समस्तीपुर के पशुपालक ध्यान दें! इस दिन मुर्रा समेत उन्नत नस्ल की भैंस की होने वाली है नीलामी

समस्तीपुर : अधिक दूध उत्पादन के लिए डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा लगातार उन्नत नस्लों की गाय और भैंस का इजाद कर रही है। साथ ही इसे आम पशुपालकों के लिए उपलब्ध भी करवा रही है। इसी कड़ी में समस्तीपुर में मुर्रा समेत कई उन्नत नस्ल की भैंस की नीलामी शुरू होने वाली है। केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पशु पक्षेत्र के अधीक्षक और इस नीलामी के सदस्य सचिव सुनील कुमार ने संबंध में पत्र भी जारी किया है। जिसमें बताया गया है कि विश्विद्यालय के पशु उत्पादन शोध संस्थान के अंतर्गत पाले जाने वाली कई बेहतर उन्नत नस्ल की करीब 57 भैंसों की नीलामी की जाएगी।
इस नीलामी प्रक्रिया में सबसे ज्यादा दूध देनेवाली मुर्रा नस्ल की भैंसे भी उपलब्ध है। पत्र के मुताबिक इच्छुक पशुपालकों को विश्वविद्यालय प्रशासन की तरफ से जारी नीलामी प्रक्रिया में शामिल होना होगा। साथ ही इस टेंडर प्रक्रिया में शामिल होने वाले पशुपालकों को किसान होने का प्रमाणपत्र भी देना होगा। इसके आवेदन की आखिरी तारीख 16 फरवरी तय की गई है। इस नीलामी में शामिल होने वाले किसानों को संस्थान की तरफ से जारी गाइडलाइन के तहत पहले 5000 का बैंक ड्राफ्ट जमा करना पड़ेगा।

पूसा में नीली-रावी नस्ल :
समस्तीपुर में डॉ. राजेंद्र प्रसाद सेंट्रल एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी पूसा ने कई उन्नत नस्लों का इजाद किया है। जिनमें नीली-रावी शामिल है। जल्द ही इसकी नीलामी होगी, ताकि पशुपालक डेयरी फार्मों में इस नस्ल की भैंस का पालन कर अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं। यहां मुर्रा नस्ल की भैंस की भी नीलामी प्रक्रिया शुरू हो गई है। अधिक दूध उत्पादन के लिए हमारे यहां भैंस की कई उन्नत नस्लें हैं। इनमें मुर्रा की डिमांड सबसे अधिक होती है। इसके अलावे जाफराबादी, नीली-रावी और सुरती भी उन्नत नस्लें मानी जाती है।
पशु विशेषज्ञों के मुताबिक मुर्रा जहां 1678 किग्रा दूध देती है, वहीं जाफराबादी 2150 किग्रा और सुरती 1400 किग्रा दूध देती है।जानकार कहते हैं कि भैंस पालन बेहद की लाभदायक व्यवसाय है। कम देखभाल में अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है। मुर्रा, जाफराबादी या सुरती जैसी नस्लों का चयन कर अगर पशुपालन किया जाए तो कम समय में अच्छी आमदनी प्राप्त की जा सकती है।






