मधुमक्खी पालन से किसानों की आय दोगुनी करने पर जोर, केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा में 3 दिन की ट्रेनिंग शुरू

समस्तीपुर : डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा में मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इस प्रशिक्षण में 50 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया, जहां वैज्ञानिकों द्वारा मधुमक्खी पालन की आधुनिक तकनीकों का प्रदर्शन किया गया तथा आवश्यक उपकरणों के उपयोग की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम का आयोजन सहायक प्राध्यापक डॉ. मोहित कुमार के नेतृत्व में किया गया, जबकि मंच संचालन डॉ. रमणदीप सिंह ने किया। अंत में डॉ. नागेंद्र कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस अवसर पर डॉ. पुष्पा सिंह, डॉ. शिवपूजन सिंह, डॉ. कुमार राज्यवर्धन सहित कई वैज्ञानिक मौजूद रहे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. पीएस पांडेय ने कहा कि मधुमक्खी पालन एक लाभकारी स्वरोजगार है, जिसे अपनाकर किसान अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं। उन्होंने किसानों को वैज्ञानिक पद्धति से मधु उत्पादन करने तथा ब्रांडिंग और मूल्य संवर्धन पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय मधुमक्खी पालकों की आय दो से तीन गुना तक बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है।

निदेशक अनुसंधान डॉ. एके सिंह ने कहा कि प्रशिक्षण के माध्यम से प्रतिभागियों को उन्नत तकनीकों की जानकारी दी जा रही है, ताकि वे अपने मधुमक्खी पालन व्यवसाय को और अधिक लाभकारी बना सकें। डीन पीजीसीए डॉ. मयंक राय ने कहा कि मधुमक्खी पालन से न केवल आय बढ़ती है, बल्कि फसलों के परागण में मदद मिलने से कृषि उत्पादन में भी वृद्धि होती है।
वहीं निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. रत्नेश झा ने मधुमक्खी पालन के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की। निदेशक एग्री-बिजनेस डॉ. रामदत्त ने कहा कि किसानों को उत्पादन के साथ-साथ विपणन और व्यवसायिक रणनीतियों की भी जानकारी होनी चाहिए, तभी वे अधिक मुनाफा कमा सकते हैं। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को मधुमक्खी पालन से जुड़े व्यावहारिक पहलुओं की भी जानकारी दी गई, जिससे वे इसे सफल व्यवसाय के रूप में अपना सकें।






