Samastipur

बिहारियों को विदेश में नौकरी खोजने में मदद करेगी सरकार, स्किल इंडिया इंटरनेशनल से होगा बड़ा फायदा

विदेश में काम करने को इच्छुक बिहारियों को रोजी-रोजगार खोजने में युवा रोजगार एवं कौशल विकास विभाग सहयोग करेगा। इसके लिए विभाग ने स्किल इंडिया इंटरनेशनल की स्थापना करने का निर्णय लिया है। भारत सरकार के कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के सहयोग से खुलने वाले इस सेंटर के माध्यम से इच्छुक बिहारियों को विदेशों में काम मिल सकेगा। अधिकारियों के अनुसार इस केंद्र की सहायता से राज्य के युवाओं को वैश्विक मोबिलिटी पाथवे का सृजन होगा। बिहार राज्य ओवरसीज प्लेसमेंट ब्यूरो के तहत युवाओं को विदेशों में रोजगार मिल सकेगा।

इस केंद्र की विशेषता यह होगी कि खाड़ी सहयोग परिषद, यूरोप और पूर्वी एशिया सहित दुनिया के अन्य प्रमुख देशों में नैतिक एवं पारदर्शी प्लेसमेंट की व्यवस्था सुनिश्चित होगी। विदेश जाने वालों को अनिधकृत एजेंटों के पास नहीं जाना होगा। यह केंद्र ब्लू कॉलर और व्हाइट कॉलर दोनों तरह का रोजगार अवसर उपलब्ध कराएगा। ब्लू कॉलर में जो युवा शारीरिक श्रम व तकनीकी कौशल का काम करना चाहेंगे, उनको रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा, जबकि व्हाइट कॉलर में प्रशासनिक और बौद्धिक काम लोगों को दिलाए जाएंगे। इस केंद्र में प्रस्थान पूर्व अभिमुखीकरण प्रशिक्षण (पीडीओटी) भी होगा।

यानी बिहारी युवा दुनिया के जिस देश में जाना चाहेंगे, वहां के नियम-कानून सहित उनको केंद्र व राज्य सरकार की ओर से मिलने वाली तमाम योजनाओं की जानकारी दी जाएगी। संबंधित देशों के विधि, नियम, प्रवासी श्रमिकों के अधिकार, सांस्कृतिक समेकन तथा कार्यस्थल पर आचार संहिता से संबंधित पूरी जानकारी मिलेगी। साथ ही यह केंद्र अंतरराष्ट्रीय मांग के अनुरूप विदेशी भाषाओं में दक्षता और कौशल-विशिष्ट उन्नयन प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराएगा। विभागीय योजना के अनुसार बिहार से विदेश जाने वालों श्रमिकों का डिजिटल डाटा भी तैयार होगा। साथ ही चिकित्सकीय अनुमोदन और उनकी बीमा व अन्य सुरक्षात्मक कदम भी इस केंद्र के माध्यम से उठाए जाएंगे।

आवासीय विद्यालय खोलने की भी योजना

वहीं श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग पटना में एक आवासीय विद्यालय खोलने की योजना पर काम कर रहा है। कर्मकार कल्याण बोर्ड के अन्तर्गत निबंधित 45 लाख से अधिक कामगारों के बच्चों को श्रेष्ठ सुविधा देने को आवासीय विद्यालय खोलने की शुरुआत पटना से होगी, जिसका भविष्य में अन्य जिलों में विस्तार होगा। स्कूल का संचालन देश की नामी-गिरामी शैक्षणिक संस्था/समूह को दी जाएगी। निबंधित कामगारों के बच्चों को यहां नि:शुल्क शिक्षा दी जाएगी। देश के कई राज्यों में निबंधित मजदूरों के लिए इस तरह की योजना पर काम हो रहा है। एक जिले में कम से कम 500 बच्चों के रहने-खाने-पीने के साथ पढ़ने की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।

Avinash Roy

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