समस्तीपुर :- समस्तीपुर समेत उत्तर बिहार के लगभग सभी जिलों के कुछ स्थानों पर 6-7 जनवरी के आसपास हल्की बारिश व बूंदाबांदी की संभावना है। ग्रामीण कृषि मौसम सेवा पूसा एवं भारत मौसम विज्ञान विभाग के द्वारा 6-10 जनवरी तक के मौसम पूर्वानुमान में बताया गया है कि इस दौरान मौसम शुष्क रहेगा। इस अवधि में अधिकतम तापमान 21 से 23 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना व्यक्त की गई है। न्यूनतम तापमान 10 से 12 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान व्यक्त किया गया है।
सुबह में मध्यम से घने कुहासा की संभावना व्यक्त की गई है। इस दौरान औसतन 2 से 3 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से मुख्यतः पछिया हवा चलने का अनुमान है। वही सापेक्ष आर्द्रता सुबह में करीब 80 से 90 प्रतिशत तथा दोपहर में 50 से 60 प्रतिशत रहने की संभावना है।
लगभग एक सप्ताह से बदले मौसम से गेहूं की फसल को लाभ होने की संभावना है। कोहरा से गेहूं की फसल लहलहाने भी लगी है। अब से दस दिन पूर्व तक मौसम गेहूं के फसलों के पूर्णत: प्रतिकूल चल रहा था, जिससे उत्पादन प्रभावित होने की संभावनाएं उत्पन्न हो गई थी। अचानक दिसम्बर के अंतिम सप्ताह में मौसम ने यू टर्न लिया तो किसानों के चेहरे खिल उठे। मौसम का अगर यही हाल रहा तो गेहूं का उत्पादन बढ़ने से कोई रोक नहीं सकता।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार गेहूं के उत्पादन के लिए ठंड व शीतलहरी का होना आवश्यक है। गेहूं जाड़े का फसल है और इसके लिए न्यूनतम आठ डिग्री सेल्सियस तापमान का होना आवश्यक है। पहले गेहूं का फसल फोटो सेंसेटिव हुआ करता था, लेकिन अब नई किस्म का गेहूं तापमान सेंसेटिव होती है। पुराने किस्म के गेहूं पर तापमान का उतना असर नहीं होता था और समय बढ़ने के साथ उसमें फूल व फल लगते थे। लेकिन अब वैसी बात नहीं रह गई है।
अब तापमान बढ़ने के साथ फूल व फल लगने आरंभ हो जाते हैं। परिणाम था कि कुछ दिन पूर्व तक किसान दहशत में थे। उन्हें इस बात का भय था कि कहीं तापमान में और वृद्धि हुई तो समय के पूर्व फूल व फल लगने लगेंगे तथा उत्पादन में कमी आएगी। बता दें कि गेहूं फसल का न्यूनतम तापमान 8 व अधिकतम 22 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए था। गेहूं बुआई के समय जिले का तापमान अधिकतम 29 व न्यूनतम 12 डिग्री सेल्सियस चल रहा था जो गेहूं फसल के लिए पूर्णत: प्रतिकूल था।
जिले में मौसम का बदला मिजाज गेहूं के साथ ही चना और मटर आदि के अमृत बन गया है। गौरतलब है कि पिछले कई दिनों से जिलेभर में कड़ाके की सर्दी पड़ रही है। साथ ही आने वाले दिनों में सर्दी और बढ़ने की संभावना है। यह निश्चित रुप से रबी फसल के लिए फायदेमंद होगी।
रबी की फसल लगाने वाले किसानों को इस मौसम ने राहत दिया है लेकिन कुछ ऐसी फसलें है जिनको लेकर किसान चिंतित है। सब्जी की फसलों को पाला नुकसान पहुंचाने की कगार पर पहुंच चुका है। आलू की फसल झुलसा रोग की चपेट में आने लगा है। वहीं सब्जी के पौधे पर पाला लगने के कारण उत्पादन प्रभावित हो रही है।
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