समस्तीपुर जिले के हर प्रखंड में एक सरकारी मॉडल विद्यालय खोलने की कवायद तेज

समस्तीपुर : समस्तीपुर जिले में कुल 20 मॉडल विद्यालय बनाने की कवायद तेज है। हर प्रखंड में एक-एक तथा जिले में कुल 20 मॉडल विद्यालय बनाने की प्रक्रिया जारी है। इन विद्यालयों में शिक्षकों के चयन के लिए डीडीसी की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय कमेटी शिक्षा विभाग से गठित की गई है। डीईओ इस कमेटी के सदस्य सचिव हैं। बाकी तीन सदस्यों में दो डीएम से नामित सदस्य तथा एक सदस्य ट्रेंनिग कॉलेज के प्रिंसिपल होंगे।
क्लास नौंवीं से दसवीं और ग्यारहवीं से बारहवीं स्तर वाले ये विद्यालय अलग तरह के विद्यालय होंगे, जो उच्च प्रदर्शन करने वाले विद्यालय के रूप में कार्य करेंगें। यहां विषय-विशेष में दक्ष, शैक्षणिक नवाचार में संवेदनशील व बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध शिक्षक होंगे। ये विद्यालय अपने प्रखंड में अन्य विद्यालयों के लिए अनुकरणीय उदाहरण पेश करेंगे, जिनका अनुकरण अन्य विद्यालय भी करेंगे तथा अपने विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा अपना सकें। मॉडल विद्यालय बनाने को लेकर माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने एसओपी (मानक संचालन प्रक्रिया ) जिला को जारी किया है।


मॉडल स्कूलों की तय की गई खास पहचान :
मॉडल विद्यालयों की एक विशेष पहचान भी तय की गई है। इन स्कूलों में पढ़ने वाले सभी छात्र-छात्रा एक समान पोशाक में नजर आएंगे। इस पोशाक का डिजाइन बिहार शिक्षा परियोजना परिषद द्वारा तैयार किया गया है। एक रूप ड्रेस से जहां अनुशासन और समानता का भाव विकसित होगा, वहीं दूर से ही यह पहचान हो सकेगी कि छात्र मॉडल विद्यालय का हिस्सा हैं। इससे इन स्कूलों की अलग पहचान बनेगी और अन्य विद्यालयों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेंगे।

चयनित विद्यालयों की आधारभूत संरचना को भी बेहतर बनाया जाएगा। जिन स्कूलों में भवन की स्थिति कमजोर है या मरम्मत की आवश्यकता है, वहां व्यापक सुधार कार्य किए जाएंगे। कक्षाओं की स्थिति, शौचालय, पेयजल, फर्नीचर और अन्य सुविधाओं को दुरुस्त कर विद्यालयों को आधुनिक रूप दिया जाएगा।
उदेश्य यह है कि छात्रों को बेहतर वातावरण मिले, जिससे उनकी पढ़ाई में रुचि बढ़े और परिणामों में भी सुधार आए। शिक्षा विभाग की यह पहल जिले में शिक्षा के स्तर को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। मॉडल विद्यालयों के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुशासन और आधुनिक सुविधाओं का समन्वय देखने को मिलेगा, जिससे सरकारी स्कूलों के प्रति अभिभावकों और छात्रों का विश्वास भी मजबूत होगा।





