समस्तीपुर : समस्तीपुर जिले के उजियारपुर प्रखंड में प्रखंड कार्यालय और आवासीय भवन को लेकर गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। आश्चर्य की बात यह है कि प्रखंड को अब तक स्थायी भवन नसीब नहीं हुआ, लेकिन मरम्मत और सौंदर्यीकरण के नाम पर पिछले विगत 8 वर्षों में कुल 87 लाख रुपये से अधिक की राशि खर्च कर दी गई। इसके अलावे, वर्तमान बीडीओ अमित कुमार ने 15वीं वित्त आयोग की मद से आवास और कार्यालय परिसर की मरम्मत, रंग-रोगन, चारदीवारी, टाइल्स, किचन-बाथरूम निर्माण, सीसीटीवी कैमरा व स्ट्रीट लाइट लगाने जैसी कुल दस योजनाएं चलाईं। इनमें से छह योजनाएं सीधे तौर पर बीडीओ आवास से जुड़ी थीं। इन योजनाओं पर लगभग 55 लाख रुपये का प्रावधान किया गया, जिसमें से 40 लाख रुपये से अधिक की राशि का भुगतान भी हो चुका है।
बीडीओ ने 15वीं वित्त आयोग की मद से आवास मरम्मती व जीर्णोद्धार पर 55 लाख रुपये खर्च कर दिए। डाटा के अनुसार आवासीय भवन में किचन सह बाथरूम के निर्माण पर 5 लाख रुपये, आवासीय परिसर के भूमि विकास पर 3 लाख रुपये, स्ट्रीट लाइट पर 5 लाख रूपये, ब्लॉक कैंपस में सीसीटीवी कार्य के लिए 2 लाख, आवास व कार्यालय परिसर में फाल्स सिलिंग के लिये 5 लाख रूपये, आवासीय परिसर में टाइल्स कार्य के लिए 4 लाख रुपये, आवासीय परिसर में रंग-रोगन के लिये 3 लाख रुपये, आवास की मरम्मती के लिये 15 लाख रुपये, आवासीय परिसर में बाउंड्री वाल के लिए 10 लाख रुपये, आवासीय परिसर में फेवर ब्लॉक के कार्य के लिए 3 लाख रुपये खर्च किये गये। कुल मिलाकर 2025-25 में 15वीं वित्त में 55 लाख रुपये खर्च कर दिए गये।
समाजसेवी अनील कुमार का कहना है कि अलग-अलग कार्यों के लिए अलग-अलग योजनाएं बनाकर मोटी रकम खर्च की गई। कई जगहों पर आधे-अधूरे काम दिखाकर निकासी कर ली गई, वहीं कम कीमत की सामग्रियों को ऊंचे बिल में दिखाया गया। योजना प्रक्रिया में क्रय समिति तक का गठन नहीं किया गया, जिससे पूरी पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। गौरतलब है कि इससे पहले भी वर्ष 2017-18 में चतुर्थ वित्त आयोग से 10 लाख रुपये, 2019-20 में 10.86 लाख रुपये और 2021-22 में षष्ठम वित्त आयोग से 11 लाख रुपये बीडीओ आवास की मरम्मत व निर्माण कार्य पर खर्च किए जा चुके हैं। इसके बावजूद एक बार फिर भारी भरकम बजट निकालकर काम कराया गया।
मामले पर विवाद बढ़ने के बाद बीडीओ अमित कुमार ने तीन महीने की छुट्टी ले ली, लेकिन छुट्टी के दौरान ही जुलाई माह में शेष भुगतान भी कर दिया। छुट्टी के बाद वित्त प्रभार प्रभारी बीडीओ सह सीओ आकाश कुमार को मिल गया। अब इस पूरे मामले की शिकायत समाजसेवी अनिल कुमार ने अधिकारियों से की है। शिकायत के आधार पर डीएम ने जांच का जिम्मा डीआरडीए निदेशक आशुतोष आनंद को सौंपा है।
जांच के दौरान बीडीओ अनुपस्थित रहे और पत्राचार के बावजूद उन्होंने अपना पक्ष नहीं रखा। प्रारंभिक तथ्यों को देखते हुए यह साफ प्रतीत हो रहा है कि मरम्मत और सौंदर्यीकरण के नाम पर करोड़ों की सरकारी राशि का बंदरबांट किया गया है। जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। सबसे बड़ी बात यह है की उजियारपुर प्रखंड कार्यालय के ही एक संविदाकर्मी शंकर रजक को बीडीओ ने योजना का अभिकर्ता बनाकर उससे कई वाउचर पर हस्ताक्षर करवाकर बिल भी पास करवा लिया।
वहीं पूछे जाने पर संविदाकर्मी शंकर रजक ने बताया कि उन्हें बीडीओ जिस कागजात पर हस्ताक्षर करने को कहा वहां-वहां उसने हस्ताक्षर कर दिये। उसे इस बारे में कोई भी जानकारी नहीं है की वह किस प्रकार के कागजात थे। इधर बीडीओ अमित कुमार से फोनिंग संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाया।इस संबंध में डीएम रोशन कुशवाहा ने बताया कि बीडीओ आवासीय परिसर के जीर्णोद्धार के लिए 15वीं वित्त योजना से 55 लाख रुपये खर्च करने के मामले की जांच शुरू कर दी गई है। एडीएम को जांच का जिम्मा सौंपा गया है।
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