समस्तीपुर : वाया नदी रूठीं तो उनकी कलकल निर्मल जलधारा हुई दूषित, नदी से प्राप्त होने वाले सीप की कमी से पटोरी में बटन कारखाना भी पड़ा बंद

समस्तीपुर : मानव द्वारा प्रकृति से किए गए छेड़छाड़ के कारण जब वाया नदी रूठीं तो उनकी कलकल निर्मल जलधारा इस कदर दूषित हो गईं कि अब आम लोग तो दूर किसान अपने पशुओं को भी उस गंदे पानी में स्नान कराने से दूर भागते हैं। नदी के बिगड़ते स्वरूप का सीधा प्रभाव आम जनजीवन पर भी पड़ा है। नदी के सूखने के कारण जैव विविधता पर व्यापक प्रभाव पड़ा है। पटोरी क्षेत्र के वाया नदी से प्राप्त सीप की उपलब्धता के कारण कभी शाहपुर पटोरी में सीप के बटन का कारखाना हुआ करता था परंतु अब वह कारखाना पूरी तरह बंद हो चुका है।
आज से लगभग चार दशक पूर्व पटोरी एवं उसके आसपास के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर घोंघे एवं सीप के कवच को बड़ी भट्ठियों पर गलाकर पान एवं तंबाकू में खाया जाने वाला शुद्ध चूना तैयार किया जाता था। अब यह व्यवसाय पूरी तरह बंद हो चुका है। पूर्व के दशक में जब शहर का कचरा इस नदी में प्रवाहित किया जाता था तो तेज जलधारा के कारण तब इसका अधिक असर नजर नहीं आता था। अब जब शहर का कचरा नदी में डाला जा रहा है तो वह एक जगह स्थिर रह जाता है। जिसके कारण पानी पूरी तरह विषाक्त हो चुका है।

पानी में टॉक्सिक पदार्थ की मात्रा बढ़ जाने से उपयोगी बैक्टीरिया समाप्त हो गए हैं और उसमें तरह-तरह के हानिकारक सूक्ष्मजीव पैदा हो गए हैं। नदी के वजूद समाप्त होने का सीधा असर सामाजिक रूप से भी पड़ा है। मछुआरे बताते हैं कि पानी के अत्यधिक दूषित हो जाने के कारण उसमें मछलियां या अन्य जीव मर जाते हैं। ऐसी स्थिति में नदियों पर उनकी निर्भरता पूरी तरह समाप्त हो चुकी हैं। सच यह है कि नदी जल के दूषित होने के कारण पानी में टॉक्सिक पदार्थ की मात्रा बढ़ गई है।

इसके कारण जलीय जीवों की मौत होने लगी है। स्थिर जल में शैवाल की विभिन्न प्रजातियां बड़ी मात्रा में उग आती हैं। यह श्वसन की क्रिया में जलीय ऑक्सीजन अवशोषित कर लेती हैं। जिससे जल में ऑक्सीजन की कमी हो जाती हैं जिससे जल का रासायनिक स्वरूप बिगड़ गया है। परिणामत: जलीय जीवों की मौत तेजी से होने लगी है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि अब भी सरकार इस गंभीर समस्या के प्रति सजग नहीं हुई तो आने वाले वर्षों में इस नदी का वजूद पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। इसका सीधा असर मानव जीवन पर पड़ेगा।





