मैट्रिक पेपर लीक और इंटर टॉपर घोटाले के कारण भी सुर्खियों में रहा है समस्तीपुर जिला, उड़ीसा SSC पेपर लीक कनेक्शन के बाद फिर चर्चा में आया पुराना मामला
2017 के मैट्रिक पेपर लीक और इंटर टॉपर घोटाले ने हिला दी थी बिहार की शिक्षा व्यवस्था

समस्तीपुर : प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली और संगठित पेपर लीक रैकेट को लेकर देशभर में चर्चा का बाजार गर्म है। उड़ीसा एसएससी पेपर लीक प्रकरण में समस्तीपुर जिले का कनेक्शन सामने आने के बाद अब जिले में पूर्व में हुई पेपर लीक मामले से जुड़ी घटनायें एक बार फिर सुर्खियों में आ गई हैं। समस्तीपुर जिला पूर्व में भी मैट्रिक परीक्षा के प्रश्न पत्र लीक और इंटर टॉपर घोटाले जैसे बड़े विवादों में शामिल रहा है, जिसने बिहार की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। वर्ष 2017 में मैट्रिक पेपर लीक मामला उन घटनाओं में शामिल रहा है, जिसने बिहार बोर्ड की परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को गहरी चोट पहुंचाई थी।

समस्तीपुर जिले से प्रश्न पत्र के वायरल होने की घटना ने शासन से लेकर परीक्षार्थियों तक को हिलाकर रख दिया था। इसमें स्थानीय स्तर पर सक्रिय गिरोहों, कोचिंग संचालकों और शिक्षा विभाग के कुछ कर्मियों की मिलीभगत की बात सामने आई थी। जांच में यह भी सामने आया था कि पेपर की फोटो खींचकर सोशल मीडिया के जरिए मिनटों में प्रसारित किया जा रहा था। मामले ने जिला प्रशासन को कठघरे में खड़ा कर दिया था और कई कर्मियों पर कार्रवाई भी हुई थी।

कोचिंग संचालक से लेकर शिक्षा विभाग के कर्मी थे शामिल :
मार्च 2017 में जिले में मैट्रिक की परीक्षा के पहले दिन ही दोनों पालियों में प्रश्नपत्र लीक हुआ था। इस मामले में राज्य स्तर से संज्ञान लिया गया था। घटना की पूरी जांच के लिए तत्कालीन डीएम प्रणव कुमार ने एसआईटी का गठन किया था। तत्कालीन सदर एसडीओ केडी प्रौजवल और तत्कालीन सदर डीएसपी तनवीर अहमद के नेतृत्व में गठित एसआईटी ने जब सोशल मीडिया पर वायरल प्रश्नपत्र को खंगाला गया तो मामले से परत दर परत पर्दा हटने लगा।

जांच के दौरान यह बात सामने आयी कि परीक्षा शुरू होने से पहले ही कुछ शिक्षा माफिया, कोचिंग संचालक और शिक्षा विभाग के कर्मियों की मिलीभगत से प्रश्नपत्र की तस्वीर खींच कर फिर इसे लीक कर दिया जा रहा था। लीक हुए प्रश्नो के उत्तर तैयार करने के बाद फिर से सोशल मीडिया के माध्यम से ही परीक्षा केंद्र के अंदर भी भेज दिया जा रहा था। पेपर लीक करने में शिक्षा विभाग के कर्मी, जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में प्रतिनियुक्त एक हेडमास्टर और शहर में संचालित एक कोचिंग के संचालक समेत कई शिक्षा माफियाओं की भूमिका सामने आयी थी।

इसको लेकर तत्कालीन डीएम के निर्देश पर बीडीओ डॉ भुवनेश मिश्र ने समस्तीपुर नगर थाने में चार लोगों को नामजद और अन्य अज्ञात के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराया था। प्राथमिकी में बीडीओ ने आरोपी कोचिंग संचालक समेत अन्य पर रुपयों कमाने की नीयत से प्रश्न पत्र को लीक करने का आरोप लगाया था। राज्य भर में किरकिरी के बाद आनन-फानन में कारवाई करते हुए पुलिस ने डीईओ कार्यालय में छापेमारी कर एक हेडमास्टर जो डीइओ कार्यालय में विभागीय गोपनीय कार्य भी देखता था उसे गिरफ्तार किया था। बाद में एक और गिरफ्तारी की गई। लेकिन धीरे-धीरे मामला ठंडे बस्ते में चला गया और पुलिसिया कारवाई भी ढीली हो गयी। हालांकि उस समय जिला विधि प्रशाखा के तत्कालीन प्रभारी उप समाहर्ता महेश कुमार दास ने आरोपी कोचिंग संचालक के कोचिंग परिसर में गड़बड़ी की आशंका को देखते हुए भविष्य में किसी भी तरह का परीक्षा का केंद्र नहीं बनाये जाने को लेकर रिपोर्ट की थी।

इंटर टॉपर घोटाला में भी शिक्षा व्यवस्था पर लगा था बड़ा दाग :
बिहार का चर्चित इंटर टॉपर घोटाला भी समस्तीपुर से जुड़ा रहा है। फर्जी तरीके से छात्रों को टॉपर बनाने जैसे आरोपों ने पूरे राज्य की शिक्षा प्रणाली पर अविश्वास की स्थिति पैदा कर दी थी। घोटाले में समस्तीपुर के कुछ प्रभावशाली शिक्षा माफियाओं की भूमिका की जांच हुई थी। कॉपी मूल्यांकन, परीक्षा केंद्रों के चयन और इंटरनल स्टाफ की मिलीभगत पर गंभीर सवाल उठे थे। वर्ष 2017 में ताजपुर प्रखंड के रामानंद सिंह जगदीप नारायण उच्च विद्यालय चकहबीब के आर्ट्स के छात्र गणेश कुमार ने 82.6 फीसदी मार्क्स के साथ राज्य भर में टाॅप कर सभी का ध्यान आकर्षित किया था। जब मीडिया ने गणेश से आर्ट्स से जुड़े कुछ सवाल किए गए तो उसके जवाब बताने में भी उसके पसीने छूटने लगे थे।

इसके बाद बिहार के साथ-साथ देश भर में उसकी योग्यता पर सवाल उठने लगे थे। बाद में जांच हुई तो पता चला की वह फर्जी तरीके से अंक बढ़वाकर और पेपर लीक कर टाॅपर बन गया था। उसने अपनी वास्तविक उम्र छिपाकर भी दाखिला लिया था। जांच के बाद गणेश पर फर्जी तरीके से दाखिला लेने और फर्जी तरीके से टाॅपर बनने के मामले को लेकर रिजल्ट रद्द करते हुए केस दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया गया था। गिरफ्तारी के बाद गणेश ने खुद माना था कि उसने गिरिडीह से 1990 में मैट्रिक की परीक्षा पास की और फिर कोडरमा से 1992 में इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की। इसके बाद 2013 में शिवाजीनगर के संजय गांधी उच्च विद्यालय लक्ष्मीनिया में नौवीं कक्षा में एडमिशन लिया था। मगर दो साल तक उसने एक भी क्लास अटेंड नहीं की। फिर 2015 में मैट्रिक और 2017 में इंटरमीडिएट की परीक्षा दी। इसी दौरान वह इंटरमीडिएट की परीक्षा में राज्यभर में टाॅप कर गया।



