समस्तीपुर : जिले के 17 वर्षीय रामजी राज की कहानी एक छोटे शहर के बड़े सपनों की मिसाल बन चुकी है। उन्होंने कोविड लॉकडाउन में यूट्यूब पर पायथन कोडिंग सीखने से लेकर भारत मंडपम आयोजित में स्टार्टअप महाकुंभ में अपने स्टार्टअप को पेश कर देशभर के निवेशकों को प्रभावित किया। हाल ही में, रामजी ने नासा की साइट में तकनीकी खामी पहचानी और वेबसाइट हैक सीधे नासा को इसकी रिपोर्ट मेल कर दी।
रामजी राज का (AI-based AgriTech Startup) एआइ आधारित स्टार्टअप ‘फार्मआइ’ (FarmAI) भारतीय कृषि को ऑटोमेट करने की दिशा में काम कर रहा है। इसका उद्देश्य सिर्फ मवेशियों की पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक ऑल-इन-वन डिजिटल केयरटेकर सिस्टम की तरह काम करता है। रामजी कहते हैं, ‘इंडिया का कोई किसान अगर आज 5 गाय संभाल पाता है, तो फार्मआइ की तकनीक से वह 500 गायों को भी संभाल सकता है। यह सिर्फ गिनती नहीं करता, बल्कि पशुओं की निगरानी, स्वास्थ्य, मूवमेंट, व्यवहार और रोगों की भविष्यवाणी में मदद करता है।
रामजी बताते हैं कि अमेरिका की फार्म टेक्नोलॉजी बहुत आगे है। वहां क्लाउड-बेस्ड डेटा, सेंसर और कैमरे हर पल जानवरों और फसलों की निगरानी करते हैं। लेकिन भारत के अधिकतर किसान आज भी मैन्युअल तरीके से काम करते हैं। न तो उनके पास डेटा होता है, न ही रीयल-टाइम मॉनिटरिंग की सुविधा। इंडिया की डेयरी और मिल्क इंडस्ट्री ब्लाइंडली ऑपरेट कर रही है। गाय की तबीयत कैसी है, दूध पीने लायक है या नहीं। यह कोई नहीं जानता। हमारी तकनीक हर पशु की डेली हेल्थ रिपोर्टिंग करती है। इससे हम ‘हमपी वायरस’ जैसे मामलों को पहले ही ट्रैक कर सकते हैं।
दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित स्टार्टअप महाकुंभ में रामजी ने अपने स्टार्टअप को पेश किया। अपने कम लागत वाले समाधान, ग्रामीण भारत में उपयोगिता और मजबूत तकनीकी आधार के चलते उनका प्रोजेक्ट निवेशकों को खासा पसंद आया। हाल ही में दिल्ली के एक प्रमुख एग्रीबिजनेस लीडर के नेतृत्व में एंजेल इन्वेस्टर्स ने फार्मआइ (FarmAI) को 50 लाख रुपये के वैल्यूएशन पर स्वीकार किया है। वर्तमान में इस तकनीक को बिहार और हरियाणा के खेतों में टेस्ट किया जा रहा है। इसका यूजर डैशबोर्ड किसानों को हर गाय की मूवमेंट, फीडिंग पैटर्न, व्यवहार और स्वास्थ्य ट्रेंड्स की जानकारी देता है। जरूरत पड़ने पर यह गाय के गायब होने या असामान्य व्यवहार पर अलर्ट भेजता है।
तकनीकी प्रतिभा सिर्फ कृषि तक सीमित नहीं है। रामजी ने अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा की वेबसाइट में एक साइबर खामी खोज निकाली। 14 मई की रात लगभग 2 बजे वे कई वेबसाइट्स स्कैन कर रहे थे, तभी उन्होंने नासा की साइट में बग पकड़ा और उसे रिपोर्ट किया। 19 मई को नासा ने उनकी रिपोर्ट को मान्यता दी और उन्हें अपनी ‘हॉल ऑफ फेम’ सूची में शामिल किया।
रामजी खुद को ‘व्हाइट हैकर’ कहते हैं। उनका मकसद किसी वेबसाइट को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि उसकी सुरक्षा को मजबूत करना है। उन्होंने अब तक 50 से अधिक वेबसाइट्स की तकनीकी कमजोरियां उजागर की हैं और संबंधित एजेंसियों को सूचित किया है। वे कहते हैं, मेरे लिए हैकिंग केवल तकनीकी कौशल नहीं, बल्कि जिम्मेदारी है। मैं डिजिटल दुनिया को सुरक्षित बनाना चाहता हूं। रामजी न केवल तकनीकी खोजों तक सीमित हैं, बल्कि उन्होंने गुजरात पुलिस समेत देशभर की पुलिस और छात्रों को साइबर सुरक्षा की ट्रेनिंग दी है। वे ऑनलाइन-ऑफलाइन माध्यमों से गरीब और वंचित बच्चों को मुफ्त तकनीकी शिक्षा भी देते है।
रामजी बताते हैं कि उनकी हैकिंग में रुचि गेमिंग के शौक से शुरू हुई। गेम कैसे बनता है, इसे जानने की जिज्ञासा ने उन्हें कोडिंग की दुनिया में खींचा। इंटरनेट पर ट्यूटोरियल देखकर उन्होंने वेब डेवलपमेंट, मशीन लर्निंग और एआइ तक खुद ही सीखा। वे कहते हैं कि मैं एक छोटे शहर से आता हूं। यहां न तो माहौल है, न ही सपोर्ट। लेकिन अगर इच्छाशक्ति हो, तो कोई भी पीछे नहीं रह सकता। सिलिकॉन वैली से नहीं, अगली टेक्नोलॉजी लहर भारत के गांवों से निकलेगी।
रामजी के पिता रिंकेश कुमार एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं और समस्तीपुर में एनजीओ चलाते हैं। रामजी को भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की ओर से सम्मानित किया जा चुका है। रामजी फिलहाल असम के संयम मजूमदार के एनजीओ में नेशनल टेक कोऑर्डिनेटर की भूमिका भी निभा रहे हैं, जहां वे किसानों और पर्यावरण को लेकर तकनीकी समाधान विकसित करने में जुटे हैं।
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