Samastipur

समस्तीपुर : पाला गिरने से आलू की फसल पर झुलसा रोग का प्रकोप, कृषि वैज्ञानिक और विशेषज्ञों ने क्या कुछ कहा, पढ़ें…

समस्तीपुर : आलू की फसल झुलसा रोग के प्रति काफी संवेदनशील होती है। आलू की फसल को सर्वाधिक नुकसान भी इसी रोग से पहुंचता है। आलू की फसल में यह रोग आम तौर पर दिसंबर और जनवरी के पहले सप्ताह में लगता है। कृषि वैज्ञानिक और विशेषज्ञों की मानें तो आलू के फसल में झुलसा रोग के लगने से पूर्व और रोग लगने के तत्काल बाद किया जाने वाला प्रबंधन ही इस फसल को बचाने का एक मात्र कारगर और महत्वपूर्ण उपाय हैं। बिहार के किसान इस रोग का ससमय और उचित प्रबंधन कर इस रोग से होने वाली क्षति को कम कर सकते है। ये जानकारी कृषि विज्ञान केंद्र बिरौली के हेड सह वरीय कृषि वैज्ञानिक डॉ. आरके तिवारी ने दी है।

उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में वातावरण में व्याप्त अत्यधिक नमी आलू की फसल में झुलसा रोग के प्रकोप को काफी तेजी से फैला सकते है। ऐसी परिस्थिति में आलू की अच्छी पैदावार के लिए किसानों को हर हाल में समय से पूर्व से ही रक्षात्मक तरीका अपनाना चाहिए। संक्रमण दिखने पर खेतों में फेनोमेडोन व मैंकोजेब वाली दवाओं का फसल पर करें छिड़काव कृषि वैज्ञानिक ने बताया कि आलू की फसल को झुलसा रोग से बचाने के लिए रोग लगने से पहले (निवारक उपाय) के रूप में खेत में जल निकासी की समुचित व्यवस्था रखें और नाइट्रोजन उर्वरकों का अत्यधिक प्रयोग न करें, क्योंकि इससे पत्तियां अधिक कोमल हो जाती हैं जो रोग के प्रति संवेदनशील होती हैं। जैसे ही वातावरण में नमी बढ़े या बादल छाने लगें, सुरक्षात्मक दृष्टि से मैंकोजेब या क्लोरोथैलोनिल जैसी दवाओं का 0.2% यानि 2 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करें ताकि फंगस के बीजाणु पनप न सकें।

फसल में अंतराल पर हल्की हल्की सिंचाई करते रहे। यदि खेत में झुलसा के लक्षण दिखाई दें तो तुरंत सुरक्षात्मक दवाओं को रोककर अंतः प्रवाही कवकनाशियों का प्रयोग करना चाहिए। इसके लिए मेटालैक्सिल एवं मैंकोजेब 2.5 ग्राम प्रति लीटर या साइमोक्सानिल एवं मैंकोजेब 2.5 ग्राम प्रति लीटर की दर से छिड़काव करना अत्यंत प्रभावी होता है। यदि संक्रमण का दबाव बहुत अधिक हो तो फेनोमेडोन एवं मैंकोजेब का उपयोग करें। छिड़काव करते समय ध्यान रखें कि घोल पत्तियों के निचले हिस्से तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि किसानों को हर हाल में प्रत्येक दिन खेतों पर जाकर आलू की फसल का गंभीरता से निरीक्षण करते रहना चाहिए।

Avinash Roy

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