Samastipur

समस्तीपुर : मां ने बेटे की जान बचाने के लिए दे दी अपनी किडनी, फिर भी नहीं बचा पाई जान, 15 लाख कर्ज लेकर कराया था किडनी ट्रांसप्लांट

समस्तीपुर : बेटे की जिंदगी बचाने के लिए मां ने अपनी एक किडनी तक दान कर दी। परिवार ने इलाज के लिए करीब 15 लाख रुपये कर्ज लेकर जुटाए। जब दोबारा इलाज के लिए पैसे की जरूरत पड़ी तो स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया के माध्यम से मदद की गुहार लगाई गई। लोगों ने भी आगे बढ़कर करीब तीन लाख रुपये की आर्थिक मदद की। लेकिन जिंदगी और मौत से जूझ रहे 22 वर्षीय शिकास कुमार को आखिरकार बचाया नहीं जा सका। शनिवार शाम रास्ते में उसकी मौत हो गई। रविवार को एंबुलेंस से उसका पार्थिव शरीर विभूतिपुर प्रखंड के भुसवर पंचायत स्थित वार्ड संख्या-8 के गांव पहुंचा तो घर में चीख-पुकार मच गई।

सिरदर्द से शुरू हुई थी परेशानी, जांच में दोनों किडनियां खराब मिलीं :

परिजनों के अनुसार, प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे शिकास को शुरुआत में केवल सिरदर्द की शिकायत थी। बेगूसराय में एक निजी चिकित्सक से इलाज के दौरान जांच कराई गई तो पता चला कि उसकी दोनों किडनियां काम करना बंद कर चुकी हैं। परिवार पर मानो दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। बेटे की जिंदगी बचाने के लिए मां ने अपनी एक किडनी दान करने का फैसला लिया।

जून के दूसरे सप्ताह में हरियाणा के फरीदाबाद स्थित एशियन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड हॉस्पिटल में शिकास का किडनी ट्रांसप्लांट कराया गया। इलाज में परिवार की जमा-पूंजी खत्म हो गई और करीब 15 लाख रुपये खर्च हो गए। परिजनों ने रिश्तेदारों और अन्य माध्यमों से कर्ज लेकर इलाज का खर्च जुटाया।

दोबारा बिगड़ी तबीयत, मदद को आगे आए लोग :

ट्रांसप्लांट के कुछ ही सप्ताह बाद जुलाई के दूसरे सप्ताह में शिकास की तबीयत फिर बिगड़ने लगी। उसे तेज दर्द की शिकायत होने लगी। परिवार की आर्थिक स्थिति पहले ही कमजोर हो चुकी थी। ऐसे में स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया के माध्यम से इलाज के लिए मदद की अपील की गई। अपील के बाद कई लोगों ने क्यूआर कोड के माध्यम से करीब तीन लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी।

परिजन उसे बेहतर इलाज की उम्मीद में नई दिल्ली के कई अस्पतालों में लेकर पहुंचे, लेकिन उसकी गंभीर हालत को देखते हुए अस्पतालों में भर्ती नहीं हो सका। तमाम कोशिशों के बाद परिजन उसे लेकर वापस घर लौट रहे थे। इसी दौरान शनिवार की शाम रास्ते में ही शिकास ने दम तोड़ दिया।

बेटे का शव देखते ही बेसुध हुई मां, गांव में पसरा मातम :

रविवार को जब एंबुलेंस से शिकास का शव गांव पहुंचा तो परिजनों के सब्र का बांध टूट गया। जिस मां ने अपने बेटे की जिंदगी बचाने के लिए अपनी किडनी तक दे दी थी, उसी मां के सामने बेटे का शव पड़ा था। उसकी चीत्कार सुनकर आसपास मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं। पूरे गांव में मातम पसरा रहा।

ग्रामीणों ने नम आंखों से शिकास को अंतिम विदाई दी। स्थानीय मुखिया रंजीत कुमार महतो, पंसस निरंजन कुमार, डीवाईएफआई अंचल मंत्री बबलू कुमार, जिप सदस्य जितेंद्र राम, सीपीएम नेता विश्वनाथ महतो और एसएफआई के पूर्व जिलाध्यक्ष अवनीश कुमार ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर शोक संवेदना व्यक्त की और हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया।

Avinash Roy

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