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समस्तीपुर सदर अस्पताल बना दलालों का अड्डा, मरीजों को निजी अस्पताल भेजकर की जा रही मोटी कमाई

दलालों व कुछ कर्मियों की मिलीभगत से होता है रेफर का खेल 
सदर अस्पताल में है सारी सुविधाएं, लेकिन नहीं हो पाता है समुचित इलाज
निजी अस्पतालों द्वारा सैलरी देकर सदर अस्पताल में तैनात किया जाता है दलाल

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समस्तीपुर : सदर अस्पताल दलालों का अड्डा बना हुआ है। यहां सक्रिय दलाल कुछ अस्पताल कर्मियों की मिलीभगत से मरीजों को झांसा देकर निजी अस्पतालों में रेफर करवा रहे हैं। इसके एवज में मरीजों से मोटी रकम ऐंठी जा रही है। दलालों पर अंकुश लगाने को लेकर कुछ महीनों पूर्व सदर अस्पताल प्रबंधन द्वारा खानापूर्ति करते हुए अस्पताल परिसर में एक बैनर भी लगाया गया था, जिसमें लिखा गया था कि दलालों से सावधान रहें।

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अगर कोई दलाल दिखाई दे तो तुरंत अस्पताल के प्रबंधक, डीएस और सिविल सर्जन को तुरंत संपर्क कर जानकारी दें। लेकिन सबसे बड़ी बात है कि पूरे अस्पताल परिसर में 100 से अधिक गार्ड की तैनाती की गई है। सुरक्षा को लेकर प्रति माह लाखों रुपये खर्च होता है। जगह-जगह 30 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, उसके बावजूद अस्पताल प्रबंधन उन दलालों पर कार्रवाई करने या उसके अस्पताल में इंट्री पर रोक लगा पाने और उसे पकड़ने में विफल साबित हो रही है।

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स्थानीय लोगों का कहना है कि जैसे ही कोई मरीज अस्पताल पहुंचता है, दलाल तुरंत उसे घेर लेते हैं। मरीज और परिजनों को यह कहकर डराया-धमकाया जाता है कि यहां सही इलाज संभव नहीं है। इसके बाद निजी अस्पतालों में भेज दिया जाता है और मोटा कमीशन दलालों व कर्मियों तक पहुंच जाता है। दलालों का जाल रजिस्ट्रेशन काउंटर से लेकर, लैब, अल्ट्रासाउंड, सिटी स्कैन, एक्स-रे रूम, डिलीवरी रूम, इमरजेंसी रूम से लेकर डॉक्टर के चेम्बर तक बिछा हुआ है। शहर में बिना रजिस्टर्ड कई निजी अस्पताल और जांच घर चल रहे हैं, जिनके द्वारा मरीजों का आर्थिक शोषण किया जाता है। इन अस्पतालों व नर्सिंग होम पर कारवाई करने में स्वास्थ्य विभाग बिल्कुल बिफल साबित हो रही है।

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निजी एंबुलेंस भी रहती हैं खड़ी :

सदर अस्पताल परिसर के बाहर अक्सर निजी एंबुलेंस वाहनों की लाइन लगी रहती है। गोली लगने या गंभीर चोट जैसे मामलों में मरीज को तुरंत रेफर कर दिया जाता है। जबकि सदर अस्पताल में दो-दो सर्जन मौजूद हैं और आवश्यक सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। बावजूद इसके दलालों व कुछ कर्मियों की मिलीभगत से रेफर का खेल लगातार जारी है। ऐसा नहीं है की सिविल सर्जन या फिर सदर अस्पताल प्रबंधन को इस पूरे बातों की जानकारी नहीं है, जानकारी होने के बावजूद उन बिचौलियों पर कार्रवाई ना करना स्वास्थ्य विभाग की संवेदनहीनता को दर्शाती है।

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ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को आसानी से करा लेते हैं रेफर :

सदर अस्पताल में जिले के तमाम बीमार लोग अपना इलाज कराने आते हैं। लेकिन, यहां दलालों का जमावड़ा लगना कोई नयी बात नहीं है। निजी क्लीनिक और निजी जांच केंद्र वाले अपने दलालों को सदर अस्पताल में सैलरी देकर बैठा कर रखते हैं। जिनका काम होता है देहाती क्षेत्रों से आए भोले-भाले लोगों को बहला-फुसलाकर निजी अस्पताल और निजी जांच केंद्र ले जाना। ऐसे में अस्पताल प्रशासन सहित जिला प्रशासन को भी एक बड़ी कार्रवाई करने की जरूरत है। जिससे आम लोगों को राहत मिल सके।

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बयान :

सदर अस्पताल परिसर में दलालों की गतिविधियों की शिकायतें संज्ञान में आई हैं। अस्पताल प्रबंधन मरीजों की सुविधा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सतर्क है। सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त किया जा रहा है तथा सीसीटीवी से भी मॉनिटरिंग की जा रही है। किसी भी प्रकार की दलाली या अवैध रेफरल में संलिप्त पाए जाने वाले व्यक्तियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मरीजों से अपील है कि वे किसी भी संदिग्ध व्यक्ति की सूचना तत्काल अस्पताल प्रबंधन को दें।

डाॅ. गिरीश, डीएस, सदर अस्पताल समस्तीपुर

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