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भारत में तेजी से बढ़ रहा आईफोन का उत्पादन, लेकिन ऐप्पल के सामने आ रही ये समस्या, नई रिपोर्ट में खुलासा

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महत्वाकांक्षी जलवायु प्रतिबद्धताओं के बावजूद, ऐप्पल (Apple) के भारत-स्थित आपूर्तिकर्ता जो अब हर पांच में से एक iPhone का असेंबली करते हैं. नवीकरणीय ऊर्जा को अपनाने में केवल मामूली प्रगति कर पाए हैं. यह निष्कर्ष थिंक टैंक क्लाइमेट रिस्क होराइजन्स (Climate Risk Horizons) के नए शोध में सामने आया है.

2024 में दुनिया के 20% iPhones भारत में असेंबल किए गए

कंपनी ने 2025 के स्तर की तुलना में वर्ष 2030 तक अपने स्कोप 1, 2 और 3 उत्सर्जन में 75% तक की कमी लाने का लक्ष्य निर्धारित किया है. ऐप्पल (Apple) ने अपने आपूर्तिकर्ताओं और फाइनल असेंबली केंद्रों को भी 2030 तक 100% स्वच्छ बिजली अपनाने का निर्देश दिया है. स्कोप 1, 2 और 3 उत्सर्जन, किसी कंपनी द्वारा उत्पन्न प्रत्यक्ष उत्सर्जन (स्कोप 1), खरीदी गई ऊर्जा (स्कोप 2), और उसकी वैल्यू चेन के माध्यम से होने वाले सभी प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष उत्सर्जन (स्कोप 3) को सम्मिलित करते हैं. वित्त वर्ष 2024 में दुनिया के 20% iPhones भारत में असेंबल किए गए, और आने वाले वर्षों में यह हिस्सेदारी बढ़ने की उम्मीद है. हालांकि, “ग्रीनिंग इंडिया’स ऐप्पल (Apple)” शीर्षक वाली रिपोर्ट में भारत में ऐप्पल (Apple) के 13 आपूर्तिकर्ताओं की ऊर्जा खपत का विश्लेषण किया गया और पाया गया कि नवीकरणीय ऊर्जा (RE) अपनाने में इनकी प्रगति बहुत सीमित है.

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रिपोर्ट की मुख्य लेखिका सिमरन कालरा ने दी अहम जानकारी 

रिपोर्ट की मुख्य लेखिका सिमरन कालरा ने कहा, “भारत में विनिर्माण इकाइयों वाले 13 ऐप्पल (Apple) आपूर्तिकर्ताओं में से केवल दो ने ही अपनी स्थिरता रिपोर्टों में नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग की जानकारी दी है. यह ऐप्पल (Apple) के 2030 तक अपनी सप्लाई चेन में 100% RE उपयोग के लक्ष्य से बहुत दूर है. ऊर्जा डेटा की मॉनिटरिंग और वेरिफिकेशन में भी कई आपूर्तिकर्ता पीछे हैं. इन कमियों को दूर करना ऐप्पल (Apple) के स्कोप 3 उत्सर्जन रिपोर्टिंग को विश्वसनीय और सटीक बनाने के लिए आवश्यक है.”

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भारत में ऐप्पल (Apple) के लिए निर्माण करने वाले 13 आपूर्तिकर्ताओं में से केवल FIH मोबाइल लिमिटेड (Foxconn की सहायक कंपनी) और Flex लिमिटेड ने ही उच्च-प्रभाव वाले तरीकों जैसे पावर परचेज एग्रीमेंट्स (PPA), स्वयं की सौर इकाइयां तथा बंडल्ड रिटेल बिजली के माध्यम से नवीकरणीय ऊर्जा खरीदी है. 2024 में FIH ने अपनी परिचालन गतिविधियों में 35% RE का उपयोग किया, जबकि Flex ने अपनी स्थिरता रिपोर्टों के अनुसार 2022 और 2023 में 27.5% RE का उपयोग किया. शेष 11 आपूर्तिकर्ताओं ने या तो भारत में कोई नवीकरणीय ऊर्जा उपयोग नहीं की, या कम-प्रभाव वाले एनर्जी एट्रिब्यूट सर्टिफिकेट (EAC) खरीदे, या भारतीय संयंत्रों के लिए किसी भी RE खरीद संबंधी जानकारी का खुलासा नहीं किया. Tata Electronics कार्बन न्यूट्रैलिटी का दावा करती है, लेकिन यह केवल कम-प्रभाव वाले इंटरनेशनल रिन्यूएबल एनर्जी क्रेडिट्स (i-REC) खरीदकर हासिल किया गया है.

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भारत में ग्रिड उत्सर्जन तभी कम होता है जब नई नवीकरणीय क्षमता कोयला-आधारित उत्पादन की जगह लेती है. PPA जैसे उच्च-प्रभाव वाले खरीद विकल्प इस बदलाव में योगदान देते हैं. इसके विपरीत, केवल REC खरीदने से जीवाश्म-ईंधन आधारित बिजली उत्पादन या खपत में कोई अंतर नहीं पड़ता, इसलिए इन्हें डीकार्बोनाइजेशन में कम-प्रभावी माना जाता है.

रिपोर्ट में ऐप्पल (Apple) और उसके भारत-स्थित आपूर्तिकर्ताओं की नवीनतम सार्वजनिक स्थिरता रिपोर्टों, जलवायु नीतियों और CDP (Carbon Project Disclosures) का विश्लेषण शामिल है. रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि 13 में से 10 आपूर्तिकर्ता तमिलनाडु, कर्नाटक और महाराष्ट्र जैसे उन राज्यों में स्थित हैं जहाँ ओपन एक्सेस क्षमता और हरित ऊर्जा वृद्धि दोनों बहुत मजबूत हैं. इसके बावजूद, ये कंपनियाँ अपने संचालन में ओपन एक्सेस RE का उपयोग नहीं कर रही हैं, जो ऐप्पल (Apple) की सप्लाई चेन डीकार्बोनाइजेशन के प्रयासों में एक बड़ी कमी को दर्शाता है.

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वैश्विक स्तर पर ऐप्पल (Apple) ने अपनी मार्केट-आधारित उत्सर्जन में लगातार गिरावट की रिपोर्ट की है, जिसका श्रेय वह अपने आपूर्तिकर्ताओं द्वारा उपयोग की जा रही स्वच्छ ऊर्जा को देता है. लेकिन रिपोर्ट के अनुसार 2023 और 2024 में ऐप्पल (Apple) के वैश्विक आपूर्तिकर्ताओं द्वारा की गई RE खरीद का 50% से अधिक हिस्सा अनबंडल्ड RE सर्टिफिकेट्स (RECs) जैसे कम-प्रभाव और कम-पारदर्शिता वाले साधनों के माध्यम से था.

रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि ऐप्पल (Apple) अपने आपूर्तिकर्ताओं को अनबंडल्ड RECs की बजाय दीर्घकालिक PPAs या ऑन-साइट/स्वामित्व वाली ऊर्जा परियोजनाओं जैसे उच्च-प्रभाव विकल्प अपनाने के लिए प्रोत्साहित करे. ऐप्पल (Apple) को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि उसके आपूर्तिकर्ता सभी उत्पादन स्थलों के लिए ऊर्जा डेटा की व्यापक मॉनिटरिंग और स्वतंत्र वेरिफिकेशन कराएँ. कुछ देशों में ऐप्पल (Apple) ने अपनी सप्लाई चेन को डीकार्बोनाइज करने के लिए नई नवीकरणीय ऊर्जा अवसंरचना में सीधे निवेश किया है, लेकिन भारत में उसने अब तक ऐसा नहीं किया है.

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क्लाइमेट रिस्क होराइजन्स के आशिष फर्नांडिस ने कहा, “भारत को विनिर्माण केंद्र के रूप में चुनना ऐप्पल (Apple) का एक सकारात्मक कदम है, लेकिन RE अपनाने में आपूर्तिकर्ताओं का धीमा प्रदर्शन चिंताजनक है. ऐप्पल (Apple) को यह सुनिश्चित करना होगा कि उसके भारतीय आपूर्तिकर्ता 2030 तक 100% RE लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में अग्रसर हों. भारत की सशक्त RE पारिस्थितिकी को देखते हुए यह लक्ष्य पूरी तरह संभव है, लेकिन इसके लिए ऐप्पल (Apple), उसके आपूर्तिकर्ताओं और स्थानीय डिस्कॉम्स को सक्रिय रूप से इस दिशा में काम करना होगा.”

क्लाइमेट रिस्क होराइजन्स का कार्य उन प्रणालीगत जोखिमों को उजागर करता है जो विघटनकारी जलवायु परिवर्तन निवेशकों, ऋणदाताओं और अवसंरचना निवेशों के लिए पैदा करता है. जलवायु नीति, ऊर्जा अवसंरचना और विनियामक प्रक्रियाओं की समग्र समझ पर आधारित डेटा-संचालित, शोध-उन्मुख दृष्टिकोण के माध्यम से, CRH ऐसी जोखिम प्रबंधन रणनीतियों पर सलाह प्रदान करता है जो जलवायु परिवर्तन के दौर में फंसे हुए और गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों तथा आर्थिक व्यवधान को कम करने में मदद कर सकें.

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