राजनीति छोड़ने का मन करता है, अब तो महबूब भाई भी सुना देते हैं… बिहार चुनाव से पहले छलका पप्पू यादव का दर्द

बिहार विधानसभा चुनाव से पहले बिहार में सियासी बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है. माले विधायक महबूब आलम ने जैसे ही पूर्णिया सांसद पप्पू यादव के महागठबंधन और कांग्रेस में होने नहीं होने पर प्रश्नचिन्ह खड़ा किया, वैसे ही पप्पू यादव ने भी माले विधायक महबूब आलम के सवाल पर प्रतिक्रिया दी. पप्पू यादव ने कहा कि महबूब भाई भी सुना देते हैं. लेकिन, उनके पास राहुल गांधी और प्रियंका गांधी का आशीर्वाद है. वहीं पप्पू यादव ने बिहार कांग्रेस प्रभारी को लेकर कहा कि वह अच्छे आदमी और जीनियस हैं, लेकिन जिम्मेदारी नहीं तय करते.
पप्पू यादव ने कहा कि वे धर्म संकट में हैं और उनका जीवन कष्टपूर्ण हो गया है. उन्हें कभी-कभी राजनीति छोड़ने का मन होता है, लेकिन विचारधारा और रिश्तों को देखते हुए ऐसा नहीं कर पाते. हालांकि थोड़ी ही देर बाद पप्पू यादव ने राजनीति से संन्यास लेने की बात को नकारते हुए कहा कि वे चौराहे पर खड़े हैं और अगले कदम के बारे में जनता से संवाद कर ही फैसला करेंगे. उनके लिए एक तरफ खाई की स्थिति है, लेकिन उन्हें राहुल गांधी और प्रियंका गांधी पर भरोसा है. वे महागठबंधन में हों या न हों, एक कांग्रेसी तो हैं ही.

वहीं महबूब आलम के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए पप्पू यादव ने कहा कि “सूप बाजे चलनियों बजे, हाथी चले बाजार कुत्ता भूके हजार.” उन्होंने कहा कि उन्हें महबूब भाई जैसे नेताओं की नहीं, बल्कि जनता की जरूरत है. विचारधारा से अलग होना उनके लिए मुश्किल है, और राहुल गांधी व प्रियंका गांधी से उनका व्यक्तिगत और पारिवारिक संबंध है.





