समस्तीपुर : 17 अगस्त, 2026 से पेपरलेस रजिस्ट्री प्रणाली लागू होने के बाद जमीन निबंधन की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने की सरकारी मंशा पर सवाल उठने लगे हैं। नयी व्यवस्था के विरोध में निबंधित दस्तावेज लेखक (कातिब) हड़ताल पर हैं। उनका कहना है कि पेपरबेस निबंधन प्रणाली को समाप्त करने से सरकार के राजस्व के साथ-साथ निबंधित दस्तावेज लेखकों को भी आर्थिक नुकसान हो रहा है। व्यवस्था में पैदा हुई तकनीकी और प्रक्रियागत जटिलताओं का फायदा भू-माफिया, दलाल और बिचौलिये उठा रहे हैं।
पेपरलेस प्रणाली में निबंधित कातिब पवन कुमार मिश्रा, अशोक कुमार, राजेश कुमार झा, जीवछ कुमार झा, मो. रिजवान, अशोक कुमार झा का आरोप है कि इस पेपरलेस व्यवस्था में आम क्रेता-विक्रेता को पूरी प्रक्रिया की जानकारी नहीं होने तथा कातिबों की हड़ताल के कारण बिचौलियों पर निर्भरता बढ़ गयी है। खासकर, जमीन के दस्तावेज तैयार कराने से लेकर निबंधन की प्रक्रिया तक में सक्रिय दलाल कथित रूप से क्रेता को लाभ पहुंचाने के लिए दस्तावेजों और लेन-देन की प्रक्रिया में ऐसी हेराफेरी कराते हैं, जिसका खामियाजा विक्रेता को भुगतना पड़ सकता है।
इससे, जमीन के वास्तविक सौदे, शर्तों और भुगतान को लेकर भविष्य में विवाद की आशंका भी बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि हाल में पेपरलेस निबंधन के दौरान एक निबंधन में एक क्रेता को 1760 वर्गफीट प्रति कट्ठा के हिसाब से जमीन पोजीशन करा दिया गया, लेकिन केवाला के वक्त बिचौलिए द्वारा 1900 वर्गफीट प्रति कठ्ठा चढ़वा दिया। जिससे, विक्रेता को करीब दो धुर का नुकसान हुआ। इसी तरह, एक अन्य रजिस्ट्री में रजिस्ट्री स्थल रोसड़ा की जगह किशनपुर चढ़वा दिया गया। हाल में हुए एक अन्य निबंधन में भी एक क्रेता की यादव जाति की जगह दूसरी जाति चढ़वा दिया गया। परेशान व्यक्ति सोमवार को शिकायत करने जिला अवर निबंधक के पास पहुंच गया।
इस तरह से निबंधन कार्यालय पर सक्रिय भू -माफिया व बिचौलिए निबंधन अपने आर्थिक लाभ के लिए अक्सर कुछ न कुछ हेराफेरी करवा ही रहे हैं। कातिबों के विरोध के बीच जमीन की खरीद-बिक्री से जुड़े लोगों का कहना है कि रजिस्ट्री कार्यालय के आसपास सक्रिय बिचौलियों की भूमिका पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गयी है। आम आदमी को ऑनलाइन प्रक्रिया, दस्तावेजों की तकनीकी जानकारी व निबंधन की औपचारिकताओं की पर्याप्त जानकारी नहीं होने का फायदा उठाकर दलाल अपना प्रभाव बढ़ा रहे हैं। कातिबों ने सरकार से पेपरलेस रजिस्ट्री प्रणाली की व्यवहारिक कमियों की समीक्षा करने, निबंधित दस्तावेज लेखकों की भूमिका स्पष्ट करने और आम क्रेता-विक्रेता के हित में व्यवस्था को सरल बनाने की मांग की है।
पेपरलेस निबंधन प्रणाली में कातिबों की भागीदारी नहीं होने से निबंधन में जो भी त्रुटियां या गड़बड़ी की जाती हैं, उसके लिए सीधा विक्रेता व क्रेता जिम्मेदार होते हैं। हम यह देखते हैं कि निबंधन में मिलने वाले राजस्व में कमी तो नहीं की गई है। गड़बड़ी के बाद शिकायत उनके पास आने पर सुधार कराया जाता है, जिसके लिए अलग से सरकारी शुल्क देने होते हैं। यह सही है कि पहले से राजस्व कम हो गया है।
अमित कुमार मंडल, जिला अवर निबंधक, समस्तीपुर
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