वर्णांधता के बावजूद रंगों से गढ़ी पहचान, मिथिला पेंटिंग से रोजगार सृजन में जुटे समस्तीपुर के चर्चित कुंदन कुमार रॉय

समस्तीपुर : जिले के युवा कलाकार व उद्यमी कुंदन कुमार रॉय इन दिनों मिथिला पेंटिंग को नए आयाम देने में जुटे हैं। वर्णांधता जैसी चुनौती के बावजूद उन्होंने रंगों की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है और न सिर्फ खुद को स्थापित किया है, बल्कि अन्य कलाकारों को भी आत्मनिर्भर बनने की राह दिखा रहे हैं। होली पर्व को लेकर इस वर्ष उन्होंने विशेष रूप से कुर्ते-कुर्तियां डिजाइन किए हैं, जिन पर आकर्षक मिथिला पेंटिंग के साथ ‘ मैथिल हैं तो मैथिल पहनें ‘ का स्लोगन दिया गया है। उनके डिजाइन किए गए परिधानों को लोगों की अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है। लोग न केवल खरीदारी कर रहे हैं, बल्कि बड़ी संख्या में देखने भी पहुंच रहे हैं। हाल ही में यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के एलडीएम पी.के. सिंह के ऑर्डर पर भी उन्होंने विशेष कुर्ते डिजाइन किए।
कुंदन का मानना है कि मिथिला पेंटिंग केवल कला नहीं, बल्कि मान, सम्मान और गौरव की पहचान है। वे लगातार नवाचार करते हुए अन्य उत्पादों में भी मिथिला पेंटिंग को जोड़कर इसे व्यावसायिक रूप दे रहे हैं। कुंदन कलाकारों को डिजिटल मार्केटिंग के माध्यम से वैश्विक बाजार तक पहुंचने के लिए प्रेरित करते हैं। उनका कहना है कि कलाकार भावुक होते हैं और अक्सर अपने भविष्य की बजाय भावनाओं को प्राथमिकता देते हैं, जबकि खरीदार सस्ता, सुंदर और यूनिक उत्पाद चाहता है। कई बार लोग फ्री सैंपल या उपहार की अपेक्षा रखते हैं, जिससे कलाकारों का मनोबल टूटता है। इन चुनौतियों के बावजूद वे लगातार कलाकारों को व्यावसायिक दृष्टिकोण अपनाने के लिए मार्गदर्शन दे रहे हैं। उनकी उपलब्धियां भी उल्लेखनीय रही हैं।

मतदाता जागरूकता पर बनाई गई उनकी एक मिथिला पेंटिंग को निर्वाचन विभाग ने आइकॉन के रूप में अपनाया था। इस कार्य के लिए उन्हें बिहार सरकार के मुख्य सचिव दीपक कुमार द्वारा राज्य स्तरीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। कोरोना जागरूकता पर बनाई गई 108 मिथिला पेंटिंग्स गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज हो चुकी हैं। छठ पूजा के लिए बनाए गए उनके विशेष सूप देश-विदेश में चर्चित रहे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुंचे। हाल ही में उन्हें बिहार सरकार के उद्योग मंत्री नीतीश मिश्रा द्वारा उद्यमिता सम्मान 2025 से भी सम्मानित किया गया। कुंदन कुमार रॉय का कहना है कि वे चाहते हैं हर कलाकार मान-सम्मान और प्रतिष्ठा के साथ समाज में अपनी पहचान बनाए तथा अपने हुनर के दम पर अपनी हैसियत मजबूत करे। मिथिला पेंटिंग को नए उत्पादों और बाजार से जोड़कर वे इसी दिशा में निरंतर प्रयासरत हैं।






