समस्तीपुर के 84 हजार से अधिक जमीनों की रजिस्ट्री पर लगी रोक, सूची में गड़बड़ी से बढ़ी परेशानी, सामने आई वजह
फाइल तस्वीर : जिला निबंधन कार्यालय

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समस्तीपुर : समस्तीपुर जिले में 84,000 से अधिक जमीन खाता-खेसरा नंबर निबंधन विभाग द्वारा “रोक सूची” में डाले जाने के कारण हजारों ज़मीन मालिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।भूमि विक्रेता अपने स्वामित्व की जमीन बेचने के लिए रजिस्ट्रेशन कराने जाते हैं, तो उन्हें तब पता चलता है कि उनकी जमीन पर सरकारी रोक लगी हुई है — जबकि उन्होंने लगान भी समय पर अदा किया है और ज़मीन पर कब्जा भी वर्षों से है।
क्या है रोक सूची और क्यों है यह विवादों में?
सरकार ने सरकारी भूमि जैसे गैर-मजरुआ आम/खास जैसे जमीनों पर निबंधन से रोकने के लिए एक सूची तैयार की है, जिसे “रोक सूची” कहा जाता है।कई मामलों में स्वामित्व वाली निजी ज़मीनें भी गलती से रोक सूची में डाल दी गई हैं।खाता-खेसरा नंबर गलत मेल हो जाने से वैध ज़मीनें भी सूची में आ रही हैं। रोक सूची सार्वजनिक नहीं है, जिससे ज़मीन मालिकों को जानकारी ही नहीं मिलती कि उनकी ज़मीन सूची में क्यों और कैसे गई।

रोक सूची से ज़मीन हटाने की प्रक्रिया क्या है?
रोक सूची से ज़मीन हटाने की प्रक्रिया के मुताबिक डीसीएलआर रिपोर्ट आवश्यक है (Deputy Collector Land Reforms)। राजस्व विभाग और निबंधन विभाग की संयुक्त बैठक में निर्णय होता है।एक साथ दर्जनों मामले जमा होने पर ही बैठक होती है, जिससे प्रतीक्षा लंबी होती है। अगर किसी मामले में संदेह या त्रुटि हो, तो पुनः जांच की प्रक्रिया चलती है। समस्या यह है कि इसका कोई निर्धारित समयसीमा नहीं है। प्रक्रिया बहुत धीमी और जटिल है। आम जनता दफ्तर-दफ्तर चक्कर काट रही है।

रोक सूची में कितनी ज़मीनें और कहां?
अंचलवार रोक सूची में ज़मीन (खाता-खेसरा संख्या):
अंचल / संख्या
रोसड़ा 16,767
समस्तीपुर 8,203
बिथान 1,646
कल्याणपुर 6,517
विभूतिपुर 6,881
विद्यापतिनगर 5,705
ताजपुर 5,048
दलसिंहसराय 5,748
सिंधिया 5,474
पटोरी 3,814
मोरवा 3,085
शिवाजीनगर 3,566
हसनपुर 4,391
पूसा 2,294
मोहिउद्दीननगर 911
उजियारपुर 1,072
सरायरंजन 1,040
मोहनपुर 634
वारिसनगर 1,096
खानपुर 579
कुल 84,471
गत बैठक में दो दर्जन मामलों की सुनवाई :
राजस्व विभाग और निबंधन कार्यालय की संयुक्त बैठक में करीब दो दर्जन मामलों में सुनवाई की गई। सभी मामलों को एक-एककर सुना गया। इसमें करीब डेढ़ दर्जन मामलों में सहमति बन सकी जबकि, आधा दर्जन मामलों में पुनः जांच कराने की बात कही गई। बताया गया कि उक्त बैठक का कोई समय सीमा भी तय नहीं है। बैठक के लिए एक साथ कई मामले जमा होने बाद में ही बैठक की प्रक्रिया पूरी कराई जाती है।

जमीन बेचने वाले को पता ही नहीं :
रोक सूची सार्वजनिक नहीं होने से जमीन बेचने वाले को यह पता ही नहीं चलता कि उसकी जमीन कब और कैसे रोक सूची में पहुंच गई जबकि, वे जमीन पर काबिज होने के साथ ही उसकी लगान आदि भी ससमय भरते चले आ रहे। एक मामले में पीड़ित ने वर्ष 2020 में ही जमीन का निबंधन कराया। किसी कारण बस उसे जमीन बेचने की जरूरत महसूस हुई। उसने खरीदार से बातचीत तय करने बाद में उसे निबंधन को कागजात की तैयारी आदि शुरू की।
इस दौरान उसे पता चला कि उक्त जमीन सरकार की रोक सूची में शामिल है। अब उसके लिए वह विभाग के चक्कर काट रहे। बताया गया कि एक बार यदि कोई जमीन रोक सूची में चली गई तो उसे निबंधन कार्यालय और राजस्व विभाग की संयुक्त बैठक के जरिए ही हटाया जा सकता है। इसके लिए डीसीएलआर की रिपोर्ट आवश्यक है। रिपोर्ट मिलने पर यदि किसी तरह की कोई त्रुटि या संदेह उत्पन्न हुआ तो उसे रोक सूची से नहीं हटाया जा सकता। उस मामले में पुनः जांच कराई जा रही। बताया गया कि जमीन के रोक सूची में होने और न होने की जानकारी निबंधन विभाग से ली जा सकती है।
बाइट :
सरकारी जमीन के अलावा वक्फ बोर्ड और केसरे ए हिन्द समेत अन्य कई तरह की जमीन को रोक सूची में डाला गया है। इसकी संख्या जिला में करीब 84 हजार से अधिक है। इसमें मौजूद जमीन पर यदि कोई अपना दावा करता तो उसे आवश्यक प्रक्रिया पूरी करनी होती है। बाद संयुक्त बैठक के जरिए उसे हटाया जाता है। कोई यदि इसकी जानकारी लेना चाहता है तो निबंधन कार्यालय से उक्त जानकारी मिल जाएगी। साथ ही यह भी पता चला जाएगा कि उक्त जमीन पर किसका दावा है।
– अमित कुमार मंडल, जिला अवर निबंधक




