अस्पताल में मरीजों के आंख-कान का इलाज बिना विशेषज्ञ डॉक्टर के किया जा रहा है और सबसे चिंताजनक बात यह है कि लोग इसे एमबीबीएस डॉक्टर का इलाज समझकर आंख-कान में दवा तक डाल रहे हैं।
सदर अस्पताल के ईएनटी ओपीडी में पदस्थापित एमबीबीएस चिकित्सक डॉ. सैयद मिराज इमाम ओपीडी के नोडल हैं जबकी मरीजों के अनुसार वही अपनी ड्यूटी से अनुपस्थित रहते हैं। आंख की जांच के लिये डॉ. पवन कुमार व कान की जांच के लिये डॉ. सैयद मिराज तैनात हैं। डॉक्टर की अनुपस्थिति में ईएनटी विभाग में आयुष चिकित्सक डॉ. संजीव कुमार और एक महिला गार्ड मरीजों के आंख-कान की जांच कर रहे हैं और आयुष डॉक्टर द्वारा अंग्रेजी दवाएं भी लिखी जा रही हैं।
बताया जा रहा है कि आयुष चिकित्सक को आंख-कान से जुड़ी बीमारियों की विशेष जानकारी नहीं है। उन्हें विशेषज्ञ की निगरानी में ही साधारण मरीज देखनी है व दवा लिखनी है। इसके बावजूद मरीजों की आंख-कान की जांच कर उन्हें दवा लिख दी जा रही है, जो सीधे तौर पर मेडिकल नियमों और मानव जीवन की सुरक्षा के खिलाफ है। सदर अस्पताल में इलाज कराने पहुंचे मरीज और उनके परिजन यह मान लेते हैं कि इलाज किसी एमबीबीएस डॉक्टर द्वारा किया जा रहा है। इसी भ्रम में मरीज आयुष चिकित्सक द्वारा लिखी गई दवाओं को आंखों में डाल रहे हैं।

पड़ताल में हुआ खुलासा :
Samastipur Town Media की टीम ने ओपीडी के पड़ताल के लिये मंगलवार को 3:54 बजे सदर अस्पताल के ओपीडी भवन पहुंच आभा एप पर रजिस्ट्रेशन करा आंख व कान जांच के लिए पुर्जा कटाया। इस दौरान इएनटी में पहुंचने पर आयुष चिकित्सक डॉ. संजीव कुमार एक मरीज को देख रहे थे। पास ही मौजूद एक महिला गार्ड मरीज के आंखों की जांच कर रही थी। जांच के दौरान आयुष चिकित्सक अंग्रेजी दवा भी लिख रहे थे।
टीम के द्वारा आयुष चिकित्सक से पूछा गया की डॉ. सैयद मिराज इमाम नहीं हैं क्या, तो जबाब मिला की वह अपने क्लिनिक पर हैं। इस दौरान पीछे से आए एक गार्ड ने हड़बड़ी में बताया कि यह पत्रकार हैं तो मरीज की जांच कर रही महिला गार्ड वहां से भाग गयी। बता दें की यह कोई पहली घटना नहीं है। सदर अस्पताल में रोस्टर का उल्लंघन कर अधिकतर चिकित्सक अपने निजी नर्सिंग होम चलाने में व्यस्त रहते है और अपनी जगह किसी अन्य डॉक्टर से ड्यूटी कराते है। सबसे ताज्जुब की बात है कि रोस्टर का पालन होने की बात कहने के लिये पुर्जा पर रोस्टर वाले डॉक्टर का ही नाम अंकित होता है, और सरकार द्वारा उन्हें इसका वेतन भी दिया जाता है।

इससे पहले इमरजेंसी वार्ड में भी चार-चार डॉक्टरों की जगह सिर्फ डॉ. संतोष झा ही ड्यूटी करते दिखे थे। इस मामले के उजागर होने के बाद सदर अस्पताल प्रबंधन द्वारा स्पष्टीकरण पूछकर छोड़ दिया गया। सीसीटीवी से अस्पताल में निगरानी के बावजूद डॉक्टर चकमा देकर मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे है। बावजूद इसके कारवाई के बदले बस खानापूर्ति कर दी जा रही है। हालांकि सदर अस्पताल में ऐसे भी कई डॉक्टर हैं जो रोस्टर के अनुसार अपनी ड्यूटी समय से कर रहे हैं। अब देखना यह है कि स्वास्थ्य विभाग इस गंभीर लापरवाही पर क्या संज्ञान लेता है, या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर बस स्पष्टीकरण तक सिमट जाएगा।
बयान :
सदर अस्पताल की ईएनटी ओपीडी से जुड़ा मामला गंभीर है। किसी भी स्थिति में गैर-विशेषज्ञ या गैर-एमबीबीएस डॉक्टर द्वारा आंख-कान जैसी संवेदनशील बीमारियों का इलाज करना नियमों के विरुद्ध है। आयुष चिकित्सक एमबीबीएस की निगरानी में साधारण बीमारियों की अंग्रेजी दवा लिख सकते है। ईएनटी में महिला गार्ड द्वारा आंखों की जांच मामले के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया गया है। मरीजों की सुरक्षा से किसी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
– डॉ. एसके चौधरी, सिविल सर्जन समस्तीपुर
