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दिलीप जायसवाल ने रोकी 139 सीओ की सैलरी, बोले- मंत्री बनने में देर हुई नहीं तो…

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बिहार के राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री दिलीप जायसवाल ने जमीन सर्वे और दाखिल-खारिज से संबंधित प्रक्रिया में गड़बड़ करने वाले पदाधिकारियों के खिलाफ सख्त रवैया अपनाया है। बिहार विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान जायसवाल ने गुरुवार को कहा कि उन्होंने 139 सीओ (अंचल पदाधिकारियों) का वेतन रोक दिया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर पदाधिकारी नहीं सुधरे, तो उन्हें सुधारने के लिए आगे भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। एक अन्य सवाल के जवाब मेें जायसवाल ने यह भी कहा कि वह विलंब से मंत्री बने, इसलिए कार्रवाई में देरी हुई।

मंत्री दिलीप जायसवाल ने गुरुवार को सदन में कहा कि सुस्त अंचलाधिकारियों की सूची तैयार कर ली गई है। विभाग की ओर से अब कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। प्रमंडलीय आयुक्त एवं जिलाधिकारियों की जांच के बाद नए सिरे से एक्शन लिया जाएगा।

इस बीच AIMIM के विधायक अख्तरूल ईमान अपनी सीट से खड़े हुए और उन्होंने अंचल स्तर पर अस्वीकृत किए गए आवेदनों का निपटारा डीसीएलआर स्तर पर न करने की मांग की। उन्होंने कहा कि किसी रैयत के खातियान का अगर 30-35 कार्यदिवस में दाखिल-खारिज नहीं हुआ है। ऐसे आवेदनों को डीसीएलआर के पास भेजा जा रहा है। रैयत को इसकी सूचना नहीं मिल पा रही है। डीसीएलआर के नाम पर उन्हें 15 से 20 हजार रुपये रिश्वत देनी पड़ रही है। मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा कि नियमों के अनुसार अगर कोई अधिकारी अपनी जांच पूरी कर देता है, तो फिर दोबारा उसे ही जांच के लिए नियुक्त नहीं किया जाता है। ऐसे में ईमान की मांग बेबुनियाद है।

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बिहार के राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री दिलीप जायसवाल ने जमीन सर्वे और दाखिल-खारिज से संबंधित प्रक्रिया में गड़बड़ करने वाले पदाधिकारियों के खिलाफ सख्त रवैया अपनाया है। बिहार विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान जायसवाल ने गुरुवार को कहा कि उन्होंने 139 सीओ (अंचल पदाधिकारियों) का वेतन रोक दिया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर पदाधिकारी नहीं सुधरे, तो उन्हें सुधारने के लिए आगे भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। एक अन्य सवाल के जवाब मेें जायसवाल ने यह भी कहा कि वह विलंब से मंत्री बने, इसलिए कार्रवाई में देरी हुई।

मंत्री दिलीप जायसवाल ने गुरुवार को सदन में कहा कि सुस्त अंचलाधिकारियों की सूची तैयार कर ली गई है। विभाग की ओर से अब कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। प्रमंडलीय आयुक्त एवं जिलाधिकारियों की जांच के बाद नए सिरे से एक्शन लिया जाएगा।

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इस बीच AIMIM के विधायक अख्तरूल ईमान अपनी सीट से खड़े हुए और उन्होंने अंचल स्तर पर अस्वीकृत किए गए आवेदनों का निपटारा डीसीएलआर स्तर पर न करने की मांग की। उन्होंने कहा कि किसी रैयत के खातियान का अगर 30-35 कार्यदिवस में दाखिल-खारिज नहीं हुआ है। ऐसे आवेदनों को डीसीएलआर के पास भेजा जा रहा है। रैयत को इसकी सूचना नहीं मिल पा रही है। डीसीएलआर के नाम पर उन्हें 15 से 20 हजार रुपये रिश्वत देनी पड़ रही है। मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा कि नियमों के अनुसार अगर कोई अधिकारी अपनी जांच पूरी कर देता है, तो फिर दोबारा उसे ही जांच के लिए नियुक्त नहीं किया जाता है। ऐसे में ईमान की मांग बेबुनियाद है।

वहीं, बीजेपी विधायक पवन जायसवाल के एक सवाल का जवाब देते हुए मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा कि उन्हें मंत्री बनने में समय लगा, इसलिए कार्रवाई में देरी हुई। दरअसल, पूर्वी चंपारण जिले के एक सरकारी स्कूल की जमीन की जमाबंदी दूसरे के नाम कर दिया गया था। मंत्री ने आश्वासन दिया कि एक माह के भीतर दोषी सीओ पर कार्रवाई की जाएगी।

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