साहेब यह कैसी व्यवस्था है? समस्तीपुर सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में इलाज करने के लिए सिविल सर्जन से करवानी पड़ती है पैरवी
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समस्तीपुर :- सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में अगर इलाज कराना है तो पहले सिविल सर्जन से करवाए पैरवी, तभी कटेगी आपकी पर्ची। आए दिन सदर अस्पताल की कमियां सामने आती रहती है। वहीं इन दिनों सदर अस्पताल के कुछ कर्मियों का बोलबाला नजर आ रहा है। पिछले कई सालों से यह कर्मी इस अस्पताल में कुंडली मारकर बैठे हैं और अपना वर्चस्व बनाए हुए हैं। यही वजह है कि यह किसी की सुनते। ऐसे में अगर गरीब मरीज इलाज के लिए इमरजेंसी वार्ड पहुंच जाए तो। उसका इलाज क्या होगा, स्वास्थ्य कर्मी पर्ची ही नहीं काटेंगे।
ताजा मामला जीआरपी थाना के एक सिपाही अभिजीत कुमार से जुड़ा हुआ है। सिपाही अभिजीत अपने साथी के साथ एक कैदी को लेकर मेडिकल के लिए इमरजेंसी वार्ड पहुंचा था। इसी बीच जीआरपी जवान को सीने में दर्द हुई और उसने पर्ची काटने को स्वास्थ्य कर्मी को कहा। उक्त कर्मी ने पर्ची तो नहीं काटा, उल्टा जवान को कहा मेरी ट्रेन छूट जाएगी तो क्या तुम रुकवा दोगे। जवान कहता रहा मगर कर्मी सुनने को तैयार नहीं था।

तभी जवान ने अपने वरीय अधिकारी से फोन पर बात कर फोन स्वास्थ्य कर्मी वीरेंद्र झा को दिया। मगर स्वास्थ्य कर्मी ने बात नहीं किया। कुछ देर के बाद जवान किसी से समस्तीपुर सिविल सर्जन का नंबर ले उनसे बात की और स्वास्थ्य कर्मी वीरेंद्र झा से बात कराया। तब जाकर जवान की पर्ची काटी गई और इलाज हुआ।

जवान ने कहा जब एक स्टाफ के साथ यह लोग इस तरह की हरकत करते हैं तो आप समझ सकते हैं कि आम गरीब मरीजों के साथ यह लोग क्या करते होंगे। एक पर्ची काटने के लिए अस्पताल के सबसे बड़े अधिकारी सिविल सर्जन से बात करनी पड़े। और स्वास्थ्य कर्मी को फोन पर बात करवाना पड़े।

सूत्र बताते हैं कि इस कर्मी को लेकर हज़ार बार बड़े अधिकारी को शिकायते मिलती रहती है बावजूद कोई भी अधिकारी इस चतुर्थ कर्मी के खिलाफ कोई कार्रवाई नही की जाती है! पिछले सप्ताह ही एक महिला मरीज से हाथ में प्लास्टर करने के एवज में 300 सौ रुपये ले लिया था लेकिन महिला मरीज के लिखित शिकायत करने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं किया जाना भ्र्ष्टाचार को बढ़ावा देना प्रतीत हो रहा है।
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