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समस्तीपुर में भी चाय से लेकर नाश्ते तक महंगी होनी शुरू, LPG ने बिगाड़ा किचन का बजट, फूड स्टॉल और रेस्टोरेंट प्रभावित

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समस्तीपुर : गैस संकट के बीच अब उसका दूसरा असर भी दिखाई देने लगा है। आम उपभोक्ता जहां बुकिंग के लिए परेशान हैं। वितरण केंद्रों पर लगातार कतारें लग रही हैं। वहीं जुगाड़ से फूड स्ट्रीट चला रहे लोगों ने अचानक रेट बढ़ा दिए हैं। महंगी गैस की बात कहकर जिले के कई इलाकों में चाय तक के दाम बढ़ गए हैं। अब तक चाय का एक कप जो 10 रुपए में बिकता था, वह अब रविवार को कई दुकानों पर 12 से 14 रूपये कप का पहुंच गया है। ढाबों पर दाल फ्राई और रोटी के दाम भी बढ़ गए हैं। कमर्शियल गैस सिलेंडरों की सप्लाई बंद होने से जिले के ढाबों, होटलों और रेस्टोरेंट का काम प्रभावित होने लगा है। खाने-पीने की चीजों के दाम भी धीरे-धीरे बढ़ रहे हैं।

लकड़ी और कोयला के भी रेट बढ़ रहे :

गैस की सप्लाई कम होने के बाद लकड़ी और कोयला की अचानक मांग बढ़ने के कारण यह भी महंगा मिलने लगा है। ऐसे में होटल संचालकों को अपने मेन्यू की दरों में बदलाव करना पड़ रहा है। अधिकांश होटलों में खाने के प्रत्येक आइटम की कीमत में करीब 10 रुपये प्रति प्लेट की बढ़ोतरी की गई है, जबकि रोटी के दाम 2 से 3 रुपये तक बढ़ गए हैं। वहीं चाय के कप की कीमत भी 2 से 3 रुपये तक बढ़ गई है। एलपीजी सिलेंडर के वितरण में गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। जिसका असर मांगलिक कार्य व अन्य कार्यक्रमों में सहित रेस्टोरेंट कारोबार पर साफ दिखाई रहा है। कमर्शियल सिलेंडरों की कमी से दो-चार होना पर रहा है।

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कमर्शियल गैस की कमी के कारण कारीगर मजबूरन लकड़ी और कोयले के चूल्हे व भट्टियों का सहारा ले रहे हैं। जानकारी के अनुसार, लोग एक सिलेन्डर के 1000 रूपए एक्स्ट्रा देने को तैयार हैं, लेकिन सिलेंडर उपलब्ध नहीं है। शहर के ताजपुर रोड में कैटरिंग का काम करने वाले कारीगर अमित कुमार ने बताया कि अब लकड़ी की भट्ठियों का सहारा रह गया है। पेट्रोलियम उत्पादन में सर्वाधिक कालाबाजारी गैस पर ही हो रही जिसके चलते लोग गैस छोड़कर लकड़ी का सहारा तलाश रहे हैं।

नहीं मिल रहा कमर्शियल सिलेंडर :

स्टेशन रोड स्थित एक होटल संचालक शिवम कुमार ने बताया कि कमर्शियल सिलिंडर नहीं मिल रहा है। एजेंसी में पूछने जा रहे हैं, तो कहा जाता है कि आपूर्ति ही नहीं की जा रही है। ऐसे में घरेलू सिलिंडर से होटल में खाना पकाने की मजबूरी है। हालांकि, यह पा लेना भी इतना आसान नहीं है। वेंडर का फोन स्विच ऑफ है। इंडक्शन चूल्हे का इस्तेमाल कर रहे हैं। इंडक्शन में हर तरह का भोजन नहीं बन सकता। रोटी फुलाने के लिए गैस का इस्तेमाल करना ही पड़ता है। ज्यादा आंच से पकने वाले भोजन कम ही परोसे जा रहे हैं। पत्थर कोयला 22 से 25 और लकड़ी कोयला 50 रुपये तक मिल रहा है। कहा जा रहा है कि आगे कोयले के दाम भी बढ़ सकते हैं। मजबूरी में खाने-पीने के आइटम पर रेट बढ़ाना पड़ रहा है। अगर रेड नहीं बढ़ाएंगे तो नुकसान हो जाएगा और बिजनेस ठप्प पड़ जाएगा।

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जांच टीम कर रही छापेमारी :

जिले में घरेलू एलपीजी गैस सिलेंडरों के अवैध रूप से व्यावसायिक उपयोग पर रोक लगाने के लिए डीएम के निर्देश पर संयुक्त जांच टीमों का गठन किया गया है, जो लगातार अलग-अलग क्षेत्रों में छापेमारी में जुटी हुई है। टीम के द्वारा होटल, ढाबा, रेस्टोरेंट, मिठाई दुकान तथा अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में घरेलू गैस सिलेंडर के उपयोग की जांच की जा रही है। इसके लिए आपूर्ति विभाग, प्रशासनिक पदाधिकारियों और पुलिस की संयुक्त टीम बनाई गई है। टीम अपने-अपने निर्धारित क्षेत्रों में औचक निरीक्षण कर यह सुनिश्चित कर रही है कि घरेलू उपयोग के लिए निर्धारित एलपीजी सिलेंडरों का व्यावसायिक उपयोग न हो। टीम में हर थाना स्तर पर जिला प्रशासन के एक पदाधिकारी व थाना स्तर से एक पुलिस पदाधिकारी के अलावे चार-चार सिपाही शामिल है।

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