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समस्तीपुर सदर अस्पताल में सिजेरियन से ज्यादा नॉर्मल प्रसव, नार्मल डिलीवरी से बढ़ा भरोसा, हर माह 800 से ज्यादा डिलीवरी

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समस्तीपुर : इन दिनों सदर अस्पताल से एक अच्छी खबर सामने आ रही है। अस्पताल में तैनात महिला रोग विशेषज्ञों की प्रयास के कारण सिजेरियन प्रसव की संख्या में काफी कमी आई है। सदर अस्पताल में पिछले पांच माह से सिजेरियन से ज्यादा नॉर्मल प्रसव ही कराया जाता है। अस्पताल में हर माह औसतन 800 से अधिक प्रसव हो रहे हैं, जिनमें 40 से 50 सिजेरियन ऑपरेशन शामिल हैं, बाकी सामान्य तरीके से प्रसव होता है। यह जानकारी सदर अस्पताल के डीएस डॉ. गिरीश कुमार के द्वारा दी गई। अस्पताल के डीएस ने बताया कि बीते माह भी 800 के करीब डिलीवरी कराई गई, जिसमें 750 सामान्य प्रसव और 45-50 के करीब सिजेरियन डिलीवरी हुई।

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सिजेरियन ऑपरेशन के लिए प्रसव वार्ड में चार गायनोलॉजिस्ट तैनात है, जिसमें डॉ. अदिती प्रियदर्शनी, डॉ. मंजुला भगत, डॉ. लवली राय, डॉ. प्रज्ञा प्रियदर्शी शामिल है। इसके साथ ही प्रसव के लिए ऑक्सीजन युक्त बेड भी उपलब्ध हैं, जिससे जटिल मामलों में भी समय पर इलाज संभव हो पा रहा है। अगले कुछ दिनों में सदर अस्पताल में मातृ एवं शिशु अस्पताल (एमसीएच) भी शुरू हो रहा है। 100 बेड के इस भवन के संचालन से गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को बेहतर चिकित्सीय सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा।

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नवजात शिशुओं के इलाज के लिए एसएनसीयू (विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई) की सुविधा भी उपलब्ध है, जहां गंभीर अवस्था में जन्मे बच्चों का समुचित उपचार किया जा रहा है। इसे भी अब एमसीएच भवन में शिफ्ट कर दिया जाएगा। प्रसव के बाद महिलाओं को पौष्टिक आहार के लिए निर्धारित राशि दी जाती है। ग्रामीण क्षेत्र की लाभुक महिलाओं को 1400 रुपये तथा शहरी क्षेत्र की लाभुक महिलाओं को 1000 रुपये की राशि उनके बैंक खाते में भेजी जाती है। साथ ही जननी जीविका दीदी रसोई के माध्यम से सस्ता और पौष्टिक भोजन भी उपलब्ध कराया जाता है। प्रसव के बाद प्रसूताओं को 48 घंटे तक अस्पताल में निगरानी में रखा जाता है, ताकि किसी भी प्रकार की जटिलता से बचा जा सके।

सामान्य प्रसव से सदर अस्पताल के प्रति लोगों का बढ़ रहा भरोसा :

मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य किसी भी समाज की बुनियादी जरूरतों में से एक है। गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित और समय पर चिकित्सा सेवा मिलें, यह सुनिश्चित करना सरकार और स्वास्थ्य तंत्र की प्राथमिकता होनी चाहिए। हाल के वर्षों में सरकार द्वारा इस दिशा में कई ठोस कदम उठाए गये हैं, जिनके सकारात्मक परिणाम अब जमीन पर दिखने लगा है। समस्तीपुर का सदर अस्पताल इसकी जीवंत मिसाल बन चुका है, हर दिन यहां दर्जनों की संख्या में नवजातों की किलकारियां गूंज रही है।

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सदर अस्पताल डीएम डॉ. गिरीश कुमार ने बताया कि सदर अस्पताल की एक बड़ी उपलब्धि यह रही कि अधिकतर प्रसव सामान्य तरीके से सफलतापूर्वक कराये गये। केवल एक-दो मामलों में ही रेफर करने की जरूरत पड़ी, जिससे यह स्पष्ट होता है कि अस्पताल में जटिल परिस्थितियों से निपटने की पूरी तैयारी मौजूद है। साथ ही जरूरतमंद मामलों में हर महीने करीब 40 से 50 महिलाओं का सिजेरियन ऑपरेशन भी सफलतापूर्वक किया जाता है, जो अस्पताल की चिकित्सा विशेषज्ञता और संसाधनों की क्षमता को दर्शाता है।

उन्होंने बताया कि अस्पताल में प्रसव से जुड़ी सभी मूलभूत और विशेष सुविधाएं 24 घंटे उपलब्ध हैं और चार गाइनिक डॉक्टरों, नर्सों और सहयोगी कर्मचारियों की टीम हर समय ड्यूटी पर रहती है, ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। उन्होंने बताया कि आशा कार्यकर्ताओं द्वारा लगातार गांव-गांव जाकर जागरूकता अभियान चलाया जाता है, जिससे गर्भवती महिलाओं को संस्थागत प्रसव के प्रति प्रोत्साहित किया जाता है। यही कारण है कि अब महिलाएं अस्पताल में प्रसव को प्राथमिकता देने लगी हैं।

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एमसीएच भवन जच्चा-बच्चा के लिये होगी संजीवनी :

डीएस ने बताया कि मातृ-शिशु अस्पताल में सिर्फ प्रसव ही नहीं, बल्कि प्रसवोत्तर देखभाल और नवजात शिशु के टीकाकरण की भी पूरी व्यवस्था है। बच्चों को जन्म के तुरंत बाद बीसीजी, हेपेटाइटिस बी और ओपीवी के टीका की व्यवस्था एक ही भवन में होगी। सदर अस्पताल में माताओं को आयरन, कैल्शियम और अन्य जरूरी दवाएं निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं। इसके अलावा अस्पताल में प्रसव पूर्व जांच (एएनसी) की सुविधा, अल्ट्रासाउंड, ब्लड प्रेशर, हीमोग्लोबिन और शुगर के जांच जैसी व्यवस्था भी उपलब्ध हैं, ताकि प्रसव से पहले ही संभावित जोखिमों को पहचाना जा सके। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिले में 24 घंटे एम्बुलेंस सेवा सुनिश्चित की गयी है. आशा कार्यकर्ता समय पर महिलाओं को अस्पताल पहुंचाने में मदद करती हैं, जिससे कई जिंदगियों को सुरक्षित किया जा सका है. प्रसव के बाद महिलाओं को परिवार नियोजन के उपायों के प्रति भी जागरूक किया जाता है।

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बयान :

महिला रोग विशेषज्ञों की सतत निगरानी और टीमवर्क के कारण अस्पताल में सामान्य प्रसव की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि जटिल मामलों में सिजेरियन की समुचित व्यवस्था मौजूद है और अगले कुछ दिनों में एमसीएच भवन के शुरू होने से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं और बेहतर होंगी।

डॉ. गिरीश कुमार, डीएस, सदर अस्पताल, समस्तीपुर

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