Samastipur

जीवन कौशल से लेकर माहवारी स्वच्छता तक, समस्तीपुर में शिक्षकों को दी गई विशेष ट्रेनिंग

समस्तीपुर : किशोरी छात्राओं के सर्वांगीण विकास, स्वास्थ्य जागरूकता और सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। बिहार शिक्षा परियोजना परिषद, समग्र शिक्षा एवं यूनिसेफ के संयुक्त तत्वावधान में शहर के आरएसबी के इंटर विद्यालय के सभाकक्ष में शनिवार को कक्षा 9 से 12 की छात्राओं हेतु संचालित एडोलेसेंट प्रोग्राम फॉर गर्ल्स अंतर्गत एकदिवसीय गैर-आवासीय नोडल शिक्षकों का प्रशिक्षण आयोजित किया गया।

कार्यक्रम का उद्घाटन डीपीओ एसएसए जमालुद्दीन, प्रसिद्ध स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. श्रेयसी, प्रधानाध्यापक ललित घोष तथा राज्य मास्टर ट्रेनर सुभीत कुमार सिंह ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।

उद्घाटन अवसर पर डीपीओ एसएसए जमालुद्दीन ने कहा कि किशोरावस्था जीवन का संवेदनशील दौर है, जिसमें छात्राओं को सही मार्गदर्शन और वैज्ञानिक जानकारी की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में नोडल शिक्षक छात्राओं के लिए विश्वास का केंद्र बनें और उन्हें स्वास्थ्य, पोषण, आत्मविश्वास तथा कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करें।

प्रशिक्षण सत्र में स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. श्रेयसी ने किशोरावस्था के शारीरिक एवं मानसिक परिवर्तन, एनीमिया, संतुलित आहार, आयरन की आवश्यकता तथा माहवारी स्वच्छता पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मासिक धर्म एक प्राकृतिक प्रक्रिया है और इससे जुड़ी भ्रांतियों को दूर करना आवश्यक है।

प्रशिक्षणार्थियों के प्रश्नों का समाधान करते हुए उन्होंने विद्यालय स्तर पर किशोरियों को होने वाली समस्याओं और उनके व्यावहारिक निराकरण पर प्रकाश डाला। राज्य मास्टर ट्रेनर सुभीत कुमार सिंह ने जीवन कौशल, निर्णय क्षमता, संवाद तकनीक और आत्मविश्वास निर्माण पर प्रभावशाली प्रस्तुति दी। उन्होंने कहा कि नोडल शिक्षक सक्रिय श्रवण, गोपनीयता और संवेदनशील व्यवहार अपनाकर छात्राओं का भरोसा जीत सकते हैं।

इस अवसर पर रिसोर्स पर्सन शुभांगी कुमारी, सलाहकार प्रकाश कुमार तथा डॉली मिश्रा ने माहवारी स्वच्छता, किशोरावस्था की मनोवैज्ञानिक चुनौतियों और जीवन मूल्यों पर विस्तार से चर्चा की। संभाग प्रभारी सुजीत कुमार, तकनीकी सहायक सह शिक्षक ऋतुराज जायसवाल, अर्चना कुमारी सहित अन्य शिक्षकों ने भी अपने विचार रखे।

सभी विद्यालयों में स्थापित होगी ‘सखी सहायता डेस्क’ :

प्रशिक्षण के समापन पर विभाग द्वारा सभी प्रशिक्षणार्थियों को उनके-उनके विद्यालयों के लिए ‘सखी सहायता डेस्क’ हेतु एक-एक बैनर तथा आवश्यक सामग्री से युक्त मेडिकल किट उपलब्ध कराया गया। निर्देश दिया गया कि प्रत्येक उच्च विद्यालय में सखी सहायता डेस्क की स्थापना सुनिश्चित कर किशोर छात्राओं को नियमित रूप से प्रशिक्षित किया जाए।

बताया गया कि सखी सहायता डेस्क छात्राओं के लिए सुरक्षित एवं सहयोगी मंच के रूप में कार्य करेगा, जहां वे स्वास्थ्य, माहवारी, एनीमिया, मानसिक तनाव, लैंगिक समानता और व्यक्तिगत समस्याओं पर खुलकर संवाद कर सकेंगी। मेडिकल किट के माध्यम से प्राथमिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी तथा नोडल शिक्षक उनकी समस्याओं का संवेदनशील समाधान करेंगे।

Avinash Roy

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