समस्तीपुर/ शाहपुर पटोरी : इंसानी हिम्मत और सेवा भावना की मिसाल बने दुमदुमा गांव निवासी भुल्ला सहनी का आज दर्दनाक अंत हो गया। बचपन से नेत्रहीन रहे भुल्ला सहनी बाया नदी में एक फंसी नाव को निकालने के प्रयास में खुद जलकुंभी में फंस गए और डूब गए। सूचना मिलते ही ग्रामीणों ने उन्हें खोजने की कोशिश की, लेकिन असफल रहने पर प्रशासन को सूचित किया गया। इसके बाद एसडीआरएफ की टीम ने मौके पर पहुंचकर तलाशी अभियान शुरू किया।
भुल्ला सहनी का जीवन संघर्षों से भरा था, लेकिन उन्होंने अपनी कमजोरी को कभी अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। नेत्रहीन होते हुए भी उन्होंने अब तक 27 लोगों की जान बचाई थी। गांव और आसपास के इलाके में उन्हें “जल योद्धा” के नाम से जाना जाता था। भुल्ला की खासियत यह थी कि किसी के डूबने की आवाज सुनते ही वे बिना देर किए नदी में छलांग लगा देते थे। दिन हो या रात, गर्मी हो या सर्दी। खुद भुल्ला का कहना था, “मैं देख नहीं सकता, मगर पानी में मुझे सब कुछ दिखता है।”
लगभग पांच महीने पहले ही उनकी बहादुरी को राज्य स्तर पर भी पहचान मिली थी। पटना में आयोजित पुलिस सप्ताह के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उन्हें वीरता पुरस्कार और प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया था। इसके साथ ही 10 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि भी दी गई थी। अनुमंडल प्रशासन ने भी उन्हें कई बार सम्मानित किया था। आज भले ही भुल्ला सहनी हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी निस्वार्थ सेवा और साहस की कहानियां गांव-गांव तक लोगों को प्रेरित करती रहेंगी। उनकी शहादत यह बताती है कि असली वीरता आंखों से नहीं, दिल और हौसले से देखी जाती है।
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