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फर्जी पुलिस मित्र बहाली मामले में समस्तीपुर में भी छापेमारी, थाने में मिलती थी जॉब की गारंटी, चौकीदार तक फंसे, कई थानाध्यक्षों की भूमिका संदिग्ध… 

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समस्तीपुर : मोतिहारी में फर्जी पुलिस मित्र बहाली मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए गुरूवार को एसआईटी की टीम ने समस्तीपुर में भी छापेमारी की। इसमें फरार चल रहे पटोरी के धर्मेंद्र कुंवर की तलाश में छापेमारी की गई है। धर्मेंद्र कुंवर पर पुलिस ने 10 हजार रुपये के इनाम की घोषणा भी की हुई है। हालांकि इस छापेमारी के संबंध में समस्तीपुर पुलिस के कोई भी पुलिस पदाधिकारी बकुछ भी बताने से इंकार कर रहे हैं।

इस मामले में मोतिहारी पुलिस ने अब तक दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि अन्य संदिग्धों से पूछताछ जारी है। इससे पहले एसआईटी ने समस्तीपुर के साथ मोतिहारी, पटना के दीघा, आशियाना, बिहटा, वैशाली, मुजफ्फरपुर में भी छापेमारी की। जांच में सामने आया था कि डीजीपी के नाम से फर्जी पत्र जारी कर मोतिहारी में 42 युवकों को पुलिस मित्र के रूप में बहाल किया गया था। इसके बदले उनसे लाखों रुपये की ठगी की गई थी। पुलिस कई अहम सुरागों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही है। फर्जी पुलिस मित्र के जारी पहचान पत्र पर मुंबई का पता दर्ज पाया गया था।

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डीजीपी के फेक पत्र के नाम पर झांसा :

नौकरी की तलाश में भटक रहे युवकों के लिए यह प्रस्ताव किसी सुनहरे मौके से कम नहीं था। भरोसा जीतने के लिए ठग ने बेहद सोची-समझी चाल चली। उसने कथित तौर पर डीजीपी के नाम लिखा गया एक पत्र दिखाया, जिस पर रिसीविंग होने का दावा किया गया। इसके बाद युवकों को यह यकीन दिलाने के लिए कि प्रक्रिया असली है, उन्हें अलग-अलग थानों के नाम पर पुलिस मित्र बनाकर थाना परिसर में आई-कार्ड पहनाया गया।

अरेराज की महिला थानाध्यक्ष पर भी आरोप लगे हैं कि उन्होंने एक रिटायर्ड चौकीदार के बेटे को इस बहाली के लिए तैयार किया। बताया जा रहा है कि अरेराज थाना से सेवानिवृत्त तीन चौकीदारों के बेटों से 20-20 हजार रुपये लिए गए, जबकि कुल 60 हजार रुपये प्रति युवक की मांग थी। शेष राशि वेतन शुरू होने के बाद देने की बात कही गई। पीड़ितों का आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया में थानाध्यक्ष की सहमति भी जताई गई थी।

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वेतन शुरू होने का झांसा दिया जाता रहा :

सिर्फ अरेराज ही नहीं, बल्कि घोड़ासहन, पलनवा और गोविंदगंज के युवक भी इस ठगी का शिकार बने। युवकों से पैसे लेने के बाद कई महीनों तक उन्हें वेतन शुरू होने का झांसा दिया जाता रहा। कभी बैंक पासबुक मांगा जाता, तो कभी मुजफ्फरपुर के एक होटल में बुलाकर आश्वासन दिया जाता कि जल्द सब ठीक हो जाएगा। मामला तब गंभीर हुआ, जब युवकों को शक हुआ और शिकायत सामने आई। मोतिहारी के एसपी स्वर्ण प्रभात ने बताया कि कोटवा थाने में इस कथित ठग के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। साथ ही एएसपी के नेतृत्व में एक एसआईटी का गठन किया गया है, जो पूरे मामले की जांच कर रही है।

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