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समस्तीपुर : KYC अनिवार्यता व नए नियमों से गैस उपभोक्ताओं की बढ़ी परेशानी, गैस किल्लत की अफवाह के बीच नए नियम बने मुसीबत

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समस्तीपुर : रसोई गैस को लेकर इन दिनों उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ती जा रही है। ईरान – इजरायल युद्ध की चर्चा के बीच गैस की संभावित किल्लत की अफवाहों ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है। इसी बीच लागू किए गए नए नियमों ने आम उपभोक्ताओं की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। नए नियम के तहत अब रसोई गैस कनेक्शन के लिए केवाईसी कराना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके लिए उपभोक्ता को आधार कार्ड के साथ स्वयं गैस एजेंसी पर उपस्थित होना जरूरी है। यही नियम उन परिवारों के लिए बड़ी समस्या बन गया है, जिनके नाम पर कनेक्शन है लेकिन वे रोजगार के कारण बाहर रहते हैं। ऐसे में उनके परिजनों को बार-बार एजेंसी का चक्कर लगाना पड़ रहा है।

पहले उपभोक्ता रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से आसानी से गैस बुक करा लेते थे और सिलेंडर मिल जाता था, लेकिन अब केवाईसी नहीं होने पर बुकिंग में भी बाधा आ रही है। कई लोग आधार कार्ड लेकर एजेंसी पहुंच रहे हैं, लेकिन वास्तविक उपभोक्ता की अनुपस्थिति में उनका काम नहीं हो पा रहा है। इसको लेकर कई केंद्रों पर विवाद और हंगामे की स्थिति भी बन रही है।

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25 दिन बाद ही री-बुकिंग की शर्त से परेशानी :

नए प्रावधान के अनुसार अब गैस सिलेंडर की दोबारा बुकिंग 25 दिन बाद ही संभव है। ज्यादा सदस्यों वाले परिवारों का कहना है कि एक सिलेंडर इतने दिनों तक चलाना मुश्किल हो रहा है। ऐसे परिवारों को अतिरिक्त परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इन दिनों गैस एजेंसियों पर सर्वर डाउन की समस्या भी आम हो गई है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि जब वे सिलेंडर लेने जाते हैं तो सर्वर खराब होने की बात कहकर लौटा दिया जाता है। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि कथित गैस की कमी दिखाकर गैस की कालाबाजारी की जा रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि 1500 से 2000 रुपये तक में सिलेंडर ब्लैक में बेचे जा रहे हैं।

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ग्रामीण उपभोक्ता सबसे ज्यादा प्रभावित :

ग्रामीण क्षेत्रों में समस्या और गंभीर है। केवाईसी अपडेट नहीं होने के कारण बड़ी संख्या में कनेक्शन निष्क्रिय पड़े हैं। कई उपभोक्ताओं का रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर भी बदल चुका है, लेकिन अब नंबर अपडेट कराने में भी लगभग 45 दिन का समय लगने की बात कही जा रही है। बिना रजिस्टर्ड नंबर के बुकिंग संभव नहीं हो पा रही है। उपभोक्ताओं का कहना है कि पहले बुकिंग के तुरंत बाद डिलीवरी कोड मिल जाता था, लेकिन अब सर्वर की धीमी गति के कारण कई दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है। वहीं एजेंसी कर्मियों द्वारा मार्च क्लोजिंग का हवाला देकर भी उपभोक्ताओं को टालने की शिकायत मिल रही है। कुल मिलाकर नए नियम, केवाईसी की अनिवार्यता और तकनीकी समस्याओं के कारण गैस उपभोक्ताओं की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही है। उपभोक्ताओं ने प्रशासन से व्यवस्था में सुधार और राहत देने की मांग की है।

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नए कनेक्शन लेने वालों की संख्या बढ़ी, इंडक्शन चूल्हा भी बना विकल्प :

गैस की संभावित किल्लत के कारण कई परिवार वैकल्पिक कनेक्शन भी ले रहे हैं ताकि एक सिलेंडर खत्म होने पर दूसरे का उपयोग किया जा सके। इससे नए कनेक्शन की मांग में भी वृद्धि देखी जा रही है। गैस की कमी के बीच अब कई परिवार इंडक्शन चूल्हा की ओर भी रुख कर रहे हैं। बाजार में इंडक्शन चूल्हा की बिक्री बढ़ गई है और लोग इसे गैस के विकल्प के रूप में अपना रहे हैं। खासकर शहरी क्षेत्रों में इसका उपयोग तेजी से बढ़ा है। सरकार द्वारा 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली मिलने की सुविधा से भी लोगों को इंडक्शन चूल्हा अपनाने में राहत मिल रही है। जिन घरों में बिजली की उपलब्धता बेहतर है वहां लोग गैस की जगह इंडक्शन पर खाना बनाना शुरू कर चुके हैं।

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