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समस्तीपुर में एडोलेसेंट प्रोग्राम फॉर गर्ल्स विषय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम का किया गया आयोजन

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समस्तीपुर : शहर के आरएसबी इंटर विद्यालय के सभागार में इक्विटी कार्यक्रम के तहत एडोलेसेंट प्रोग्राम फॉर गर्ल्स विषय पर एक दिवसीय गैर आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। समस्तीपुर, शिवाजीनगर,पूसा सहित अन्य प्रखंडों से आए शिक्षिकाओं को संबोधित करते हुए डीपीओ एसएसए जमालुद्दीन ने कहा कि किशोरावस्था जीवन का एक संवेदनशील दौर होता है, एक ऐसा समय जब कई महत्वपूर्ण सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और जैविक घटनाएँ घटित होती हैं जो वयस्कता की नींव रखती हैं।

इस दौरान, लड़कियों को अक्सर ऐसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है जो उन्हें कई क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने से रोकती हैं। इसके अलावा, लैंगिक भेदभाव, यौन उत्पीड़न, तस्करी, बाल विवाह, किशोरावस्था में गर्भावस्था आदि जैसी समस्याएं आजकल तेजी से आम होती जा रही हैं। संभाग प्रभारी सह एपीओ सुजीत कुमार ने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य किशोरियों की सामाजिक कौशल की समझ को बेहतर बनाना, स्वास्थ्य संबंधी जानकारी और सेवाओं तक उनकी पहुंच बढ़ाना, शिक्षा जारी रखने के अवसरों को बढ़ाना और उनके समुदायों में भागीदारी और नेतृत्व के अवसरों को बढ़ाना है।

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मास्टर ट्रेनर सुभीत कुमार सिंह ने कहा कि यह कार्यक्रम शिक्षा, जीवन कौशल, यौन स्वास्थ्य, मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता, नेतृत्व, पोषण, लिंग और आजीविका जैसे आवश्यक क्षेत्रों में लड़कियों के ज्ञान को बढ़ाने और मजबूत करने पर भी ध्यान केंद्रित करता हैह वरीय शिक्षक सह एचएम रणजीत कुमार ने कहा कि मासिक धर्म आज भी एक ऐसा विषय है जिस पर चुप्पी साधी जाती है, जहाँ लड़कियों और महिलाओं को इस बारे में खुलकर बात करने से हतोत्साहित किया जाता है। इस चुप्पी के साथ-साथ, इससे जुड़े कई सामाजिक कलंक, अंधविश्वास और रूढ़ियाँ भी मौजूद हैं।

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एचएम सौरभ कुमार ने कहा कि किशोरावस्था शारीरिक, भावनात्मक और सामाजिक परिवर्तन का एक महत्वपूर्ण समय है। लड़कियों को उनके अधिकारों को समझने और हानिकारक सांस्कृतिक मानदंडों को चुनौती देने में मदद करना। चिकित्सक डॉ. श्रेयसी ने कहा कि छात्राओं में मासिक धर्म (पीरियड्स) 9-14 साल की उम्र (औसतन 12 वर्ष) के बीच शुरू होने वाली एक सामान्य जैविक प्रक्रिया है, जो शरीर के परिपक्व होने का संकेत है। इसमें गर्भाशय की परत हर महीने टूटकर ब्लीडिंग के रूप में बाहर निकलती है, जो आमतौर पर 3-5 दिन चलती है। शुरुआत में पीरियड्स अनियमित हो सकते है।

ट्रेनर कुमारी शुभांगी व डाॅली मिश्रा ने कहा कि किशोरावस्था जीवन का वह महत्वपूर्ण चरण है जिसमें व्यक्ति शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रूप से विकसित होता है। यह समय सही मार्गदर्शन और समर्थन से व्यक्ति के उज्जवल भविष्य की नींव रखता है. इसलिए, परिवार और समाज का कर्तव्य है कि वे किशोरों को समझें और उनका सही मार्गदर्शन करें।

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अधिवक्ता प्रकाश कुमार ने कहा कि आज की निरंतर बदलती डिजिटल दुनिया में, किशोरों का मस्तिष्क नई तकनीक के अनुकूल ढलने के लिए अच्छी तरह से तैयार होता है और बदले में अनुभवों से आकार लेता है। प्राचार्य डॉ. ललित कुमार घोष ने कहा कि 11 से 18 वर्ष के बीच ही पिटयूट्री ग्रंथि से इस्ट्रेजन एवं प्रोजेस्टेरोन हार्मोस निकलते हैं, जिससे शारीरिक व मानसिक परिवर्तन होते हैं। मौके पर शिक्षक ऋतुराज जयसवाल, राहुल कुमार, अर्चना कुमारी आदि मौजूद थे।

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