बिहार में नई सरकार के गठन के स्वरूप को लेकर जदयू के भीतर कई तरह की दावेदारी और चर्चाएं चल रही हैं। जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा ने एक दिन पहले भले ही यह कहा कि अभी यह तय नहीं है कि एनडीए के किस घटक दल के नेता को मुख्यमंत्री बनाया जाएगा, लेकिन यह लगभग तय माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री पद भाजपा को जाएगा। एनडीए की बैठक की औपचारिकता अभी शेष है। यदि भाजपा का मुख्यमंत्री बनता है, तो परिस्थितियां कुछ इस तरह बदल सकती हैं कि जदयू के दो उपमुख्यमंत्री हों।
यह तर्क दिया जा रहा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यकाल में पिछले कुछ वर्षों से भाजपा के दो उपमुख्यमंत्री रहे हैं। ऐसे में जदयू भी दो उपमुख्यमंत्री पदों पर अपनी दावेदारी करेगा। जदयू से दो उपमुख्यमंत्री कौन होंगे, इस पर अभी से ही दो नामों की चर्चा शुरू हो गई है। इनमें पहला नाम विजय चौधरी का है और दूसरा नाम निशांत कुमार का। यह फाॅर्मूला वर्तमान सरकार की तरह ही सामाजिक संतुलन के आधार पर देखा जा रहा है, जहां एक उपमुख्यमंत्री अगड़ी जाति से और दूसरा पिछड़ा वर्ग से होता है। विजय चौधरी अगड़ी जाति से हैं, जबकि निशांत कुमार पिछड़ा वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं।
उपमुख्यमंत्री के दो पदों के साथ-साथ जदयू की दावेदारी विधानसभा अध्यक्ष पद पर भी मानी जा रही है। वर्तमान में जदयू के मुख्यमंत्री होने के कारण विधानसभा अध्यक्ष भाजपा से हैं। ऐसे में यदि मुख्यमंत्री भाजपा का होता है, तो जदयू स्वाभाविक रूप से विधानसभा अध्यक्ष पद पर दावा करेगा। 2020 से पहले हमेशा विस अध्यक्ष का पद जदयू के पास ही रहा था। इसके अलावा गृह मंत्री का पद भी नए सिरे से तय होगा। लंबे समय तक एनडीए सरकार में गृह विभाग का जिम्मा नीतीश कुमार के पास रहा, लेकिन इस समय यह विभाग उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के पास है।
ऐसे में जदयू गृह विभाग पर भी अपनी दावेदारी कर सकता है। चर्चा है कि यदि विजय चौधरी उपमुख्यमंत्री बनते हैं, तो उन्हें गृह विभाग की जिम्मेदारी मिल सकती है। एनडीए की बैठक से पहले जदयू नेताओं के बीच नई सरकार के स्वरूप को लेकर विभिन्न स्तरों पर विमर्श जारी है। मिली जानकारी के अनुसार 26 मार्च के बाद नीतीश कुमार की मौजूदगी में जदयू की कोर कमेटी भी नई सरकार की संभावनाओं पर बैठक करेगी। यह भी कहा जा रहा है कि Nitish Kumar की सहमति के बिना नई सरकार के स्वरूप को मंजूरी नहीं मिलेगी। कॉमन मिनिमम प्रोग्राम के तहत ‘सात निश्चय-3’ को नई सरकार की प्राथमिकता में रखने पर भी सहमति बननी है।
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