Samastipur

पहले खुद अफसर बने, फिर पत्नी को बनाया अधिकारी, समस्तीपुर के नये DDC सूर्य प्रताप सिंह और कल्पना रावत की प्रेरक कहानी

समस्तीपुर : यूपीएससी की तैयारी अक्सर एकाकी संघर्ष मानी जाती है, लेकिन कुछ कहानियां इस धारणा को तोड़ देती हैं। ऐसी ही एक कहानी है समस्तीपुर के नये डीडीसी आईएएस अधिकारी सूर्य प्रताप सिंह और उनकी पत्नी कल्पना रावत की जिसमें सफलता किसी एक की नहीं बल्कि दोनों की साझी मेहनत का परिणाम है। बिहार के प्रशासनिक क्षेत्र में सूर्य प्रताप सिंह और कल्पना रावत की जोड़ी एक प्रेरणा का स्रोत बन चुकी है।

सूर्य प्रताप सिंह 2021 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। वहीं, उनकी पत्नी कल्पना ने 2023 UPSC परीक्षा में आईएएस बनने का सपना पूरा किया। दोनों का सफर संघर्ष, समर्थन और समर्पण से भरा है। सूर्य उत्तर प्रदेश के बरेली से हैं, जबकि कल्पना हरियाणा के सोनीपत जिले के जज्जल गांव की रहने वाली हैं। उनकी कहानी बताती है कि पति-पत्नी मिलकर कैसे सपनों को हकीकत में बदल सकते हैं।

उत्तर प्रदेश के बरेली निवासी सूर्य प्रताप सिंह ने वर्ष 2021 में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में 258वीं रैंक हासिल की थी। सेलेक्शन के बाद उन्हें बिहार कैडर मिला और वर्तमान में वे समस्तीपुर जिले में डीडीसी के पद पर कार्यरत हैं। इससे पहले वे कैमूर में डीडीसी के रूप में भी अपनी सेवाएं दे रहे थे। प्रशासनिक सख्ती और विकास कार्यों के लिए उनकी पहचान बनी है।

हरियाणा के सोनीपत जिले के जज्जल गांव में जन्मी कल्पना रावत की परवरिश दिल्ली के नजफगढ़ में हुई। पढ़ाई के दिनों से ही उनमें नेतृत्व क्षमता दिखने लगी थी। स्कूल में हाउस कैप्टन रहीं कल्पना एनएसएस से भी जुड़ी रहीं। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के दौलत राम कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस में स्नातक की पढ़ाई पूरी की। यूपीएससी का सफर उनके लिए आसान नहीं रहा। चार बार असफल होने के बाद कल्पना लगभग टूट चुकी थीं। कई बार लगा कि शायद यह रास्ता उनके लिए नहीं है। लेकिन, यहीं से उनकी कहानी ने नया मोड़ लिया।

जब पति बने कोच और मार्गदर्शक :

सूर्य प्रताप सिंह ने न सिर्फ एक जीवनसाथी की भूमिका निभाई, बल्कि कल्पना के लिए ‘पर्सनल मेंटर’ भी बने। सरकारी आवास में फाइलों और प्रशासनिक काम के बीच वे कल्पना के लिए नोट्स तैयार करते, उत्तर लेखन की बारीकियां समझाते और सिलेबस को रणनीति में बदलते रहे। कठिन विषयों पर देर रात तक चर्चा होती थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सूर्य प्रताप ने कल्पना को वही तकनीकें सिखाईं जो उन्होंने खुद यूपीएससी में अपनाई थीं। यही सहयोग कल्पना के आत्मविश्वास की सबसे बड़ी ताकत बना।

पांचवें प्रयास में बड़ी सफलता :

लगातार प्रयासों और रणनीतिक तैयारी के बाद कल्पना रावत ने अपने पांचवें प्रयास में सफलता हासिल की। उन्होंने यूपीएससी 2023 की परीक्षा पास की और यूपीएससी 2024 में 76वीं रैंक प्राप्त की। दिलचस्प बात यह है कि उनकी रैंक उनके पति से बेहतर रही। ट्रेनिंग पूरी करने के बाद वे भी आईएएस अधिकारी के रूप में प्रशासनिक सेवा में शामिल होंगी।

CDS से UPSC तक संघर्ष की समानता :

कम लोग जानते हैं कि सूर्य प्रताप सिंह का चयन यूपीएससी के साथ-साथ कंबाइंड डिफेंस सर्विस (CDS) की फ्लाइंग ब्रांच में भी हुआ था। हैदराबाद में ट्रेनिंग के दौरान गंभीर चोट लगने के कारण उन्हें 2017 में ट्रेनिंग छोड़नी पड़ी। यह झटका भी उन्हें रोक नहीं सका और उन्होंने सिविल सेवा में खुद को साबित किया। सूर्य प्रताप और कल्पना की यात्रा सिखाती है कि सही साथी और निरंतर मेहनत से असंभव भी संभव हो सकता है।

प्रशासनिक गलियारों में रोल मॉडल जोड़ी :

आज सूर्य प्रताप सिंह और कल्पना रावत को बिहार के प्रशासनिक गलियारों में ‘पावर कपल’ के रूप में देखा जाता है। यह जोड़ी बताती है कि प्रतियोगी परीक्षा केवल किताबों से नहीं, बल्कि सही माहौल, सहयोग और मानसिक मजबूती से भी जीती जाती है। यह कहानी उन हजारों अभ्यर्थियों के लिए प्रेरणा है जो असफलता से डरकर पीछे हटने का मन बनाते हैं।

Avinash Roy

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