नागपंचमी पर समस्तीपुर में लगा सांपो का मेला, बच्चे-बूढ़े और जवान सांपो के साथ करते है करतब

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समस्तीपुर : समस्तीपुर के विभूतिपुर थाना क्षेत्र के सिंघिया घाट में नागपंचमी पर सांपों का ऐसा मेला लगता है जिसे देखकर आप हैरान रह जाएंगे। सांप को देखकर जंहा अच्छे-अच्छों के होश उड़ जाते है। वहां इस मेले में भगत के साथ-साथ बच्चे – युवा से लेकर बूढ़े तक गले में सांप लपेटे खेलते करते नज़र आते है। इसको लेकर महीनों पहले सांपों के पकड़ने का सिलसिला शुरू होता है जो नागपंचमी के दिन तक चलता है।
नागपंचमी को भगत राम कुमार महतों सहित अन्य लोग माता विषहरी का नाम लेकर विषैले सांपों को मुंह में पकड़कर घंटों विषहरी माता का नाम लेते हुए करतब करते है। सैकड़ों की संख्या में लोग हाथ में सांप लिए बूढ़ी गंडक नदी के सिंघियाघाट पुल घाट पहुंच नदी में प्रवेश करने के बाद माता का नाम लेते हुए दर्जनों सांप निकालते है। इस दौरान नदी के घाट पर मौजूद भक्त नागराज और विषधर माता के नाम की जयकारा लगाते है।

पूजा के बाद सांपों को जंगल में छोड़ दिया जाता है। यह मेला मिथिला का प्रसिद्ध मेला है। यहां नाग देवता की पूजा की परम्परा सैकड़ों साल से चली आ रही है। यहां मूलत: गहवरों में बिषहरा की पूजा होती है। महिलाएं अपने वंश वृद्धि की कामना को लेकर नागदेवता की विशेष पूजा करती हैं। मन्नत पूरी होने पर नाग पंचमी के दिन गहवर में झाप और प्रसाद चढ़ाती है।

यहां पूजा करने के लिए समस्तीपुर जिले के अलावा खगड़िया, सहरसा, बेगूसगू राय, मुजफ्फरपुर जिले के भी लोग आते हैं। मंगलवार को सैकड़ों की संख्या में भगत हाथ में सांप लिए बूढ़ी गंडक नदी के सिंघियाघाट पुल घाट पहुंचकर सांप निकाला। साथ ही साथ पूजा भी की। यहां की मान्यता के अनुसार, विषधर माता सभी की इच्छाएं पूरी करती हैं।पूजा करने के बाद सांपों को जगल में छोड़ दिया जाता है।

स्थानीय लोगों ने बताया कि यह मेला मिथिला का प्रसिद्ध मेला है। यहां नाग देवता की पूजा की सैकड़ों साल से चली आ रही है। यह परंपरा विभूतिपुर में आज भी जीवंत है। यहां मूलत: गहवरों में बिषहरा की पूजा होती है। यहां की श्रद्धालु महिलाएं अपने वंश वृद्धि की कामना को लेकर नागदेवता की विशेष पूजा करती हैं। महिलाएं नागों का वंश बढ़ने की भी कामना करती है। मन्नत पूरी होने पर नाग पंचमी के दिन गहवर में झाप और प्रसाद चढ़ाती है। लोगों का कहना है कि यहां मेले की शुरुआत सौ साल पहले से ही चली आ रही है।
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