मोहनपुर में जमीन विवाद के दौरान जब्त चार बाइकों में एक थी विक्रम गिरि की, चार दिन बाद सांस रूकने तक ताबड़तोड़ गोली मारकर कर दी गई ह’त्या

समस्तीपुर : शहर में जमीन का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। लगातार नई कॉलोनियां बस रही हैं, जिससे जमीन की कीमतें आसमान छू रही हैं। इसी कारण भूमि विवाद में लगातार अपराध की घटनाएं सामने आ रही हैं। रजिस्ट्री से लेकर कब्जेदारी तक का यह खेल अब रंगदारी और गोलीबारी के सहारे चल रहा है। बीते 16 अगस्त को मुफ्फसिल थाना क्षेत्र के मोहनपुर में जमीन विवाद को लेकर दो पक्ष आमने-सामने आ गए थे। हालांकि पुलिस की तत्परता से स्थिति संभाल ली गई और बड़ी घटना टल गई।
इस दौरान 13 लोगों की गिरफ्तारी हुई थी तथा चार बाइक जब्त की गई थी। इनमें एक उजले रंग की अपाचे बाइक बिक्रम गिरी की थी। इसी बिक्रम गिरी की 21 अगस्त को उजियारपुर थाना क्षेत्र के माधोडीह में ताबड़तोड़ गोली मारकर हत्या कर दी गई। जब्त बाइक के आधार पर आशंका जताई जा रही है कि मोहनपुर की घटना के दौरान वह भी मोहनपुर में मौजूद था। इधर पुलिस ने इस मामले की तह तक पहुंचने के लिए जेल में बंद एक कुख्यात अपराधी से पूछताछ की है।

सूत्रों के अनुसार यह भी आशंका जतायी जा रही है कि माधोडीह स्थित विक्रम गिरि के आवास पर हाल के दिनों में कई लोगों का आना जाना शुरू हो गया था, जिसमें कई ऐसे लोग भी शामिल थे, जो हत्याकांड मामले में जेल जा चुके थे। इस बीच एक जनप्रतिनिधि को शक हुआ की विक्रम गिरि उसके हत्या को लेकर साजिश रच रहा है। इसी शक में जेल में बंद एक अपराधी से साठगांठ कर उक्त सफेदपोश ने विक्रम गिरि के हत्या की प्लानिंग बना दी, और घटना को अंजाम दिलवा दिया। हालांकि यह बात सिर्फ चर्चा का विषय है, पुलिस हर एंगल से जांच में जुटी हुई है। इधर विक्रम गिरि के भी जेल में बंद एक अपराधी से साठगांठ हो गयी थी, जो उक्त सफेदपोश को नागवार गुजर रही थी।

बता दें कि गुरुवार की दोपहर विक्रम गिरी बाइक से सातनपुर चौक से घर लौट रहा था। इसी दौरान मोटर साइकिल पर आए 3 बदमाशों ने विक्रम पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। गोली विक्रम के पैर, पेट और कनपटी में लगी। वह भागते हुए एक घर के पास अमरूद के पेड़ के नीचे गिर गया, जहां उसकी मौत हो गई। गोलियों की आवाज सुनकर लोग घटनास्थल की ओर दौड़े लेकिन तब तक बदमाश फरार हो चुके थे।

बता दें कि बदमाश विक्रम गिरि को घेरकर कई मिनट तक गोलियों की बौछार करते रहे। जब उन्हें लग गया कि अब विक्रम की मौत हो गई तब वो वहां से फरार हुए। पुलिस के अनुसार, विक्रम का भी आपराधिक इतिहास रहा है। इलाके के चर्चित फर्नीचर व्यवसायी नेपाली चौधरी हत्याकांड में भी वह आरोपी था। इसके अलावे उसके उपर अन्य मामले भी दर्ज थे। हाल ही में वह जेल से छुटकर बाहर आया था। मृतक के अपराधिक इतिहास के कारण उसके कई दुश्मन हो सकते हैं। पुलिस हर एंगल से अलग-अलग जांच में जुटी हुई है।





